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आदि पर्व
अध्याय २०६
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्यानि चैव तीर्थानि ददर्श भरतर्षभ |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
भीष्म उवाच
पुण्यानि चैव तीर्थानि सोऽतिक्रम्य तथाध्वनः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्यानि यस्य कर्माणि तानि मे शृणु भारत ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय २०९
वर्गो उवाच
पुण्यानि रमणीय़ानि तानि गच्छत माचिरम् ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय १२८
सोमक उवाच
पुण्यान्न कामय़े लोकानृतेऽहं व्रह्मवादिनम् |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
भीष्म उवाच
पुण्यान्पुण्यकृतो यान्ति पापान्पापकृतो जनाः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
पुण्यान्यन्यानि कुर्वीत श्रद्दधानो जितेन्द्रिय़ः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय १३४
लोमश उवाच
पुण्यान्यन्यानि शुचिकर्मैकभक्ति; र्मय़ा सार्धं चरितास्याजमीढ ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय १२८
सोमक उवाच
पुण्यापुण्यफलं देव सममस्त्वावय़ोरिदम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७७
भृगुरु उवाच
पुण्यापुण्यैस्तथा गन्धैर्धूपैश्च विविधैरपि |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्याभिरामं वहुरत्नपूर्णं; लभत्यधिष्ठानवरं स राजन् ||
३९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्याभ्यश्च सरिद्भ्यस्त्वं सदा पुण्यतमा शुभे |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
पुण्यामृद्धरसां भूमिं यो ददाति पुरन्दर |
६४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्यावसथवान्वीर पुण्यकृद्भिर्निषेवितः |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
पुण्याश्च गन्धाः शव्दाश्च तस्यां पार्थ समन्ततः |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
पुण्याश्रमवतीं रम्यां मनोज्ञाण्डजसेविताम् ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्याहघोषमिश्रेण पूज्यमाना द्विजातिभिः ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्याहघोषस्तत्रासीद्दिवस्पृगिव भारत ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्याहघोषैर्विमलैर्वेदानां निनदैस्तथा |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
पुण्याहवाचनं दैवे व्राह्मणस्य विधीय़ते |
३८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
भीष्म उवाच
पुण्याहवाचने नित्यं धर्मकार्येषु चासकृत् |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
पुरोहित उवाच
पुण्याहवाचने नित्यं धर्मकृत्येषु चासकृत् |
४४ क
वन पर्व
अध्याय ६५
वृहदश्व उवाच
पुण्याहवाचने राज्ञः सुनन्दासहितां स्थिताम् ||
६ ग
मौसल पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्याहे वाच्यमाने च जपत्सु च महात्मसु |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३४
व्यास उवाच
पुण्याय़तनचारी च भूतानामविहिंसकः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय ८६
धौम्य उवाच
पुण्ये गिरौ सुराष्ट्रेषु मृगपक्षिनिषेविते |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
भीष्म उवाच
पुण्ये गिरौ हिमवति सिद्धचारणसेविते ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्ये तीर्थे शुभे देशे वसु दत्त्वा शुभाननः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्ये भागीरथीतीरे शोकव्याकुलचेतसम् |
८ क
वन पर्व
अध्याय ८७
धौम्य उवाच
पुण्ये स्वर्गोपमे दिव्ये नित्यं देवर्षिसेविते ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्येन चरता राजन्भूर्दिशः खं नभस्तथा |
२२ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
पुण्येन महता युक्तः सतां लोके महीय़ते ||
१४१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४८
ऋषय़ ऊचुः
पुण्येन यशसेत्येके नैतदस्तीति चापरे ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३
शल्य उवाच
पुण्येन हय़मेधेन मामिष्ट्वा पाकशासनः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२१
श्रीरु उवाच
पुण्येषु त्रिषु लोकेषु सर्वे स्थावरजङ्गमाः |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्येऽहनि महातेजाः कृतकौतुकमङ्गलः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय १८७
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्येऽहनि महावाहुरर्जुनः कुरुतां क्षणम् ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
पुण्यैः पुष्पैः सदा दिव्यैः कीर्यमाणाः पुनः पुनः ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २९
श्रीभगवानु उवाच
पुण्यो गन्धः पृथिव्यां च तेजश्चास्मि विभावसौ |
९ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
पुण्योऽय़मितिहासाख्यः पवित्रं चेदमुत्तमम् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय २९७
युधिष्ठिर उवाच
पुत्र आत्मा मनुष्यस्य भार्या दैवकृतः सखा |
५१ क
सभा पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्र कामय़से मोहान्मैवं भूः शाम्य साध्विह ||
३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्र गत्वा मम वचो व्रूय़ास्त्वं पितरं तव |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ४२
पितर ऊचुः
पुत्र दिष्ट्यासि सम्प्राप्त इमं देशं यदृच्छय़ा |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
भीष्म उवाच
पुत्र नैतत्त्वय़ा ग्राह्यं कपटारम्भसंवृतम् |
५६ क
वन पर्व
अध्याय २७५
व्रह्मो उवाच
पुत्र नैतदिहाश्चर्यं त्वय़ि राजर्षिधर्मिणि |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
पुत्र प्रार्थय़ते नित्यं तां रक्षस्व यथावलम् ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय २६
सूत उवाच
पुत्र मा साहसं कार्षीर्मा सद्यो लप्स्यसे व्यथाम् |
११ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्र विश्रम्यतां तावन्ममापि वलवाञ्श्रमः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६६
भीष्म उवाच
पुत्र शीघ्रमितो गत्वा राजधर्मनिवेशनम् |
१० ख