विराट पर्व
अध्याय
८
द्रौपद्यु उवाच
पुत्रा गन्धर्वराजस्य महासत्त्वस्य कस्यचित् |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
पुत्रा दाराश्च भृत्याश्च पौरजानपदाश्च ते |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
पुत्रा दारास्तथैवात्मा कोशो मित्राणि सञ्चय़ः |
१४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
पुत्रा निवेश्याश्च कुलाद्भृत्या लभ्याश्च भारत ||
११८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११७
नारद उवाच
पुत्रा ममैव चत्वारो भवेय़ुः कुलभावनाः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
२७७
अश्वपतिरु उवाच
पुत्रा मे वहवो देवि भवेय़ुः कुलभावनाः ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्रा वा मम दुर्धर्षा राजानो वा महारथाः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
पुत्रा विवस्वतः सर्वे मह्यस्तेषां तथावरः |
४१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
पुत्रा वै कतमे राजञ्जीवन्तु तव शंस मे |
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रांश्च पौत्रांश्च कुलं च सर्व; मासप्तमं तारय़ते परत्र ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रांश्चोत्पादय़ामासुः |
८२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
पुत्रांस्तव महावाहो त्वरय़ा ताञ्जघान ह ||
४४ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
पुत्रांस्तु तव सम्प्रेक्ष्य भीमसेनो महावलः |
२७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
पुत्रांस्ते निहतान्दृष्ट्वा सूतपुत्रो महामनाः |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३
युधिष्ठिर उवाच
पुत्राः पञ्चशताश्चापि शप्ताः श्वपचतां गताः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
श्रीरु उवाच
पुत्राः पितॄनभ्यवदन्भार्याश्चाभ्यवदन्पतीन् ||
५४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
पुत्राः प्रदेय़ा ज्ञानेषु कुलधर्मेषु भारत ||
११७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
पुत्राः शिष्याश्च दय़ितास्तदपत्यं च धर्मिणाम् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राः शुश्रूषवः सन्ति प्रेष्याश्च प्रिय़कारिणः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९६
नारद उवाच
पुत्राः सलिलराजस्य धारय़न्ति महोदय़म् ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६४
भीष्म उवाच
पुत्राञ्छ्रिय़ं च लभते यश्छत्रं सम्प्रय़च्छति |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्राणां च पराभवं श्रुत्वा सञ्जय़ सर्वशः |
२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राणां चैव सर्वेषां ये चास्य सुहृदो हताः |
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राणां जन्म वृद्धिं च वैदिकाध्ययनानि च |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राणां जय़माकाङ्क्षन्विललापातुरो यथा ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां तव दुर्धर्ष पाण्डवानां तथैव च |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां तव नेत्रेभ्यो दुःखाद्वह्वपतज्जलम् ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
पुत्राणां तव राजेन्द्र त्वन्निमित्तमिति प्रभो ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां तव राजेन्द्र पीत्वा शोणितमुद्गताः ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां तव वीराणां पश्यतामवधीद्वली ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां तव वीराणां युध्यतामवधीत्पुनः ||
९५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां तस्य वालानां कुमाराणां यशस्विनाम् |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां ते जय़ाकाङ्क्षी भीष्मः कुरुपितामहः ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां ते महत्सैन्यं समरौत्सीद्धनञ्जय़ः ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां ते महत्सैन्यमासीद्राजन्पराङ्मुखम् ||
६८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां ते रथानीकं प्रत्युद्याताः सुदुर्जय़ाः ||
९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१३
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्राणां दातुमिच्छामि प्रेत्यभावानुगं वसु |
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
भीष्म उवाच
पुत्राणां द्वे शते व्रह्मन्कालेन विनिपातिते ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०१
भीष्म उवाच
पुत्राणां न च ते कञ्चिदिच्छन्त्यन्यं प्रजापतिम् ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां भरतश्रेष्ठ शकुनेः सौवलस्य च |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां मतमास्थाय़ जितान्मन्यसि पाण्डवान् ||
२२ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणां राज्यकामानां त्वय़ा राजन्हितैषिणा |
५७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्राणां व्यसनं मन्ये ध्रुवं प्राप्तं सुदारुणम् |
९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राणां सुहृदां चैव गच्छत्वानृण्यमद्य सः ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
२८५
सूर्य उवाच
पुत्राणामथ भार्याणामथो मातुरथो पितुः ||
१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राणामार्यकाणां च पतीनां च कुरुस्त्रिय़ः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२६
सञ्जय़ उवाच
पुत्राणामिव चैतेषां धर्ममाचरतां सदा |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः |
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
३४ ख