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अनुशासन पर्व
अध्याय ३३
भीष्म उवाच
परिकुप्यन्ति ते राजन्सततं द्विषतां द्विजाः ||
१७ ग
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
परिकृष्य स सेनां मे दशरात्रमनीकहा |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्रमन्तः शास्त्रज्ञा विधिवत्साधुशिक्षिताः ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्रम्य कुरुक्षेत्रं कर्णेन सह कौरवः |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय २२५
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्रम्य ततः सर्वे त्रय़ोऽपि भरतर्षभ |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४४
भीष्म उवाच
परिक्रम्य यथान्याय़ं भार्यां विन्देद्द्विजोत्तमः ||
५४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५७
अश्व उवाच
परिक्रम्याहृते दिव्ये ततस्ते मणिकुण्डले ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय २००
व्याध उवाच
परिक्रामति संसारे चक्रवद्वहुवेदनः ||
३७ ग
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
परिक्रामन्प्रपश्यामि तस्य कुक्षौ महात्मनः ||
९६ ख
आदि पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्रामन्वने वृक्षानुपैतीव रिरंसय़ा ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ५६
जनमेजय़ उवाच
परिक्लिश्यन्नपि क्रोधं धृतवान्वै द्विजोत्तम ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
परिक्लिष्टस्य दीनस्य दीर्घकालोषितस्य च |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
परिक्लिष्टा तथा कृष्णा मत्कृते मधुसूदन ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७६
अर्जुन उवाच
परिक्लिष्टा सभामध्ये तच्च तस्यापि मर्षितम् ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
परिक्लिष्टा सभामध्ये सर्वलोकस्य पश्यतः ||
१६ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्लिष्टानवद्याङ्गी पत्नी नो गुरुसंनिधौ ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
परिक्लिष्टासि यैस्तत्र यैश्चापि समुपेक्षिता |
३५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्लिष्टो हि भीमोऽय़ं हिमवृष्ट्यातपादिभिः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७७
वासुदेव उवाच
परिक्लेशं च कृष्णाय़ा हृदि कृत्वा पराक्रम ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्लेशश्च वो मन्ये ध्रुवं तत्र भविष्यति ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय ३६
सूत उवाच
परिक्षितस्तस्य राज्ञो विद्धो यन्नष्टवान्मृगः ||
१३ ग
आदि पर्व
अध्याय ३८
सूत उवाच
परिक्षिते नृपतय़े दय़ापन्नो महातपाः ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्षितोऽभवन्पुत्राः सर्वे धर्मार्थकोविदाः ||
४७ ख
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्षित्खलु वाहुदामुपय़ेमे सुय़शां नाम |
४४ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्षित्तु खलु माद्रवतीं नामोपय़ेमे |
९३ क
आदि पर्व
अध्याय ३७
सूत उवाच
परिक्षित्तु विशेषेण यथास्य प्रपितामहः |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय ४५
सूत उवाच
परिक्षिदभवत्तेन सौभद्रस्यात्मजो वली ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६९
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्षिदिति नामास्य भवत्वित्यव्रवीत्तदा ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय ३६
सूत उवाच
परिक्षिदिति विख्यातो राजा कौरववंशभृत् ||
८ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्षिद्धास्तिनपुरे शक्रप्रस्थे तु यादवः |
९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्षिद्भविता ह्येषां पुनर्वंशकरः सुतः ||
४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
परिक्षिन्नाम नृपतिर्मिषतस्ते सुदुर्मते |
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८
अश्मो उवाच
परिक्षीणः परस्वानामादानं साधु मन्यते ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७०
भीष्म उवाच
परिक्षीणः परस्वानामादानं साधु मन्यते ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
भीष्म उवाच
परिक्षीणाश्च लुव्धाश्च क्रूराः काराभितापिताः |
७४ क
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
परिक्षीणाय़ुधान्दृष्ट्वा तानहं परिवारितान् |
४६ क
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्षीणे कुले जातो भवत्वय़ं परिक्षिन्नामेति ||
९२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६९
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्षीणे कुले यस्माज्जातोऽय़मभिमन्युजः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय ४५
सूत उवाच
परिक्षीणेषु कुरुषु उत्तराय़ामजाय़त |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६६
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्षीणेषु कुरुषु परिक्षीणं गताय़ुषम् ||
२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
परिक्षीणेषु कुरुषु पुत्रस्तव जनिष्यति |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
परिखा खन्यतामत्र ममावसदने नृपाः |
५० क
आदि पर्व
अध्याय १३५
वैशम्पाय़न उवाच
परिखामुत्किरन्नाम चकार सुमहद्विलम् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
परिखाश्चापि कौरव्य कीलैः सुनिचिताः कृताः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
परिखाश्चैव कौरव्य प्रतोलीः सङ्कटानि च |
५३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५०
भीष्म उवाच
परिखेदपरित्रासाज्जालस्याकर्षणेन च |
२१ क
वन पर्व
अध्याय १४४
वैशम्पाय़न उवाच
परिगृह्य च तां दीनां कृष्णामजिनसंस्तरे |
१९ क
वन पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
परिगृह्य द्विजश्रेष्ठाञ्श्रेष्ठाः सर्वधनुष्मताम् |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
परिगृह्य महासेनां सूतपुत्रोऽपय़ाद्भय़ात् ||
७६ ख
वन पर्व
अध्याय २६८
मार्कण्डेय़ उवाच
परिगृह्य शतघ्नीश्च सचक्राः सहुडोपलाः |
३० क