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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्च कुरुश्रेष्ठमुपातिष्ठन्त तं नृपम् ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवाश्च जय़ं लव्ध्वा सङ्ग्रामशिरसि स्थिताः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
धृतराष्ट्र उवाच
पाण्डवाश्च तथा भीष्मं तन्ममाचक्ष्व सञ्जय़ ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्च महात्मानः प्रणम्य धनदं प्रभुम् |
३३ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्च महात्मानो द्रौपदी च यशस्विनी |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवाश्च महाराज धृष्टद्युम्नपुरोगमाः |
२९ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवाश्च महाराज लव्धलक्षाः प्रहारिणः |
३५ क
शल्य पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवाश्च महाराज समरे जितकाशिनः |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्च महीपालैः समेतैः संवृतास्तदा |
३० क
वन पर्व
अध्याय २४३
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्च महेष्वासा दूतवाक्यप्रचोदिताः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवाश्च महेष्वासा भीमसेनपुरोगमाः |
६४ क
शल्य पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवाश्च महेष्वासा व्यूह्य सैन्यमरिन्दमाः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवाश्च मुदा युक्ता युधिष्ठिरपुरोगमाः |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्च यथा मुक्तास्तथोभौ सात्वतौ युधि |
६४ क
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
पाण्डवाश्च वने तस्मिन्न्यवसन्काम्यके तदा ||
३० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८६
दुर्योधन उवाच
पाण्डवाश्च विधेय़ा मे स च प्रातरिहेष्यति ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्च सहद्रोणाः सकृपाश्च विशां पते |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवाश्चान्वपद्यन्त प्रत्यैकश्येन सैन्धवम् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय १८८
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्चापि कुन्ती च धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः |
२१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्चापि गोविन्दं पुरस्कृत्य हतद्विषः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय १२९
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्चापि तत्सर्वं प्रत्यजानन्नरिन्दमाः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्चापि तत्सर्वं प्रत्यजानन्नरिन्दमाः |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय १३६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्चापि ते राजन्मात्रा सह सुदुःखिताः |
१५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवाश्चापि ते सर्वे किं वक्ष्यन्ति नराधिपान् |
३१ क
आदि पर्व
अध्याय १३७
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्चापि निर्गत्य नगराद्वारणावतात् |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवाश्चापि सम्प्राप्तास्तं देशं युद्धमीप्सवः ||
६४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४२
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्चेदिपाञ्चाला यादवाश्च समागताः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय १९९
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्चैव कृष्णश्च विदुरश्च महामतिः ||
१० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवाश्चैव ते सर्वे भृशं शोकपराय़णाः |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवास्तावकं सैन्यं व्यधमन्निशितैः शरैः |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवास्तावकाश्चैव तान्रक्ष महतो भय़ात् ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवास्तु जय़ं लव्ध्वा तव सैन्यमुपाद्रवन् |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवास्तु जय़ं लव्ध्वा परत्र च परां गतिम् |
१०७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवास्तु जय़ं लव्ध्वा परत्र च महद्यशः |
६२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवास्तु जय़ं लव्ध्वा सिंहनादान्प्रचक्रिरे |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवास्तु जय़ं लव्ध्वा सैन्धवं विनिहत्य च |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवास्तु जय़ं लव्ध्वा हृष्टा ह्यासन्विशां पते |
६७ क
वन पर्व
अध्याय १७८
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवास्तु भय़ान्मुक्तं प्रेक्ष्य भीमं महावलम् |
५० क
वन पर्व
अध्याय १५९
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवास्तु महात्मानस्तेषु वेश्मसु तां क्षपाम् |
३५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवास्तु महात्मानो लघुभूय़िष्ठसैनिकाः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवास्तु महाराज जित्वा शत्रून्महाहवे |
२४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवास्तु महेष्वासं कर्णं सौभद्रमेव च |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवास्तु रणे दृष्ट्वा मद्रराजपदानुगान् |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय १३३
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवास्तु रथान्युक्त्वा सदश्वैरनिलोपमैः |
१ क
वन पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवास्तु वने वासमुद्दिश्य भरतर्षभाः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवास्तुष्टुवुः सर्वे प्रणेमुश्च मुहुर्मुहुः ||
१३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १५
व्यास उवाच
पाण्डवास्त्वं च राष्ट्रं च सदा संरक्ष्यमेव नः |
२५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवास्त्वभितो मातुर्धरण्यां सुषुपुस्तदा |
३ क
वन पर्व
अध्याय २२६
वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डवास्त्वाभिवीक्षन्तां यय़ातिमिव नाहुषम् ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
पाण्डवीं समरे सेनां संममर्द सकुञ्जरः |
४१ क