कर्ण पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
पर्यवस्थापय़ात्मानं मा विषादे मनः कृथाः ||
२८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
पर्यवार्यत सङ्क्रुद्धैः स द्रोणादिभिराहवे ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
पर्यवारय़दासाद्य द्रोणं सेनापतिः स्वय़म् ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
पर्यवारय़दाय़ान्तं यशो द्रोणस्य वर्धय़न् ||
५१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
पर्यवारय़दाय़ान्तं युवानं समरे युवा ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
पर्यवारय़दाय़ान्तं शूरं समितिशोभनम् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
पर्यवारय़दाय़ान्तौ कृतवर्मा रथेषुभिः ||
२८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
पर्यवेषन्द्विजाग्र्यांस्ताञ्शतशोऽथ सहस्रशः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
पर्यशङ्कत तामीर्षुः सुग्रीवगतमानसाम् ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
पर्यश्नन्ति च ये दारानग्निभृत्यातिथींस्तथा |
६९ क
आदि पर्व
अध्याय
११८
वैशम्पाय़न उवाच
पर्यषिञ्चज्जलेनाशु शातकुम्भमय़ैर्घटैः ||
१८ ग
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
पर्यष्वजत दाशार्हः पुनः पुनररिन्दमम् ||
१० ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
पर्यष्वजत्ततो द्रौणिस्ताभ्यां च प्रतिनन्दितः |
१४९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२४
सञ्जय़ उवाच
पर्यष्वजत्तदा कृष्णावानन्दाश्रुपरिप्लुतः ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
४८
दुर्योधन उवाच
पर्यस्त इव लोकोऽय़ं युधिष्ठिरनिवेशने ||
३३ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
९१
भगवानु उवाच
पर्यस्तां पृथिवीं सर्वां साश्वां सरथकुञ्जराम् |
५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
पर्यस्तानीव शृङ्गाणि ससत्त्वानि महागिरेः ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
पर्यस्तेय़ं पृथिवी कालपक्वा; दुर्योधनार्थे पाण्डवान्योद्धुकामाः |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
पर्याक्रामत सैन्यानि यत्तास्तिष्ठत दंशिताः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
पर्याक्रामन्त देशांश्च नदीः शैलान्वनानि च ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
पर्यागतं मम कृष्णस्य चैव; यो मन्यते कलहं सम्प्रय़ुज्य |
८३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३५०
नाग उवाच
पर्यादत्ते पुनः काले किमाश्चर्यमतः परम् ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
पर्याददानं चास्त्राणि भीमधन्वानमर्जुनम् ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
पर्यानय़त भद्रं वः सा स्यात्परमदक्षिणा ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
पर्यानय़ेत्सभामध्यमृते दुर्द्यूतदेविनम् |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५४
वैशम्पाय़न उवाच
पर्याप्त एष एवाद्य वरस्त्वत्तो महाद्युते |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७४
भीष्म उवाच
पर्याप्तं ते मनः पुत्रि यदेवं परिशुष्यसि ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
पर्याप्तं त्विदमेतेषां वलं पार्थिवसत्तमाः ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
पर्याप्तं त्विदमेतेषां वलं भीमाभिरक्षितम् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
४६
धृतराष्ट्र उवाच
पर्याप्तं वैरमेतावद्यत्कृष्णा सा सभां गता ||
३२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८३
वैशम्पाय़न उवाच
पर्याप्तः क्षत्रधर्मोऽय़ं दर्शितः पुत्र गम्यताम् |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
६०
वृहदश्व उवाच
पर्याप्तः परिहासोऽय़मेतावान्पुरुषर्षभ |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
पर्याप्तः स दृढीकारः पितुर्गौरवनिश्चय़े ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
पर्याप्तमेतद्भद्रं ते तव कार्मुकधारणम् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
पर्याप्तवचनान्वीरान्प्रतिपत्तिविशारदान् |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय
४९
दुर्योधन उवाच
पर्याप्तविद्या वक्तारो वेदान्तावभृथाप्लुताः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
पर्याप्तश्च भवान्क्षिप्रं पीडितानां गतिर्भव ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
पर्याप्ता हि वय़ं तेन सह योधय़ितुं परान् ||
५९ ख
वन पर्व
अध्याय
१९२
उत्तङ्क उवाच
पर्याप्तो मे वरो ह्येष यदहं दृष्टवान्हरिम् |
२१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
अहल्यो उवाच
पर्याप्तय़े तद्भद्रं ते गच्छ तात यथेच्छकम् ||
२७ ख
विराट पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
पर्याववर्ताथ रथेन वीरो; भोगी यथा पादतलाभिमृष्टः ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
पर्यावव्रुः प्रवराः सर्वशश्च; दुर्योधनस्यानुमते समन्तात् ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
पर्याश्वासय़तश्चैवं तावुभावेव भूमिपम् ||
४२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
पर्याश्वासय़दप्येनां धर्मराजो युधिष्ठिरः |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
पर्यासुः पाण्डुपाञ्चाला नदन्तो निशिताय़ुधाः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७५
भगवानु उवाच
पर्याय़ं न व्यवस्यन्ति दैवमानुषय़ोर्जनाः ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७२
भीमसेन उवाच
पर्याय़काले धर्मस्य प्राप्ते वलिरजाय़त ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
पर्याय़योगाद्विहितं विधात्रा; कालेन सर्वं लभते मनुष्यः ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४०
व्रह्मो उवाच
पर्याय़वाचकैः शव्दैर्महानात्मा विभाव्यते |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
पर्याय़वाचकैः शव्दैर्महानात्मा विभाव्यसे ||
३९ ख