शल्य पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
ऊने द्विय़ोजने गत्वा प्रत्यतिष्ठन्त कौरवाः ||
४८ ख
वन पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
ऊरुं गजकराकारं करेणाभिजघान सः ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०३
वैशम्पाय़न उवाच
ऊरुं गजकराकारं ताडय़न्निदमव्रवीत् ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
१३०
लोमश उवाच
ऊरुं राज्ञः समासाद्य कपोतः श्येनजाद्भय़ात् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
ऊरुग्राहगृहीता हि पाञ्चालानां महारथाः ||
४९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
ऊरुग्राहगृहीतानां गदां विभ्रद्वृकोदरः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
ऊरुग्राहगृहीताश्च नाभ्यधावन्त पाण्डवान् ||
१०४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
ऊरुग्राहां मज्जपङ्कां शीर्षोपलसमाकुलाम् ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८५
पराशर उवाच
ऊरुजा धनिनो राजन्पादजाः परिचारकाः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
ऊरुणा धारय़ामास कश्यपः पृथिवीं ततः |
६४ क
आदि पर्व
अध्याय
१६९
वसिष्ठ उवाच
ऊरुणैकेन वामोरूर्भर्तुः कुलविवृद्धय़े |
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
ऊरुभिः पृथिवी छन्ना मनुजानां नरोत्तम ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
ऊरुभिश्च नरेन्द्राणां विनिकृत्तैर्महाहवे |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
ऊरुभिश्च नरेन्द्राणां समास्तीर्यत मेदिनी ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
ऊरुभ्यां प्राहिणोद्राजन्गदां वेगेन पाण्डवः ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
ऊरुभ्यामर्धमाग्नेय़ं सोमार्धं च शिवा तनुः |
९५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
ऊरुभ्यामसृजद्वैश्याञ्शूद्रान्पद्भ्यामिति श्रुतिः |
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
ऊरुवातविनिर्भग्नान्द्रुमान्व्यावर्जितान्पथि ||
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
ऊरुवेगेन चाप्यन्यान्पातय़ामास भूतले |
५९ क
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
ऊरुवेगेन तस्याथ न्यग्रोधाश्वत्थकिंशुकाः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
ऊरुवेगेन सङ्कर्षन्रथजालानि पाण्डवः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
ऊरुस्तम्भः समभवद्वेपथुः स्वेद एव च ||
४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
ऊरुस्तम्भगृहीताश्च कश्मलाभिहतौजसः |
७६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
ऊरुस्तम्भगृहीतोऽसि तस्मात्प्रशममिच्छसि ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
सञ्जय़ उवाच
ऊरू चिच्छेद चान्यस्य गजस्थस्य विशां पते |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१९२
मार्कण्डेय़ उवाच
ऊरू ते पर्वता देव खं नाभिर्मधुसूदन |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
ऊरू दुर्योधनस्याथ वभञ्ज प्रिय़दर्शनौ ||
४४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४०
भीम उवाच
ऊरू परिघसङ्काशौ संहतं चाप्युरो मम ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
ऊरू भिन्धीति भीमस्य स्मृतिं मिथ्या प्रय़च्छता |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
ऊरू भेत्स्यति ते भीमो गदय़ेति परन्तप |
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
ऊरू भेत्स्यामि ते पाप गदय़ा वज्रकल्पय़ा |
२९ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
ऊरू भेत्स्यामि ते सङ्ख्ये गदय़ेति सुय़ोधनम् ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
ऊर्जस्करं तव सैन्यस्य नित्य; ममित्रवित्रासनमीड्यरूपम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
२११
मार्कण्डेय़ उवाच
ऊर्जस्करान्हव्यवाहान्सुवर्णसदृशप्रभान् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८७
भीष्म उवाच
ऊर्जस्विनरनागाश्वं चत्वरापणशोभितम् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
ऊर्जस्विन्य ऊर्जमेधाश्च यज्ञो; गर्भोऽमृतस्य जगतश्च प्रतिष्ठा |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
सिद्ध उवाच
ऊर्जावतीं मधुमतीं महापुण्यां त्रिवर्त्मगाम् |
८३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
व्रह्मो उवाच
ऊर्जितौ स्वेन तपसा महासत्त्वपराक्रमौ ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०८
वैशम्पाय़न उवाच
ऊर्णनाभः सुनाभश्च तथा नन्दोपनन्दकौ ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४१
व्यास उवाच
ऊर्णनाभिर्यथा सूत्रं सृजते तन्तुवद्गुणान् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
ऊर्णनाभिर्यथा स्रष्टा विज्ञेय़ास्तन्तुवद्गुणाः ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२८
व्यास उवाच
ऊर्णारूपसवर्णं च तस्य रूपं प्रकाशते ||
१९ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
३६
श्रीभगवानु उवाच
ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः |
१८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३९
व्रह्मो उवाच
ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७५
भृगुरु उवाच
ऊर्ध्वं गतेरधस्तात्तु चन्द्रादित्यौ न दृश्यतः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
२२३
जरितारिरु उवाच
ऊर्ध्वं चाधश्च गच्छन्ति विसर्पन्ति च पार्श्वतः |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२७
व्राह्मण उवाच
ऊर्ध्वं चावाक्च तिर्यक्च तस्य नान्तोऽधिगम्यते ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
ऊर्ध्वं चित्राभिसङ्काशे नैको वसति पूजितः ||
१२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
ऊर्ध्वं चैव त्रय़ी विद्या सा भूतान्भावय़त्युत ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१७
सिद्ध उवाच
ऊर्ध्वं तु जन्तवो गत्वा येषु स्थानेष्ववस्थिताः |
३५ क