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कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
पश्यतस्तव पुत्रस्य तस्य वीरस्य भारत ||
१२८ ग
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
पश्यतां कुरुमुख्यानां तस्य द्रक्ष्यति यत्फलम् ||
८२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७१
भगवानु उवाच
पश्यतां कुरुमुख्यानां सर्वेषामेव तत्त्वतः ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३५
कुन्त्यु उवाच
पश्यतां कुरुवीराणां तच्च संस्मारय़ेः पुनः ||
२१ ग
कर्ण पर्व
अध्याय २८
काक उवाच
पश्यतां कुरुवीराणां प्रथमं त्वं पलाय़थाः ||
५८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां कुरुवीराणां सर्वेषां तत्र भारत ||
६३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९६
जनमेजय़ उवाच
पश्यतां चापि नस्तत्र नकुलोऽन्तर्हितस्तदा ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३७
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां तत्र वीराणामहन्यत महद्वलम् |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां ते महाराज पुत्राणां चित्रय़ोधिनाम् |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४६
युधिष्ठिर उवाच
पश्यतां द्रौपदेय़ानां पाञ्चालानां च सर्वशः ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
पश्यतां धार्तराष्ट्राणां फल्गुनेन निपातितः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां धार्तराष्ट्राणां यदि नेच्छति फल्गुनः ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां धार्तराष्ट्राणां हनिष्यति जय़द्रथम् ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां धार्तराष्ट्राणामश्वत्थामानमार्जुनिः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां धार्तराष्ट्राणामेकेनैव किरीटिना |
६० क
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां नो महावाहो सेनां द्रावय़ते वली ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
पश्यतां पाण्डुपुत्राणां त्वय़ि जीवति केशव ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
पश्यतां पाण्डुपुत्राणां नाशय़ामास वीर्यवान् ||
१९ ग
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां पाण्डुपुत्राणां सिंहनादं ननाद च |
२४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ५
अश्वत्थामो उवाच
पश्यतां भूमिपालानामधर्मेण निपातितः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां वान्धवानां त्वां नय़ामि यमसादनम् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां शतशो ह्यासीदन्योन्यसमचेतसाम् |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सर्वभूतानां तदद्भुतमिवाभवत् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सर्ववीराणां मा गास्तिष्ठेति चाव्रवीत् ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२३
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सर्वसैन्यानां केशवस्य ममैव च |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सर्वसैन्यानां तदद्भुतमिवाभवत् ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६६
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सर्वसैन्यानां तन्मे मर्माणि कृन्तति ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५३
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सर्वसैन्यानां तव चैव महाद्युते ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सर्वसैन्यानां मध्येन भ्रातृभिः सह ||
४५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सर्वसैन्यानां रथमारोपय़त्स्वकम् ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सर्वसैन्यानां वलिवासवय़ोरिव ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सर्वसैन्यानां वीरावाश्वसतां पुनः ||
३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सर्वसैन्यानामपोवाह यशस्विनम् ||
१०९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
पश्यतां सुहृदां मध्ये कर्णपुत्रमपातय़त् ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६३
भीष्म उवाच
पश्यतामथ यक्षाणां कुण्डधारो महाद्युतिः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८८
भीष्म उवाच
पश्यतामेव विप्राणां तत्रैवान्तरधीय़त ||
१५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
पश्यतामेव सर्वेषां तत्रैवादर्शनं यय़ुः ||
१२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
वसिष्ठ उवाच
पश्यते चापरं पश्यं तदा पश्यन्न सञ्ज्वरेत् ||
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
श्वशुर उवाच
पश्यतेदं सुविपुलं तपसा तस्य धीमतः ||
८५ ग
विराट पर्व
अध्याय २०
द्रौपद्यु उवाच
पश्यतो धर्मराजस्य कीचको मां पदावधीत् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३२
सञ्जय़ उवाच
पश्यतो भीमसेनस्य पार्थस्य च महात्मनः ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३६
सञ्जय़ उवाच
पश्यतो भीमसेनस्य पार्थस्य च महात्मनः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
पश्यतो भीमसेनस्य पार्षतस्य च पश्यतः ||
६८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४७
सञ्जय़ उवाच
पश्यतो भीमसेनस्य विजय़स्याच्युतस्य च |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
पश्यतो मम दुर्वुद्धिर्यिय़ासुर्यमसादनम् ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
पश्यतो युधि भीष्मस्य शपे सत्येन ते नृप ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
पश्यतो वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः ||
३३ ख
मौसल पर्व
अध्याय २
जनमेजय़ उवाच
पश्यतो वासुदेवस्य भोजाश्चैव महारथाः ||
१ ख
मौसल पर्व
अध्याय ९
अर्जुन उवाच
पश्यतो वृष्णिदाराश्च मम व्रह्मन्सहस्रशः |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
पश्यतोर्यमय़ोः पार्थ सात्यकेश्च शिखण्डिनः ||
२३ ख