सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
पतिघ्नं मे जहीत्येवं पुनः पुनररिन्दम ||
४६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
भीष्म उवाच
पतिचित्ता पतिहिता सा पतिव्रतभागिनी ||
४९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
पतिजग्राह गाङ्गेय़ः शतशोऽथ सहस्रशः ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
पतितं कौरवेन्द्रं तमुपगम्येदमव्रवीत् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
पतितं चैनमाज्ञाय़ समन्ताद्भरतस्त्रिय़ः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१६२
गन्धर्व उवाच
पतितं पातनं सङ्ख्ये शात्रवाणां महीतले ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
पतितं प्रेक्ष्य यन्तारं शल्यः सर्वाय़सीं गदाम् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
पतितं याजय़ित्वा तु कृमिय़ोनौ प्रजाय़ते |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८०
भृगुरु उवाच
पतितं याति भूमित्वमय़नं तस्य हि क्षितिः ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३५
जनमेजय़ उवाच
पतितः किं च सन्त्यक्तो भ्रातृभ्यां द्विजसत्तमः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१७८
सर्प उवाच
पतितः प्रतिसम्वुद्धस्त्वां तु सम्वोधय़ाम्यहम् ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
पतितः शोच्यते राजन्निर्धनश्चापि शोच्यते |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
पतितः स्यात्स कौरव्य तथा धर्मेषु निश्चय़ः ||
५७ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
पतितश्चाव्रवीद्भीमो धर्मराजं युधिष्ठिरम् ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४९
भीष्म उवाच
पतितस्य च भार्याय़ां भर्त्रा सुसमवेतय़ा |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
पतिता परिधावन्ती पुनः काशिपतेः सुता ||
३८ ख
सभा पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
पतिता विललापेदं सभाय़ामतथोचिता ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
पतितांस्तोमरांश्चापि चित्रा हेमपरिष्कृताः |
५२ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
पतिताः पात्यमानाश्च दृश्यन्ते शल्यसाय़कैः ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
पतिताः पात्यमानाश्च दृश्यन्तेऽर्जुनताडिताः ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
पतिताः पात्यमानाश्च शतशोऽथ सहस्रशः ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
पतिताः सहसा भूमौ श्रुत्वा क्रूरं वचश्च ताः ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
पतितात्प्रतिगृह्याथ खरय़ोनौ प्रजाय़ते ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय
७०
वृहदश्व उवाच
पतितानि च यान्यत्र तत्रैकमधिकं शतम् |
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
पतितानि स्म दृश्यन्ते शिरांसि भरतर्षभ ||
७ ख
विराट पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
पतितानि स्म दृश्यन्ते शिरांसि रणमूर्धनि ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
पतितान्पात्यमानांश्च पार्षतेन महात्मना ||
४१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
पतितान्पात्यमानांश्च विभिन्नान्सव्यसाचिना ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
धृतराष्ट्र उवाच
पतितान्पात्यमानांश्च हतानेव च शंससि ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
पतितान्पोथय़ां चक्रुर्द्विपाः स्थूलनडानिव ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
पतितान्युत्तमाङ्गानि वाहवश्च विभूषिताः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
पतितान्युत्तमाङ्गानि हय़ेभ्यो हय़सादिनाम् ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
पतितान्रथनीडांश्च रथांश्चापि महात्मनाम् ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
पतिताभासय़च्चैव तं देशमशनिर्यथा ||
२७ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
पतितास्तत्र दृश्यन्ते शतशोऽथ सहस्रशः ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
सञ्जय़ उवाच
पतितास्तुरगेभ्यश्च गजेभ्यश्च महीतले |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
पतिते भरतश्रेष्ठे वभूव कुरुवाहिनी |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
पतिते शन्तनोः पुत्रे येऽकार्षुः संय़ुगं पुनः ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
पतितैः पात्यमानैश्च राजपुत्रैर्महारथैः ||
१२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
पतितैः सम्प्रय़ोगाच्च व्राह्मणैर्योनितस्तथा |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
पतितैरपविद्धैश्च सम्वभौ द्यौरिव ग्रहैः ||
२३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
पतितैरभवत्कीर्णा मेदिनी भरतर्षभ ||
१०७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
पतितैर्भाति राजेन्द्र मही शक्रध्वजैरिव ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
पतितैर्वृषभाक्षाणां वभौ भारत मेदिनी ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
पतितैर्वृषभाक्षाणां वभौ भारत मेदिनी ||
६० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
पतितैश्च पतद्भिश्च योधैरासीत्समावृतम् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४६
सञ्जय़ उवाच
पतितैश्चामरैश्चैव श्वेतच्छत्रैश्च भारत |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
पतितैस्तु कथां नेच्छेद्दर्शनं चापि वर्जय़ेत् |
९९ क
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
पतितो माधवानीकं दुष्कृती नरकं यथा |
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
पतितो यशसो दीप्ताद्घातय़ित्वा सहोदरान् ||
२७ ख