वन पर्व
अध्याय
२५८
मार्कण्डेय़ उवाच
पितामहस्तु प्रीतात्मा ददौ वैश्रवणस्य ह |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
पितामहस्त्वपत्यं वै कविं जग्राह तत्त्ववित् ||
३३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७१
भगवानु उवाच
पितामहस्य द्रोणस्य विदुरस्य च धीमतः |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहस्य द्रोणस्य विदुरस्य महामतेः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
भीष्म उवाच
पितामहस्य भगवांस्तथा च तदभूत्प्रभो ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०३
नारद उवाच
पितामहस्य भवनं जगतः कृपय़ा तदा ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहस्य महतो वर्तमाने महीतले |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९२
जनमेजय़ उवाच
पितामहस्य मे यज्ञे धर्मपुत्रस्य धीमतः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहस्य यद्वाक्यं तद्वो रोचत्विति प्रभुः ||
४३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
वसिष्ठ उवाच
पितामहस्य यद्वृत्तं व्रह्मणः परमात्मनः ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५५
च्यवन उवाच
पितामहस्य वदतः पुरा देवसमागमे |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१००
नारद उवाच
पितामहस्य वदनादुदतिष्ठदनिन्दिता ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
युधिष्ठिर उवाच
पितामहस्य विदितं किमन्यत्र तपोवलात् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
पितामहस्य संवादमिन्द्रस्य च युधिष्ठिर ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहस्य सरसः प्रवृत्तासि सरस्वति |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
पितामहस्य सरसः प्रस्रुता लोकपावनी |
१२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहस्याथ निशम्य वाक्यं; राजा सह भ्रातृभिराजमीढः |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहस्यानुचरो वीरशाय़ी भवेन्नरः |
४१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२९
समुद्र उवाच
पितामहा महाभाग निवर्तस्वेत्यथाव्रुवन् ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
१०७
लोमश उवाच
पितामहा मे वरदे कपिलेन महानदि |
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहाद्यं प्रवदन्ति षष्ठं; महर्षिमार्षेय़विभूतिय़ुक्तम् |
४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४२
सूत उवाच
पितामहानां सर्वेषां गमनागमनं तदा ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५४
सूत उवाच
पितामहानां सर्वेषां दैवेनाविष्टचेतसाम् |
२० क
सभा पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहानां सर्वेषां नाहं गतिमवाप्नुय़ाम् ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२२
वसुहोम उवाच
पितामहान्महादेवो जागर्ति भगवाञ्शिवः ||
४७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहार्थं सम्भूता तुष्ट्यर्थं च मनीषिणाम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२५
युधिष्ठिर उवाच
पितामहाशा महती ममासीद्धि सुय़ोधने |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
५४
सूत उवाच
पितामहाय़ कृष्णाय़ तदर्हाय़ न्यवेदय़त् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहाय़ शुद्धाय़ युगादौ लोकधारिणे |
४५ क
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहाय़ सन्तप्त एवमर्थं न्यवेदय़त् ||
३३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहीमभ्यवदत्साम्ना परमवल्गुना ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
धृतराष्ट्र उवाच
पितामहे वा पाञ्चालास्तन्ममाचक्ष्व सञ्जय़ ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहेन यजता आहूता पुष्करेषु वै |
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
युधिष्ठिर उवाच
पितामहेन विधिवद्यज्ञाः प्रोक्ता महात्मना |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
पितामहेन वृद्धेन तथाचार्येण धीमता |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहेन वो युद्धं पूर्वमेव भविष्यति |
७ ख
वन पर्व
अध्याय
१६८
अर्जुन उवाच
पितामहेन संहारः प्रजानां विहितो ध्रुवम् |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
पितामहेन सङ्ग्रामे कथं योत्स्यामि माधव ||
८५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
युधिष्ठिर उवाच
पितामहेशाय़ विभो नामान्याचक्ष्व शम्भवे |
१ क
वन पर्व
अध्याय
२७५
मार्कण्डेय़ उवाच
पितामहो जगत्स्रष्टा दर्शय़ामास राघवम् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
पितामहो जगन्नाथः सावित्री व्रह्मणः सती |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
पितामहो नः स्थविरो मनस्वी; महाप्राज्ञः सर्वधर्मोपपन्नः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
पितामहो महादेवं दर्शय़न्प्रत्यभाषत ||
४२ ख
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहो मुनिर्देवस्तस्य पुत्रः प्रजापतिः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२५८
मार्कण्डेय़ उवाच
पितामहो रावणस्य साक्षाद्देवः प्रजापतिः |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६२
दुर्योधन उवाच
पितामहो हि कुशलः परेषामात्मनस्तथा |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
पितामहो हि गाङ्गेय़ः शन्तनोरधि भारत |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
युधिष्ठिर उवाच
पितामहो हि भगवांस्तस्माद्देवादनन्तरः |
१०३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
पितामहोऽव्रवीच्चैनं भूतानि सृज माचिरम् ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४५
सनत्सुजात उवाच
पितामहोऽस्मि स्थविरः पिता पुत्रश्च भारत |
२६ क