कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
पदात्पदं विचलितुं नाशक्नोत्तत्र भारत ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
पदात्योघैश्च संरव्धैः परिवव्रुर्धनञ्जय़म् ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
पदातय़श्च नागाश्च सादिनश्चोद्यताय़ुधाः ||
८२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५०
वैशम्पाय़न उवाच
पदातय़श्च पुरुषाः शस्त्राणि विविधानि च |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९७
वैशम्पाय़न उवाच
पदातय़श्च ये शूराः कार्मुकासिगदाधराः |
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
६३
वृहदश्व उवाच
पदानि गणय़न्गच्छ स्वानि नैषध कानिचित् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२९
भीष्म उवाच
पदापनय़नं क्षिप्रमेतावत्साम्पराय़िकम् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१३४
वन्द्यु उवाच
पदाहतस्येव शिरोऽभिहत्य; नादष्टो वै मोक्ष्यसे तन्निवोध ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११०
गालव उवाच
पदे पदे तु पश्यामि सलिलादग्निमुत्थितम् ||
१३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
पदे पदे भगवता व्यासेन च महात्मना |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
पदे पदे यज्ञफलं स प्राप्नोति न संशय़ः ||
५१ ख
वन पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
पदेनानुपदं दृष्ट्वा राजानं परिवार्यातिष्ठत् ||
१९ क
वन पर्व
अध्याय
१४२
युधिष्ठिर उवाच
पद्भिरेव गमिष्यामस्तप्यमाना महत्तपः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
१४१
भीम उवाच
पद्भिरेव गमिष्यामो मा राजन्विमना भव ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१४१
वैशम्पाय़न उवाच
पद्भिरेव महावीर्या यय़ुः कौरवनन्दनाः ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय
१९९
मार्कण्डेय़ उवाच
पद्भ्यां घ्नन्ति नरा विप्र तत्र किं प्रतिभाति ते ||
२५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५४
उत्तङ्क उवाच
पद्भ्यां ते पृथिवी व्याप्ता शिरसा चावृतं नभः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
पद्भ्यां शक्तोऽन्तरिक्षेण क्रान्तुं भूमिं ससागराम् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२००
भीष्म उवाच
पद्भ्यां शूद्रशतं चैव केशवो भरतर्षभ ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
पद्भ्यामनुचिता गन्तुं द्रौपदी समुपाविशत् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
पद्भ्याममर्षाद्द्युतिमानगच्छत्पाण्डवैः सह ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
पद्भ्यामापततस्तस्य शरवृष्टिमवासृजत् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
पद्भ्यामुत्क्रममाणस्य वैष्णवं स्थानमुच्यते ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
काक उवाच
पद्भ्यामुत्क्षिप्य वेपन्तं पृष्ठमारोपय़च्छनैः ||
५२ ख
वन पर्व
अध्याय
२७९
मार्कण्डेय़ उवाच
पद्भ्यामेव द्विजैः सार्धं राजर्षिं तमुपागमत् ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
अर्जुन उवाच
पद्भ्यामेव प्रय़ातोऽसि प्राङ्मुखो रिपुवाहिनीम् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५९
द्युमत्सेन उवाच
पद्मं श्मशानादादत्ते पिशाचाच्चापि दैवतम् |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
पद्मकर्णिकमध्यस्थः सूचीपाशे जय़द्रथः |
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
पद्मकिञ्जल्कवर्णाभा दण्डधारमुदावहन् ||
४६ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
पद्मकोशप्रकाशेन मृदुना मृदुभाषिणी ||
१०९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
पद्मगर्भ विशालाक्ष जय़ लोकेश्वरेश्वर |
४४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
पद्मगर्भो महागर्भश्चन्द्रवक्त्रो मनोरमः ||
१०३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
पद्मगर्भो महागर्भो व्रह्मगर्भो जलोद्भवः |
१३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
पद्मतन्तुवदाविश्य प्रवहन्विषय़ान्नृप ||
७० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
पद्मनाभ विशालाक्ष कृष्ण दुःस्वप्ननाशन ||
६० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४९
व्राह्मण उवाच
पद्मनाभं द्विजश्रेष्ठं तत्र मे कार्यमाहितम् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
पद्मनाभं न जानाति तमाहुस्तामसं जनाः ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
पद्मनाभः सुरारिघ्नः पृथुचार्वञ्चितेक्षणः ||
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४३
अतिथिरु उवाच
पद्मनाभो महाभागः पद्म इत्येव विश्रुतः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
भीष्म उवाच
पद्मनाभो महाय़ोगी भूताचार्यः स भूतराट् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०२
पितामह उवाच
पद्मनाभो महाय़ोगी भूतात्मा भूतभावनः ||
३१ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
पद्मनाभोऽरविन्दाक्षः पद्मगर्भः शरीरभृत् |
५१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४१
भीष्म उवाच
पद्मपत्रविशालाक्षीं सम्पूर्णेन्दुनिभाननाम् ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
पद्मपत्रसुगन्धाश्च जाय़न्ते तत्र मानवाः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१४
वैशम्पाय़न उवाच
पद्मपत्राननः पिङ्गस्तेजसा प्रज्वलन्निव ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
पद्मप्रभाः पद्मवर्णाः पद्मपत्रनिभेक्षणाः |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
पद्मप्रभो वह्निरिवाल्पधूमो; मेघान्तरे सूर्य इव प्रकाशः ||
९९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
पद्मवर्णनिभं चैव विमानमधिरोहति ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
पद्मवर्णस्त्वनीकानां सर्वेषामग्रतः स्थितः ||
२० ग
वन पर्व
अध्याय
८२
पुलस्त्य उवाच
पद्मवर्णेन यानेन व्रह्मलोकं प्रपद्यते ||
५२ ख