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आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
पोषो हि त्वदधीनो मे सन्तानमपि चाक्षय़म् |
६३ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
पौण्डरीकमवाप्नोति प्रभातामेव शर्वरीम् ||
७४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
पौण्डरीकस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोत्यनुत्तमम् |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय १७७
धृष्टद्युम्न उवाच
पौण्ड्रको वासुदेवश्च भगदत्तश्च वीर्यवान् |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
पौण्ड्रको वासुदेवश्च वङ्गः कालिङ्गकस्तथा |
११ क
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
पौण्ड्रको वासुदेवेति योऽसौ लोकेषु विश्रुतः ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
पौण्ड्रमत्स्यक इत्येव स वभूव नराधिपः ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
पौत्रं तव पुरस्कृत्य लक्ष्मणं प्रिय़दर्शनम् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
पौत्रं तु तव दुर्धर्षं लक्ष्मणं प्रिय़दर्शनम् |
११ क
वन पर्व
अध्याय १०६
लोमश उवाच
पौत्रं भरतशार्दूल इदं वचनमव्रवीत् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय १०६
लोमश उवाच
पौत्रश्च ते त्रिपथगां त्रिदिवादानय़िष्यति |
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
पौत्रस्तव महाराज तव पौत्रमभाषत ||
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
पौत्रस्तव महावाहो जनिष्यति महामनाः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५५
च्यवन उवाच
पौत्रस्ते भविता राजंस्तेजोवीर्यसमन्वितः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५५
च्यवन उवाच
पौत्रस्ते भविता विप्र तपस्वी पावकद्युतिः ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय १६९
गन्धर्व उवाच
पौत्रस्य भरतश्रेष्ठ चकार भगवान्स्वय़म् ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०२
नारद उवाच
पौत्रस्यार्थे भवांस्तस्माद्गुणकेशीं प्रतीच्छतु |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
पौत्रा भीष्मस्य शिष्याश्च द्रोणस्य च कृपस्य च ||
४९ ख
आदि पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
पौत्रानादाय़ तान्सर्वान्वसूनि विविधानि च ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय १०६
लोमश उवाच
पौत्रे भारं समावेश्य जगाम त्रिदिवं तदा ||
३४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
पितो उवाच
पौत्रेण तानवाप्नोति यत्र गत्वा न शोचति ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३१
सञ्जय़ उवाच
पौत्रेण भीमसेनस्य शरैः सोऽञ्जनपर्वणा |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय १११
वैशम्पाय़न उवाच
पौनर्भवश्च कानीनः स्वैरिण्यां यश्च जाय़ते ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११९
भीष्म उवाच
पौरकार्यहितान्वेषी भव कौरवनन्दन ||
१९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदश्चापि जनः सर्वो यथावय़ः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
पौरजानपदा यस्मिन्विश्वासं धर्मतो गताः |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९५
वामदेव उवाच
पौरजानपदा यस्य स्वनुरक्ताः सुपूजिताः |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३३
भीष्म उवाच
पौरजानपदांश्चापि व्राह्मणांश्च वहुश्रुतान् |
३ क
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदाः सर्वे प्राय़शः कुरुनन्दन |
७७ क
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदाः सर्वे मृतं स्वमिव वान्धवम् ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १०२
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदाः सर्वे वभूवुः सततोत्सवाः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदानां च यानि कार्याणि नित्यशः |
१८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदानां च शौचाशौचं युधिष्ठिर |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
वासुदेव उवाच
पौरजानपदानां च संमतः साधुसत्कृतः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदान्सर्वान्विसृज्य कुरुनन्दनः |
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८८
भीष्म उवाच
पौरजानपदान्सर्वान्संश्रितोपाश्रितांस्तथा |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदामात्याः स राजा राजसत्तमः ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११६
नारद उवाच
पौरजानपदार्थं तु ममार्थो नात्मभोगतः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९२
उतथ्य उवाच
पौरजानपदाश्चैव गोप्तव्याः स्वा यथा प्रजाः ||
४३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदाश्चैव ददृशुस्तं नराधिपम् ||
१६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदाश्चैव यानैर्वहुविधैस्तथा |
५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदाश्चैव राजभक्तिपुरस्कृताः |
११ क
वन पर्व
अध्याय २६१
मार्कण्डेय़ उवाच
पौरजानपदैः सार्धं रामानय़नकाङ्क्षय़ा ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदैश्चैव मन्त्रिवृद्धैश्च पार्थिवः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
पौरजानपदैस्तुष्टैरित्युक्तो नाहुषस्तदा |
२४ क
सभा पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
पौरवं तु विनिर्जित्य दस्यून्पर्वतवासिनः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
पौरवं पतितं दृष्ट्वा नामृष्यत जय़द्रथः ||
५६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
पौरवं रथमास्थाय़ केशपक्षे परामृशत् ||
५३ ख