chevron_left  पतितोऽपिarrow_drop_down
अनुशासन पर्व
अध्याय १०३
भृगुरु उवाच
पतितोऽपि महाराज भूतले स्मृतिमानभूत् |
२५ ख
सभा पर्व
अध्याय १८
वासुदेव उवाच
पतितौ हंसडिभकौ कंसामात्यौ निपातितौ |
१ क
वन पर्व
अध्याय ५४
वृहदश्व उवाच
पतित्वे तेन सत्येन देवास्तं प्रदिशन्तु मे ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२४
भीष्म उवाच
पतिधर्मं महाभागा जगामादर्शनं तदा ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४२
भीष्म उवाच
पतिधर्मरता साध्वी प्राणेभ्योऽपि गरीय़सी |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३२
विदुरो उवाच
पतिपुत्रवधादेतत्परमं दुःखमव्रवीत् |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
पतिपुत्रविहीनाय़ा हृदय़ं न विदीर्यते ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
भीष्म उवाच
पतिप्रसादः स्वर्गो वा तुल्यो नार्या न वा भवेत् |
५२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
भीष्म उवाच
पतिप्रिय़ा पतिप्राणा सा नारी धर्मभागिनी ||
४१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
पतिभिः पञ्चभिः शूरैरग्निकल्पैः प्रहारिभिः |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय १९१
वैशम्पाय़न उवाच
पतिभिर्निर्जितामुर्वीं विक्रमेण महावलैः |
१० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पतिमन्धं कथं वृद्धमन्वेति विजने वने ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
पतिमन्यं परीप्सस्व न सन्ति पतय़स्तव |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
पतिमन्यं पृथुश्रोणि वृणीष्व मितभाषिणि ||
७८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
पतिमन्यं वृणीष्वेति तस्येदं फलमागतम् ||
४० ख
विराट पर्व
अध्याय २०
भीमसेन उवाच
पतिमन्वचरत्सीता महारण्यनिवासिनम् ||
९ ख
विराट पर्व
अध्याय २०
भीमसेन उवाच
पतिमन्वचरद्वृद्धं पुरा वर्षसहस्रिणम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
पतिमन्वेषतीमेकां कृपणां शोककर्शिताम् |
३२ ख
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
पतिमित्यव्रवीत्प्राज्ञा शृणु सर्वं कपीश्वर ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय २८१
मार्कण्डेय़ उवाच
पतिमुत्थापय़ामास वाहुभ्यां परिगृह्य वै ||
१०० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
पतिमेव तु शोचामि यस्यातिथ्यमिदं कृतम् ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७४
भीष्म उवाच
पतिर्वापि गतिर्नार्याः पिता वा वरवर्णिनि |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
भीष्म उवाच
पतिर्व्रूय़ाद्दरिद्रो वा व्याधितो वा कथञ्चन ||
५३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
भीष्म उवाच
पतिर्हि देवो नारीणां पतिर्वन्धुः पतिर्गतिः |
५१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४६
युधिष्ठिर उवाच
पतिलोकमनुप्राप्तां तथा भर्तृव्रते स्थिताम् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८८
भीष्म उवाच
पतिलोकाद्विहीना च नैव स्त्री न पुमानिह ||
४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २३
कुन्त्यु उवाच
पतिलोकानहं पुण्यान्कामय़े तपसा विभो ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
पतिव्यूह्य महातेजा यथावद्भरतर्षभ ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
पतिव्रता महाभागा कथं नु विचरिष्यति ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय २२२
वैशम्पाय़न उवाच
पतिव्रता महाभागा द्रौपदी प्रत्युवाच ताम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय २७७
युधिष्ठिर उवाच
पतिव्रता महाभागा यथेय़ं द्रुपदात्मजा ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १
जनमेजय़ उवाच
पतिव्रता महाभागा सततं सत्यवादिनी |
६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
पतिव्रता महाभागा समानव्रतचारिणी |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
पतिव्रता सत्यशीला नित्यं चैवार्जवे रता |
६२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४४
भीष्म उवाच
पतिव्रता सम्प्रदीप्तं प्रविवेश हुताशनम् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४७
नागभार्यो उवाच
पतिव्रतात्वं भार्याय़ाः परमो धर्म उच्यते |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय १३
शल्य उवाच
पतिव्रतात्वात्सत्येन सोपश्रुतिमथाकरोत् ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
पतिव्रतात्वादेषा नाशुचेर्दर्शनमुपैतीति ||
११२ 5
वन पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
पतिव्रतानां माहात्म्यं वक्तुमर्हसि नः प्रभो |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
पतिव्रतानां लोकांश्च व्रजन्तं सोऽन्वपश्यत ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
पतिव्रतानां शुश्रूषा दुष्करा प्रतिभाति मे ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
पतिव्रतामिमां साध्वीं तवोद्वीक्षितुमप्युत ||
८० ख
आदि पर्व
अध्याय ११३
वैशम्पाय़न उवाच
पतिव्रतामेतदेव भविता पातकं भुवि ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४
उपश्रुतिरु उवाच
पतिव्रतासि युक्ता च यमेन निय़मेन च |
४ क
वन पर्व
अध्याय २८१
यम उवाच
पतिव्रतासि सावित्रि तथैव च तपोन्विता |
१२ क
वन पर्व
अध्याय २०६
मार्कण्डेय़ उवाच
पतिव्रताय़ा माहात्म्यं व्राह्मणस्य च सत्तम |
३२ क
वन पर्व
अध्याय २०५
व्राह्मण उवाच
पतिव्रताय़ाः सत्याय़ाः शीलाढ्याय़ा यतव्रत |
४ क
वन पर्व
अध्याय २०५
मार्कण्डेय़ उवाच
पतिशुश्रूषपरय़ा दान्तय़ा सत्यशीलय़ा |
३ क
वन पर्व
अध्याय १९७
स्त्र्यु उवाच
पतिशुश्रूषय़ा धर्मो यः स मे रोचते द्विज ||
२८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
पतिशुश्रूषय़ा यन्मे तपः किञ्चिदुपार्जितम् |
३९ क