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भीष्म पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य तु कौरव्य दैर्घ्यं ह्रस्वत्वमेव च |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५१
युधिष्ठिर उवाच
परिवार्य तु तैः सर्वैर्युधि वालो महारथैः |
११ क
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
परिवार्य प्ररुदिता मागध्यः पश्य योषितः ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य भृशं सर्वे ग्रहीतुमुपचक्रमुः ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य महामात्रैः षड्भिः परमकै रथैः |
६३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य महावाहुं निहन्तुमुपचक्रमुः ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय २१५
मार्कण्डेय़ उवाच
परिवार्य महासेनं रक्षमाणः स्थितः स्थिरम् ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय २१६
मार्कण्डेय़ उवाच
परिवार्य महासेनं स्थिता मातृगणैः सह ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
परिवार्य यय़ुः सर्वे वासुदेवधनञ्जय़ौ ||
६२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य रणे कर्णं नानाशस्त्रैरवाकिरन् |
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य रणे द्रोणं वसवो वासवं यथा ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य रणे भीमं निजघ्नुस्ते समन्ततः ||
४२ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य रणे भीष्मं दंशिताः समवस्थिताः ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य रणे भीष्मं भीमसेनमुपाद्रवत् ||
६० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य रणे भीष्मं युय़ुधुः पाण्डवैः सह ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य रणे भीष्मं स्थिता युद्धाय़ मारिष ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य रणे योधान्ययतुः शिविरं प्रति ||
५० ख
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य रणे वीराः सिंहनादं प्रचक्रिरे |
५५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
परिवार्य रथं शौरेरगच्छन्त परन्तपाः ||
२१ ख
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य रथैः शल्यं पीडय़ामासुराहवे ||
१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य रथैर्वीरं विव्यधुः साय़कैर्भृशम् ||
६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २२
गान्धार्यु उवाच
परिवार्य रुदन्त्येताः स्त्रिय़श्चन्द्रोपमाननाः ||
१८ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
परिवार्य व्यतिष्ठन्त पाण्डवाः सहकेशवाः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय २२१
मार्कण्डेय़ उवाच
परिवार्य शनैर्याति यादोभिर्विविधैर्वृतः ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय २८२
मार्कण्डेय़ उवाच
परिवार्य समाश्वास्य समानीतौ स्वमाश्रमम् ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य सुसंरव्धाः पुनर्युद्धमरोचय़न् ||
५६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५
द्रौणिरु उवाच
परिवार्य स्थिताः शल्यं जय़शव्दांश्च चक्रिरे |
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य स्थिताः सङ्ख्ये समन्तात्सुमहौजसः ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य स्थितो भीष्मं सैन्येन महता वृतः ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
परिवार्य हय़ं जग्मुस्ततश्चुक्रोध पाण्डवः ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
परिवार्य हय़ं राजन्ग्रहीतुं सम्प्रचक्रमुः ||
३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २४
गान्धार्यु उवाच
परिवार्यानुशोचन्ति भर्तारमसितेक्षणाः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय २६
सूत उवाच
परिवार्यामृतं तस्थुर्वज्री चेन्द्रः शतक्रतुः ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
परिवार्यार्जुनं सङ्ख्ये तव पुत्रैः सहानघ |
५० क
उद्योग पर्व
अध्याय १८४
भीष्म उवाच
परिवार्याव्रुवन्वाक्यं तन्निवोध कुरूद्वह ||
८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १९
गान्धार्यु उवाच
परिवार्यासते गृध्राः परिविंशा विविंशतिम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
परिवार्यासते सीतां दिवारात्रमतन्द्रिताः ||
४५ ख
विराट पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
परिवार्योत्तरां तास्तु राजपुत्रीमलङ्कृताम् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
परिवार्योपतिष्ठन्त यथा देवाः शतक्रतुम् ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
परिवार्योपविविशुर्धर्मराजं युधिष्ठिरम् ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १००
नारद उवाच
परिवासः सुखस्तादृग्रसातलतले यथा ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
परिवित्तिः परिवेत्ता यय़ा च परिविद्यते |
६३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५
व्यास उवाच
परिवित्तिः परिवेत्ता व्रह्मोज्झो यश्च कुत्सकः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३७
व्यास उवाच
परिवित्तिनपुंषां च वन्दिद्यूतविदां तथा ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
परिवित्तिश्च यश्च स्याद्दुश्चर्मा गुरुतल्पगः |
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
परिवृत्तं किरीटं तं यमय़न्नेव फल्गुनः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
परिवृत्तं निवृत्तं च खड्गं चर्म च धारय़न् |
१४८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
परिवृत्तं महाराज परित्यज्य घटोत्कचम् ||
१७ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
परिवृत्तश्च वीभत्सुरगच्छद्विसृजञ्शरान् ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
परिवृत्तेऽहनि क्रूरं वृत्रवासवय़ोरिव ||
३४ ख