वन पर्व
अध्याय
१८५
मार्कण्डेय़ उवाच
पुत्रवच्चाकरोत्तस्मिन्मनुर्भावं विशेषतः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
पुत्रवच्चापि भृत्यान्स्वान्प्रजाश्च परिपालय़ |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६४
इन्द्र उवाच
पुत्रवत्परिपाल्यानि लिङ्गधर्मेण पार्थिवैः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
पुत्रवत्परिपाल्याश्च पुत्रास्ते धर्मतः स्मृताः ||
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
पुत्रवत्परिपाल्यास्ते नमस्तेभ्यस्तथाभय़म् ||
२३ ख
विराट पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रवत्पालय़ामास प्रजा धर्मेण चाभिभो ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८९
भीष्म उवाच
पुत्रवत्पुत्रकार्याणि सर्वाणि समकारय़त् ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४५
युधिष्ठिर उवाच
पुत्रवद्धि पितुस्तस्य कन्या भवितुमर्हति ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६४
गन्धर्व उवाच
पुत्रव्यसनसन्तप्तः शक्तिमानपि यः प्रभुः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
पुत्रव्यसनसन्तप्तो निराशो जीवितेऽभवत् ||
१०८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२३
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्रशेषं चिकीर्षेय़ं कृच्छ्रं न मरणं भवेत् ||
१३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
८
व्यास उवाच
पुत्रशोकं महाराज धैर्येणोद्वहते भृशम् ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१३८
लोमश उवाच
पुत्रशोकमनुप्राप्य एष रैभ्यस्य कर्मणा |
१४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकसमाविष्टा गान्धारी त्विदमव्रवीत् |
३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकसमाविष्टो निःश्वसन्ह्येष भूमिपः |
५ क
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकसमुत्पन्नं हुताशं ज्वलितं यथा |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
जम्वुक उवाच
पुत्रशोकाग्निदग्धानां मृतमप्यद्य वः क्षमम् ||
८७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
पुत्रशोकाभितप्ताय़ पुरा शैव्याय़ कीर्तिताः ||
१७० ख
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
पुत्रशोकाभितप्तेन देहत्यागार्थनिश्चय़ः ||
८१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
पुत्रशोकाभितप्तेन प्रतिज्ञा महती कृता ||
१० ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२२
गान्धार्यु उवाच
पुत्रशोकाभितप्तेन प्रतिज्ञां परिरक्षता |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
पुत्रशोकाभिभूतेन प्रतिज्ञातो महात्मना |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तं कृष्णद्वैपाय़नं तदा ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तं क्रुद्धं मृत्युमिवान्तकम् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तं क्रुद्धं मृत्युमिवान्तकम् |
४० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तं ज्ञातीनां च सहस्रशः |
९ क
मौसल पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तं ददर्श कुरुपुङ्गवः ||
१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तं धृतराष्ट्रं महीपतिम् ||
४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तं पुत्रं वचनमव्रवीत् ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६८
भीष्म उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तं राजानं शोकविह्वलम् |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तं वुद्धिव्याकुलितेन्द्रिय़म् ||
५४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४५
युधिष्ठिर उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तः किमाह धृतराष्ट्रजम् ||
८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तः पपात भुवि मूर्छितः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तः सात्यकिं प्रत्यपीडय़त् ||
४० ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२४
गान्धार्यु उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तः सोमदत्तो जनार्दन |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तमश्रुपूर्णमुखं तदा ||
८० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तश्चिकीर्षुः कर्म दुष्करम् |
४२ क
शल्य पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्ता गान्धारी प्ररुरोद ह ||
६४ ख
मौसल पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्ता गान्धारी हतवान्धवा |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तप्तो महद्दुःखमचिन्तय़न् |
५७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रशोकाभिसन्तापाद्धर्मादपहृतं मनः |
२८ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१३
गान्धार्यु उवाच
पुत्रशोकेन तु वलान्मनो विह्वलतीव मे ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रश्च ते महातेजा धृतराष्ट्रो जनेश्वरः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२९१
सूर्य उवाच
पुत्रश्च ते महावाहुर्भविष्यति महाय़शाः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
पुत्रश्च पितरं मोहात्प्रेषय़िष्यति कर्मसु ||
१११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
पुत्रश्च पितरं मोहात्सखाय़ं च सखा तथा |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
पुत्रश्च पितरं मोहान्निर्मर्यादमवर्तत ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रश्चाय़ं वृतो राज्ये मय़ा तस्माद्विचारितम् ||
४१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रसंस्थं च विपुलं राज्यं विप्रोषिते त्वय़ि |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
पुत्रसङ्करिणो जाल्माः सर्वान्नक्षीरभोजनाः |
४० क