भीष्म पर्व
अध्याय
२५
श्रीभगवानु उवाच
पाप्मानं प्रजहिह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम् ||
४१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३६
व्रह्मो उवाच
पापय़ोनिं समापन्नाश्चण्डाला मूकचूचुकाः |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
पारं तितीर्षतामद्य प्लवो नो भव माधव ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
पारक्यमध्रुवं सर्वं किं स्वं सुकृतदुष्कृतम् ||
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
पारक्ये भूमिदेशे तु पितॄणां निर्वपेत्तु यः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
पारगं सर्वधर्माणां वृहस्पतिसमं मतौ ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
पारगं सर्वधर्माणामार्ष्टिषेणमुपागमन् ||
९० ख
शल्य पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
पारगं सर्वविद्यानां गुणार्णवमनिन्दितम् |
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
पारणं चापि विद्यानां तीर्थानामवगाहनम् |
७९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
पारदार्यमनाय़ुष्यं नापितोच्छिष्टता तथा |
१३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
पारम्पर्यं तथा दैवं कर्म मित्रमिति प्रभो ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७३
भीष्म उवाच
पारम्पर्यागतं चेदमृषय़ः संशितव्रताः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
पारम्पर्यागते द्वारे ये केचिदनुवर्तिनः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
पारलौकिककार्येषु प्रसुप्ता भृशनास्तिकाः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
५२
सूत उवाच
पारावतः पारिय़ात्रः पाण्डरो हरिणः कृशः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०२
भीष्म उवाच
पारावतकुलिङ्गाक्षाः सर्वे शूराः प्रमाथिनः ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
पारावतमुखाश्चान्ये तथा वृषमुखाः परे ||
८० ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
पारावतमुखाश्चैव मद्गुवक्त्रास्तथैव च |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
७२
सञ्जय़ उवाच
पारावतसवर्णाश्च रक्तशोणाश्च संय़ुगे |
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
पारावतसवर्णाश्च शोणाश्च भरतर्षभ ||
१३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
पारावतसवर्णाश्व तथा नीतिर्विधीय़ताम् ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
पारावतसवर्णाश्वः स्वय़ं द्रोणमुपाद्रवत् ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
पारावतसवर्णाश्वश्चन्द्रादित्यसमद्युतिः |
५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
पारावतसवर्णाश्वा धृष्टद्युम्नमुदावहन् ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
पारावतांस्तथा क्षौद्रान्नीपांश्चापि मनोरमान् ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२९
व्यास उवाच
पारावर्यं तु भूतानां ज्ञानेनैवोपलभ्यते |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
पाराशर्यसगोत्रस्य वृद्धस्य सुमहात्मनः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
पाराशर्येण मुनिना सञ्चिन्त्य द्रोणपर्वणि ||
१६८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
पाराशर्येह वोद्धव्यं ज्ञानानां यच्च किञ्चन ||
४८ ख
आदि पर्व
अध्याय
९९
वैशम्पाय़न उवाच
पाराशर्यो महाय़ोगी स वभूव महानृषिः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
४८
सूत उवाच
पारिक्षितस्य यज्ञोऽसौ वर्ततेऽस्मज्जिघांसय़ा |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
पारिजातं च हरता जितः साक्षाच्छचीपतिः ||
४८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
पारिजातवनानीव व्यरोचन्रुधिरोक्षिताः ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
२२०
मार्कण्डेय़ उवाच
पारिजातवनैश्चैव जपाशोकवनैस्तथा ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
पारिजातान्कोविदारान्देवदारुतरूंस्तथा |
४६ क
सभा पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
पारिजातेन राजेन्द्र रैवतेन च धीमता |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
पारिप्लवमतेर्नित्यमध्रुवो मित्रसङ्ग्रहः ||
३७ ख
विराट पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
पारिवर्हं ददौ कृष्णः पाण्डवानां महात्मनाम् |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३५
व्यास उवाच
पारिवित्त्यं च पतिते नास्ति प्रव्रजिते तथा |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
पारिषेणामसिक्नीं च सरलां भारमर्दिनीम् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२७
भीष्म उवाच
पारिय़ात्रगिरिं प्राप्य गौतमस्याश्रमो महान् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
पार्थ कापुरुषाचीर्णमभिसन्धिं विवर्जय़ ||
६१ ख
वन पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
पार्थ क्षत्रिय़मुख्यस्त्वं क्षत्रधर्मे व्यवस्थितः |
२६ क
सभा पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
पार्थ नेदं त्वय़ा शक्यं पुरं जेतुं कथञ्चन |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२८
श्रीभगवानु उवाच
पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
पार्थ पार्थ महावाहो न नः कालात्ययो भवेत् ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
पार्थ पाशुपतं नाम परमास्त्रं सनातनम् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२९७
यक्ष उवाच
पार्थ मा साहसं कार्षीर्मम पूर्वपरिग्रहः |
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
पार्थ यच्छिक्षितं तेऽस्त्रं दिव्यं मानुषमेव च |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
पार्थ यत्ते कृतं कर्म विशेषवदहं ततः |
९ क