chevron_left  परामृद्धिमवाप्याथarrow_drop_down
अनुशासन पर्व
अध्याय ७९
वसिष्ठ उवाच
परामृद्धिमवाप्याथ स गोलोके महीय़ते ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
परामृशसि यत्क्रुद्धः खड्गमद्भुतविक्रम ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७२
भीष्म उवाच
परामृश्य महाय़ुद्धे निर्जित्य पृथिवीपतीन् |
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
परामृष्टं शुना चैव तं भागं रक्षसां विदुः ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७८
भीष्म उवाच
परामृष्टां त्वय़ा हीमां को हि गन्तुमिहार्हति ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८७
पराशर उवाच
परार्थं विस्तराः सर्वे त्यागमात्महितं विदुः ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८७
पराशर उवाच
परार्थे वर्तमानस्तु स्वकार्यं योऽभिमन्यते |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
परार्ध्यास्तरणास्तीर्णं सोत्तरच्छदमृद्धिमत् |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११९
कीट उवाच
परार्ध्येषु महाभाग स्वपामीह सुपूजितः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९०
भीष्म उवाच
परावमानी पुरुषो भविता निरय़ोपगः ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१५
भीष्म उवाच
परावरज्ञं भूतानां सर्वज्ञं समदर्शनम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय २०२
व्याध उवाच
परावरज्ञः सक्तः सन्सर्वभूतानि पश्यति ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
महेश्वर उवाच
परावरज्ञे धर्मज्ञे तपोवननिवासिनि |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
भीष्म उवाच
परावरज्ञो धर्मस्य परां नैःश्रेय़सीं गतिम् ||
४८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
परावरज्ञो भूतानां यं प्राप्यानन्त्यमश्नुते ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
परावरज्ञो लोकस्य धर्मवित्सुखदुःखवित् ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय ५४
सूत उवाच
परावरज्ञो व्रह्मर्षिः कविः सत्यव्रतः शुचिः ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
परावरदृशः शक्तिर्ज्ञानवेलां न पश्यति |
५१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
परावरविशेषज्ञा गन्तारः परमां गतिम् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
परावराणां स्रष्टारं पुराणं परमव्ययम् ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
परावर्तनसंवर्तमवप्लुतमथाप्लुतम् |
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
परावसुर्महाराज क्षिप्त्वाह जनसंसदि ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
परावसोस्तदा श्रुत्वा शस्त्रं जग्राह भार्गवः ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
भीष्म उवाच
परावहो नाम परो वाय़ुः स दुरतिक्रमः ||
५२ ख
आदि पर्व
अध्याय १७१
वसिष्ठ उवाच
पराशर परान्धर्माञ्जानञ्ज्ञानवतां वर ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८७
भीष्म उवाच
पराशरं महात्मानं धर्मे परमनिश्चय़म् ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७९
भीष्म उवाच
पराशरं महात्मानं पप्रच्छ जनको नृपः ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय ७
नारद उवाच
पराशरः पर्वतश्च तथा सावर्णिगालवौ |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
पराशरसुतः श्रीमान्व्यासो वाक्यमुवाच ह ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ५२
सूत उवाच
पराशरस्तरुणको मणिस्कन्धस्तथारुणिः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
जनमेजय़ उवाच
पराशरस्य दाय़ादः कृष्णद्वैपाय़नो मुनिः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
विश्वावसुरु उवाच
पराशरस्य विप्रर्षेर्वार्षगण्यस्य धीमतः ||
५७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
पराशरात्मजो धीमान्परलोकार्थचिन्तकः |
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
पराशरात्मजो विद्वान्व्रह्मर्षिः संशितव्रतः |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
पराशराद्गन्धवती महर्षिं; तस्मै नमोऽज्ञानतमोनुदाय़ ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
पराशरेण दाय़ादः सौदासस्याभिरक्षितः ||
६८ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
पराशरेण संय़ुक्ता सद्यो गर्भं सुषाव सा |
६९ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
पराशरोऽपि भगवाञ्जगाम स्वं निवेशनम् ||
६८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
पराश्रय़ा वासुदेव या जीवामि धिगस्तु माम् |
७३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४४
व्राह्मण उवाच
पराश्वासकरं वाक्यमिदं मे भवतः श्रुतम् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २९
वासुदेव उवाच
परासिक्तान्धार्तराष्ट्रांस्तु विद्धि; प्रदह्यमानान्कर्मणा स्वेन मन्दान् ||
४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
परासिक्ते च वस्तस्मिन्कथमासीन्मनस्तदा ||
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५७
भीष्म उवाच
परासुता क्रोधलोभादभ्यासाच्च प्रवर्तते |
११ क
आदि पर्व
अध्याय १६९
गन्धर्व उवाच
परासुश्च यतस्तेन वसिष्ठः स्थापितस्तदा |
३ क
वन पर्व
अध्याय १३८
लोमश उवाच
परासुश्च सुतो दृष्टः शप्तश्चेष्टः सखा मय़ा |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
परासृजसि मिथ्या किं किं च त्वं वहु मूढवत् |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ८६
दुर्योधन उवाच
पराय़णं पाण्डवानां निय़ंस्यामि जनार्दनम् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
परि पेतुः सुसंरव्धाः पाण्डुपाञ्चालसोमकाः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
परिकल्प्यास्य वृत्तिः स्यात्सदारस्य नराधिप ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
परिकाल्य कुरून्सर्वाञ्शरवर्षैरवाकिरन् ||
७८ ख