शान्ति पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
पर्याय़शः सर्वमिह स्पृशन्ति; तस्माद्धीरो नैव हृष्येन्न कुप्येत् ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
पर्याय़शः सर्वमिह स्पृशन्ति; तस्माद्धीरो नैव हृष्येन्न शोचेत् ||
४५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०२
भीष्म उवाच
पर्याय़श्चाप्यगस्त्यस्य समपद्यत भारत ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
पर्याय़स्याद्य सम्प्राप्तं फलं पश्य सुदारुणम् |
४७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
पर्याय़ात्सिद्धिरेतस्य नैतत्सिध्यति कत्थनात् ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२८
भीष्म उवाच
पर्याय़े तात कस्मिंश्चिद्व्राह्मणो नाम जाय़ते ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३०
शक्र उवाच
पर्याय़े तात कस्मिंश्चिद्व्राह्मण्यमिह विन्दति ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३९
व्रह्मो उवाच
पर्याय़ेण च वर्तन्ते तत्र तत्र तथा तथा ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३७
भीष्म उवाच
पर्याय़ेण विशुद्धेन सुनिर्णिक्तेन कर्मणा |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५२
द्रोण उवाच
पर्याय़ेण वय़ं सर्वे कालेन वलिना हताः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
पर्याय़ेण हि भुज्यन्ते लोकाः शक्र यदृच्छय़ा ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
पर्याय़ेणासि शक्रत्वं प्राप्तः शक्र न कर्मणा ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
२४७
व्यास उवाच
पर्याय़ेणोपवर्तन्ते नरं नेमिमरा इव ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
पर्याय़ैर्हन्यमानानां परित्राता न विद्यते |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१९
नमुचिरु उवाच
पर्याय़ैर्हन्यमानानामभिय़ोक्ता न विद्यते |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
पर्युपासत तं देवं रूपिणी कुरुनन्दन ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
पर्युपासत तं हृष्टश्च्यवनाराधने रतः ||
३५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१२
धृतराष्ट्र उवाच
पर्युपासनकाले तु विपरीतं विधीय़ते |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
पर्युपासन्त कौरव्य कदाचिद्वै पितामहम् ||
८ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
पर्युपासन्त शोकार्तास्ततः शारद्वतीसुतम् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
पर्युपासन्यथान्याय़ं परिवार्य युधिष्ठिरम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
२४७
देवदूत उवाच
पर्युह्यन्ते विमानैश्च व्रह्मन्नेवंविधाश्च ते ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४०
भीष्म उवाच
पर्येति क्रमशो लोकान्वाय़ुरव्याहतो यथा ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
पर्व चाश्रमवासाख्यं पुत्रदर्शनमेव च |
६७ क
वन पर्व
अध्याय
२१३
मार्कण्डेय़ उवाच
पर्व चैव चतुर्विंशं तदा सूर्यमुपस्थितम् |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
पर्व दिग्विजय़ादूर्ध्वं राजसूय़िकमुच्यते ||
४० ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
पर्व सानत्सुजातं च गुह्यमध्यात्मदर्शनम् |
५१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
पर्वकारश्च सूची च मित्रध्रुक्पारदारिकः ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
पर्वकारश्च सूची च मित्रध्रुक्पारदारिकः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
व्रह्मो उवाच
पर्वकाले तु सम्प्राप्ते यो वै छेदनभेदनम् |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
पर्वकालेषु सर्वेषु व्रह्मचारी सदा भवेत् ||
८१ ख
वन पर्व
अध्याय
२६९
मार्कण्डेय़ उवाच
पर्वणः पूतनो जम्भः खरः क्रोधवशो हरिः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
पर्वणीव सुसङ्क्रुद्धो राहुरुग्रो निशाकरम् ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
पर्वण्यत्र परिज्ञेय़मध्याय़ानां शतत्रय़म् |
१९९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
पर्वण्यस्मिन्समाख्याताः सङ्ख्यया परमर्षिणा ||
१३५ ग
आदि पर्व
अध्याय
२१८
वैशम्पाय़न उवाच
पर्वतं चापि जग्राह क्रुद्धस्त्वष्टा महावलः |
३३ क
विराट पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
पर्वतं योऽभिविध्येत राजपुत्रो महेषुभिः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
पर्वतं वारिधाराभिः प्रावृषीव वलाहकः ||
४० ग
भीष्म पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
पर्वतं वारिधाराभिः प्रावृषीव वलाहकः ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
पर्वतं वारिधाराभिः प्रावृषीव वलाहकः ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
पर्वतं वारिधाराभिः प्रावृषीव वलाहकाः ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
पर्वतं वारिधाराभिः शरदीव वलाहकः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
पर्वतं वारिधाराभिः शरदीव वलाहकाः ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
पर्वतं वारिधाराभिः सविद्युत इवाम्वुदाः ||
२८ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
पर्वतं वारिधाराभिश्छादय़न्निव तोय़दः |
३१ क
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
पर्वतं वारिधाराभिश्छादय़न्निव तोय़दः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
पर्वतं विविशुः श्वेतं चतुर्थेऽहनि पाण्डवाः ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
पर्वतः पश्चिमः कृष्णो नाराय़णनिभो नृप ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०
वासुदेव उवाच
पर्वतः पृथिवीं कृत्स्नां विचचार महामुनिः |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
८८
धौम्य उवाच
पर्वतश्च पुरुर्नाम यत्र जातः पुरूरवाः ||
१९ ख