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आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
पुत्राश्च भ्रातरश्चेमे शिष्याश्च सुहृदश्च वः |
७२ क
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
पुत्राश्च मातापितरौ हनिष्यन्ति युगक्षय़े |
७८ क
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राश्च मे विनिहताः पौत्राश्चैव महावलाः |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय २१
अष्टावक्र उवाच
पुत्राश्च स्थविरीभावे न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति ||
१९ ख
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राश्चान्धकवृष्णीनां सर्वे पार्थमनुव्रताः |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय १९३
दुर्योधन उवाच
पुत्राश्चास्य प्रलोभ्यन्ताममात्याश्चैव सर्वशः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राश्चास्य महावीर्याः पञ्चासन्नमितौजसः |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय १४४
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रास्तव च माद्र्याश्च सर्व एव महारथाः |
१५ क
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रास्तव दुरात्मानो यैरिय़ं घातिता मही ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
पुत्रास्तव महाराज ददृशुः पाण्डवस्य ह ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
पुत्रास्तु तव कौन्तेय़ं छादय़ां चक्रिरे शरैः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
पुत्रास्तु तव गाङ्गेय़ं समन्तात्पर्यवारय़न् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
पुत्रास्तु तव तं दृष्ट्वा भीमसेनपराक्रमम् |
३३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
पुत्रास्तु ते महाराज जग्मुः कर्णरथं प्रति |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४६
भीष्म उवाच
पुत्रास्तु स्थविरीभावे न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति ||
१३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रास्ते भ्रातरश्चैव तान्न शोचितुमर्हसि ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
सञ्जय़ उवाच
पुत्रास्ते सर्वतो यत्ता ररक्षुर्द्रोणमाहवे ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३२
सञ्जय़ उवाच
पुत्रास्तेऽभ्यर्दय़न्भीमं दश दाशरथेः समाः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
भीष्म उवाच
पुत्राय़ाकथय़त्सर्वं तत्त्वेन भरतर्षभ ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय १६७
वसिष्ठ उवाच
पुत्रि कस्यैष साङ्गस्य वेदस्याध्ययनस्वनः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय २७७
राजो उवाच
पुत्रि प्रदानकालस्ते न च कश्चिद्वृणोति माम् |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४
भीष्म उवाच
पुत्रि मूर्ध्ना प्रपन्नाय़ाः कुरुष्व वचनं मम ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय २०७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रिका हेतुविधिना सञ्ज्ञिता भरतर्षभ ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रिकाः स्थापय़ामास नष्टपुत्रः प्रजापतिः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
पुत्रिकापूर्वपुत्राश्च श्राद्धे नार्हन्ति केतनम् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
ऋचीक उवाच
पुत्रे नास्ति विशेषो मे पौत्रे वा वरवर्णिनि |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
पुत्रे हते क्रोधपरीतचेताः; कर्णः शिनीनामृषभं जिघांसुः |
७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रेण घातय़ित्वेमं पतिं यदि न मेऽद्य वै |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
पुत्रेण च परिष्वङ्गः संनिपातश्च मैथुने ||
७९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
पुत्रेण तव राजेन्द्र स तथोक्तो महावलः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
पुत्रेण तव सा सेना पाण्डवी मथिता रणे |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रेण धृतराष्ट्रेण ध्यानमन्वगमत्परम् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय २८२
व्राह्मणा ऊचुः
पुत्रेण सङ्गतं त्वाद्य चक्षुष्मन्तं निरीक्ष्य च |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रेति परिपूर्णार्थमव्रवीद्रथसारथिः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
वसुहोम उवाच
पुत्रेभ्यः श्राद्धदेवस्तु सूक्ष्मधर्मार्थकारणात् |
३९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
पुत्रेभ्यश्च महावाहो धृतराष्ट्रो विय़ोक्ष्यते ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
पुत्रेषु च महाराज प्रणिदध्यात्समाहितः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
पुत्रेषु तव वीरेषु चिक्रीडार्जुनपूर्वजः |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्रेषु राज्यदारेषु पौत्रेष्वपि च वन्धुषु ||
५५ ख
आदि पर्व
अध्याय ७५
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रेषु वा नप्तृषु वा न चेदात्मनि पश्यति |
२ ख
वन पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रेषु सम्यक्चरितं मय़ेति; पुत्रानपापानवरोप्य राज्यात् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
पुत्रेष्वपि हि राजेन्द्र विश्वासो न प्रशस्यते ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
पुत्रेष्वाशासते नित्यं पितरो दैवतानि च ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३०
कुन्त्यु उवाच
पुत्रेष्वाशासते नित्यं पितरो दैवतानि च |
२४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्रेष्वैश्वर्यमाधाय़ वय़सोऽन्ते वनं नृप ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय १९४
मार्कण्डेय़ उवाच
पुत्रैः परिवृतः सर्वैः शूरैः परिघवाहुभिः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय ९२
स्त्र्यु उवाच
पुत्रैः पुण्यैः प्रिय़ैश्चापि स्वर्गं प्राप्स्यति ते सुतः ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १११
पाण्डुरु उवाच
पुत्रैः श्राद्धैः पितृंश्चापि आनृशंस्येन मानवान् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५८
वासुदेव उवाच
पुत्रैर्दारैश्च मोदध्वं महद्वो भय़मागतम् ||
१९ ख
सभा पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रैर्भिन्नैः कलहस्ते ध्रुवं स्या; देतच्छङ्के द्यूतकृते नरेन्द्र ||
२४ ख