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आदि पर्व
अध्याय १५५
व्राह्मण उवाच
प्रैहि मां राज्ञि पृषति मिथुनं त्वामुपस्थितम् ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८६
भीष्म उवाच
प्रैहि रामं महावाहो गुरुं लोकहितं कुरु ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२८
व्यास उवाच
प्रोक्तं तद्व्यक्तमित्येव जाय़ते वर्धते च यत् |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
प्रोक्तं ते पुत्र सर्वं वै यन्मां त्वं परिपृच्छसि ||
७३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
प्रोक्तः स्वय़ं सत्यसन्धेन मृत्यु; स्तव प्रिय़ार्थं नरदेव युद्धे |
८४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४५
भीष्म उवाच
प्रोक्तवानहमस्मीति भोःशव्दालङ्कृतं वचः ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
प्रोक्तस्त्वय़ा पूर्वमेव प्रवीरो लोकविश्रुतः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३६
भीष्म उवाच
प्रोक्ता गृहस्थवृत्तिस्ते विहिता या मनीषिणाम् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोक्तानि मुनिभिः श्रुत्वा विस्मय़ामास पाण्डवः ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६६
धृतराष्ट्र उवाच
प्रोक्तान्यस्त्राणि दिव्यानि पुत्राय़ गुरुकाङ्क्षिणे ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
प्रोक्तेन चैकनाम्नाय़ं विशेषः सुमहान्भवेत् ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
वसिष्ठ उवाच
प्रोक्तो वुद्धश्च तत्त्वेन यथाश्रुतिनिदर्शनात् |
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोक्षिता यत्र पशवो वधं प्राप्स्यन्ति वै मखे |
७४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०६
सुपर्ण उवाच
प्रोक्षिता यत्र वहवो वराहाद्या मृगा वने |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय १४
कृष्ण उवाच
प्रोक्षितानां प्रमृष्टानां राज्ञां पशुपतेर्गृहे |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
प्रोक्षिताभ्युक्षितं मांसं तथा व्राह्मणकाम्यया |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०१
शुक्र उवाच
प्रोक्षिताभ्युक्षिताः सौम्या यथाय़ोगं यथास्मृति ||
३३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २८
व्राह्मण उवाच
प्रोक्ष्यमाणं पशुं दृष्ट्वा यज्ञकर्मण्यथाव्रवीत् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३३
नरनाराय़णावू ऊचतुः
प्रोक्ष्यापवर्गं देवेशः प्राङ्मुखः कृतवान्स्वय़म् ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४०
श्रीभगवानु उवाच
प्रोच्यते गुणसङ्ख्याने यथावच्छृणु तान्यपि ||
१९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १८
व्राह्मण उवाच
प्रोच्यमानं मय़ा विप्र निवोधेदमशेषतः ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४०
श्रीभगवानु उवाच
प्रोच्यमानमशेषेण पृथक्त्वेन धनञ्जय़ ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोच्यमानमिदं कृत्स्नं स्ववंशजननं शुभम् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
प्रोत्तिष्ठमानं सौभद्रं गदय़ा मूर्ध्न्यताडय़त् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
प्रोत्सारितं महावेगैः कर्णपाण्डवय़ोः शरैः ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
प्रोत्सारिते जने तस्मिन्कर्णपाण्डवय़ोः शरैः |
७६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
प्रोत्सारय़न्तः शनकैस्तं जनं सर्वतोदिशम् ||
३२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६५
भीष्म उवाच
प्रोत्साहय़ति राजंस्त्वां विग्रहे पाण्डवैः सह ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
प्रोत्साहय़न्दुरात्मानं धार्तराष्ट्रं सुदुर्मतिः |
६५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
प्रोथय़न्त्रैर्विचित्रैश्च शस्त्रैश्च विमलैस्तथा |
५५ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
प्रोद्घुष्टां क्रौञ्चकुररैश्चक्रवाकोपकूजिताम् |
१०८ क
वन पर्व
अध्याय १८०
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोवाच कृष्णामपि याज्ञसेनीं; दशार्हभर्ता सहितः सुहृद्भिः |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३९
वाय़ुरु उवाच
प्रोवाच गच्छ व्रूहि त्वं वरुणं परुषं वचः |
१७ ग
आदि पर्व
अध्याय १९८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोवाच चामितमतिः प्रश्रितं विनय़ान्वितः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय २४
सूत उवाच
प्रोवाच चैनं विनता पुत्रहार्दादिदं वचः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
प्रोवाच चैनम् |
२८ ख
वन पर्व
अध्याय ११३
लोमश उवाच
प्रोवाच चैनां भवतोऽऽश्रमाय़; गच्छाव यावन्न पिता ममैति ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय २५३
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोवाच चैनां वचनं नरेन्द्र; धात्रेय़िकामार्ततरस्तदानीम् ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोवाच दुःखशोकार्तः क्षत्रधर्मं विगर्हय़न् ||
३९ ग
वन पर्व
अध्याय २२५
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोवाच दैन्याभिहतान्तरात्मा; निःश्वासवाष्पोपहतः स पार्थान् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६७
भीष्म उवाच
प्रोवाच नीय़तामेष सोऽन्य आनीय़तामिति ||
१० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोवाच पितरं वृद्धं मन्दं मन्दमिवानतः ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
प्रोवाच पुरुषव्याघ्रं भीममाहवशोभिनम् ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोवाच भ्रातरं कृष्णं रौहिणेय़ो महामनाः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४९
भीष्म उवाच
प्रोवाच मधुरं वाक्यं प्रकृत्या धर्मवत्सलः ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
प्रोवाच मनसा चिन्त्य दैवेनोपनिपीडितः |
१ ख
वन पर्व
अध्याय २५२
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोवाच मा मा स्पृशतेति भीता; धौम्यं प्रचुक्रोश पुरोहितं सा ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
प्रोवाच मुनिशार्दूलमिदं वचनमर्थवत् ||
५८ ख
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोवाच योगतत्त्वज्ञो योगविद्यामनुत्तमाम् ||
३४ ख
सभा पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
प्रोवाच राजमध्ये तं सभां विश्रावय़न्निव ||
१३ ख