शान्ति पर्व
अध्याय
२६१
कपिल उवाच
परां गतिमभीप्सन्तो यतय़ः संय़मे रताः ||
५२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६३
धृतराष्ट्र उवाच
परां गतिमसम्प्रेक्ष्य न त्वं वेत्तुमिहार्हसि ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
परां च प्रीतिमगमदुत्स्मय़ंश्च पिनाकधृक् |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
विश्वामित्र उवाच
परां मेध्याशनादेतां भक्ष्यां मन्ये श्वजाघनीम् ||
६९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
परां युद्धे मतिं कृत्वा पुत्रस्य तव शासनात् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४२
व्यास उवाच
परां वुद्धिमवाप्येह विपाप्मा विगतज्वरः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
परां शक्तिं समास्थाय़ चक्रुः कर्माण्यभीतवत् ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
परां सिद्धिमनुप्राप्तः साक्षाद्देवगतिं गतः ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४४
धृतराष्ट्र उवाच
परां हि कामेषु सुदुर्लभां कथां; तद्व्रूहि मे वाक्यमेतत्कुमार ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
९२
युधिष्ठिर उवाच
परांश्च निर्गुणान्मन्ये न च धर्मरतानपि |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
परांश्च सिषिचे वाणैर्धाराभिरिव पर्वतान् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
परांस्तु तव सैन्यस्य हर्षः परमकोऽभवत् ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
पराक्रमं तु तं दृष्ट्वा तव सूनोर्महारथाः |
१९ क
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
पराक्रमं तु सूतानां मत्वा राजान्वमोदत |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
पराक्रमं तय़ोर्योधा ददृशुस्तं सुविस्मिताः ||
२४ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
२२
धृतराष्ट्र उवाच
पराक्रमं मे यदवेदय़न्त; तेषामर्थे सञ्जय़ केशवस्य |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६३
भीष्म उवाच
पराक्रमं यथेन्द्रस्य द्रक्ष्यन्ति कुरवो युधि ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
पराक्रमः परं शक्त्या तच्च तस्मिन्प्रतिष्ठितम् ||
६२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
पराक्रमज्ञास्तु धनञ्जय़स्य ते; हुतोऽय़मग्नाविति तं तु मेनिरे ||
५४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
पराक्रमन्तौ मित्रार्थे गतौ वैवस्वतक्षय़म् ||
४१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
पराक्रमन्तौ मित्रार्थे द्रोणेन निहतौ रणे ||
६१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
पराक्रमन्तौ मित्रार्थे द्रोणेन विनिपातितौ ||
६६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
पराक्रमन्तौ विक्रान्तौ निहतौ वीर्यवत्तरौ ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
१५९
वैश्रवण उवाच
पराक्रमविधानज्ञा नराः कृतय़ुगेऽभवन् ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
पराक्रमश्चावहुभाषिता च; दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६८
सञ्जय़ उवाच
पराक्रमस्ते कौन्तेय़ शक्रस्येव शचीपतेः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१८
श्रीरु उवाच
पराक्रमे च धर्मे च पराचीनस्ततो वलिः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
पराक्रमे शक्रसममादित्यसमतेजसम् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
पराक्रमे शक्रसमो वाय़ुवेगसमो जवे |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
२३२
युधिष्ठिर उवाच
पराक्रमेण मृदुना मोक्षय़ेथाः सुय़ोधनम् ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
पराक्रमेण वुद्ध्या च त्वय़ेय़ं निर्जिता मही ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
पराक्रमेद्यथाशक्त्या तच्च तस्मिन्प्रतिष्ठितम् ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४१
भीष्म उवाच
पराक्रमैस्तेऽपि तदा व्यत्यघ्नन्नत्रिरक्षिताः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
पराक्रान्तं पराक्रम्य यतन्तः क्षत्रिय़र्षभाः |
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
पराक्रान्तं पराक्रम्य विव्याध त्रिंशता शरैः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
पराक्रान्तस्य तस्यैव भीष्मोऽपि प्राहिणोच्छरान् |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
पराक्रान्तांस्ततो वीरान्निराशाञ्जीविते तदा |
४५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
धृतराष्ट्र उवाच
पराक्रान्तान्पाण्डुसुतान्दृष्ट्वा चापि महाहवे ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
दुर्योधन उवाच
पराक्रान्तो ह्यहं पाण्डून्सपुत्रान्योद्धुमाहवे ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
पराक्रान्तौ पराक्रम्य योधय़ामास सानुगौ ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
पराङ्मुखं तु राजानं दृष्ट्वा सैन्यानि भारत |
६९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
कृष्ण उवाच
पराङ्मुखस्य द्रवतः शरणं वाभिगच्छतः |
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
पराङ्मुखांस्तथा राज्ञः पलाय़नपराय़णान् |
८९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
पराङ्मुखाय़ दीनाय़ न्यस्तशस्त्राय़ याचते |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
पराङ्मुखीकृत्य तदा शरवर्षैर्महारथान् |
१२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
धृतराष्ट्र उवाच
पराजितं तु राधेय़ं दृष्ट्वा भीमेन संय़ुगे |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
पराजितं वनप्रेप्सुं निराशं राज्यलम्भने ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
पराजितस्य भीमेन निपपात शिरो महीम् ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
पराजिताः पञ्च महारथास्तु ते; महाहवे सूतसुतेन मारिष |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
पराजितान्पाण्डवेय़ांस्तु वाचो; रौद्ररूपा भाषते धार्तराष्ट्रः |
४४ क