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उद्योग पर्व
अध्याय १५४
जनमेजय़ उवाच
पितामहं भारतानां ध्वजं सर्वमहीक्षिताम् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
पितामहं महाप्राज्ञं विनय़ेनोपगम्य ह |
२५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहं मानय़न्तीं क्रतुं ते वहु मेनिरे ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६८
सञ्जय़ उवाच
पितामहं रणे हत्वा मन्यसे धर्ममात्मनः |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
पितामहं शान्तनवं धृतराष्ट्रं च सञ्जय़ |
४ क
विराट पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहं शान्तनवं स वृद्धं; द्रोणं गुरुं च प्रतिपूज्य मूर्ध्ना |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
पितामहः किल पुरा महेन्द्रादीन्दिवौकसः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहः पुलस्त्यश्च पुलहश्च महातपाः |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९२
अग्निरु उवाच
पितामहः पुलस्त्यश्च वसिष्ठः पुलहस्तथा |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
पितामहः प्रजासर्गे त्वय़ि विश्रान्तवान्प्रभुः ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४२
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहः शान्तनव आचार्यश्च युधां पतिः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
पितामहः शान्तनवः शमं सम्पूजय़िष्यति |
४५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
पितामहत्वं सम्प्रेक्ष्य पाण्डुपुत्रा महारणे |
२२ क
वन पर्व
अध्याय २७७
सावित्र्यु उवाच
पितामहनिसर्गेण तुष्टा ह्येतद्व्रवीमि ते ||
१८ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहनिय़ोगाद्धि यो योगाद्गामधारय़त् ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५६
च्यवन उवाच
पितामहनिय़ोगाद्वै नान्यथैतद्भविष्यति ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०२
भृगुरु उवाच
पितामहनिय़ोगेन भवन्तमहमागतः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३३
नरनाराय़णावू ऊचतुः
पितामहपिता चैव अहमेवात्र कारणम् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
पितामहपुरोगाश्च देवाः सर्षिगणा नृप |
९४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
पितामहपुरोगाश्च देवाः सिद्धाश्च तं विदुः |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७२
भीष्म उवाच
पितामहपुरोगाश्च सर्वे देवगणास्तथा |
१६ क
वन पर्व
अध्याय १०५
लोमश उवाच
पितामहमनुज्ञाप्य विप्रजग्मुर्यथागतम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
पितामहमनुज्ञाप्य सोऽश्वमेधमकल्पय़त् ||
५५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
पितामहमभिप्रेक्ष्य धर्मराजो युधिष्ठिरः |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
महेश्वर उवाच
पितामहमुखोत्सृष्टं प्रमाणमिति मे मतिः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१६
भीष्म उवाच
पितामहमुपागत्य प्रणिपत्य कृताञ्जलिः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय ३४
सूत उवाच
पितामहमुपागम्य दुःखार्तानां महाद्युते ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
पितामहमुपागम्य शिरसा प्रत्यपूजय़त् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
पितामहमुपासेदुः पर्वते गन्धमादने ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय २६०
मार्कण्डेय़ उवाच
पितामहवचः श्रुत्वा गन्धर्वी दुन्दुभी ततः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
पितामहवचः श्रुत्वा तथा चक्रुः स्म कौरवाः |
७० क
भीष्म पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
पितामहवचः श्रुत्वा त्वरमाणा महारथाः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहश्च दक्षाय़ धर्ममेतं पुरा ददौ ||
४५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहश्च द्रोणश्च कृपः शल्यः शलस्तथा |
२८ क
वन पर्व
अध्याय ३०
युधिष्ठिर उवाच
पितामहश्च नो व्यासः शमं वदति नित्यशः ||
४६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहश्च भगवान्कृष्णस्तत्र भविष्यति ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
पितामहश्च भगवान्देवैः सह महाद्युतिः |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८५
पराशर उवाच
पितामहश्च मे पूर्वमृश्यशृङ्गश्च काश्यपः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
पितामहश्च विष्णुश्च सोऽश्विनौ स पुरन्दरः ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
पितामहश्च सङ्क्रुद्धः पाञ्चालान्हन्तुमुद्यतः |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९१
भीष्म उवाच
पितामहसभां दिव्यां जगामात्रिस्तपोधनः ||
४५ ख
सभा पर्व
अध्याय १०
नारद उवाच
पितामहसभां राजन्कथय़िष्ये गतक्लमाम् ||
२३ ख
सभा पर्व
अध्याय ११
युधिष्ठिर उवाच
पितामहसभाय़ां तु कथितास्ते महर्षय़ः |
४६ क
वन पर्व
अध्याय ८४
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहसमं धौम्यं प्राह राजा युधिष्ठिरः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय ८७
धौम्य उवाच
पितामहसरः पुण्यं पुष्करं नाम भारत |
१३ क
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
पितामहसरो गत्वा शैलराजप्रतिष्ठितम् |
१२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहसुतं ज्येष्ठं कुमारं दीप्ततेजसम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय २६०
मार्कण्डेय़ उवाच
पितामहस्ततस्तेषां संनिधौ वाक्यमव्रवीत् |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
पितामहस्तव तथा वाह्लिकः सह वाह्लिकैः |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
पितामहस्तिष्ठतु ते समीपे; द्रोणश्च सर्वे च नरेन्द्रमुख्याः |
६ क