भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
पीडितं विशिखैस्तीक्ष्णैस्तव पुत्रेण धन्विना ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
पीडितश्चैव पुत्रस्ते पाण्डवेन महात्मना |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२८
भीष्म उवाच
पीडितस्य किमद्वारमुत्पथो निधृतस्य वा |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
पीडितानां वलवता भार्गवास्त्रेण संय़ुगे ||
३७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
पीडितान्पाण्डवान्दृष्ट्वा मद्रराजवशं गतान् |
२८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
पीडितास्तावकाः सर्वे प्रधावन्तो रणोत्कटाः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
१४७
वैशम्पाय़न उवाच
पीडिताहं भविष्यामि तदवेक्षस्व मामपि ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
पीडिते तव पुत्रस्य सैन्ये पाण्डवसृञ्जय़ैः ||
२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
पीडिते धर्मराजे तु मद्रराजेन मारिष |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७९
भरद्वाज उवाच
पीडितेऽन्यतरे ह्येषां सङ्घातो याति पञ्चधा ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
पीडितो नातिय़त्नेन निहतः स शिखण्डिना ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०
शल्य उवाच
पीड्यन्ते च प्रजाः सर्वाः सदेवासुरमानवाः |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४५
प्रजा ऊचुः
पीड्यन्ते ते प्रजाः सर्वा व्याधिभिर्भृशदारुणैः |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
पीड्यमान उपद्रष्टुं शक्तेनात्मा कथञ्चन ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
धृतराष्ट्र उवाच
पीड्यमानं वलं पार्थैर्दृष्ट्वा भीष्मः पराक्रमी |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
पीड्यमानं स्वकं सैन्यं दृष्ट्वा पार्थेन संय़ुगे ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
पीड्यमानः परामार्तिमगमद्रथिनां वरः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
पीड्यमानः शरैर्वालस्तात साध्वभिधाव माम् |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
पीड्यमानस्ततो राजा द्रुपदो वाहिनीमुखे |
२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
पीड्यमानस्तु कर्णेन युय़ुधानो महारथः |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
पीड्यमानस्य गोविन्द विषानलसमैः शरैः ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२२२
शार्ङ्गका ऊचुः
पीड्यमाना भरस्यस्मान्का सती के वय़ं तव ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
पीड्यमाना महीपाल व्रह्माणमुपचक्रमे ||
३५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२६
युधिष्ठिर उवाच
पीड्यमानाः परैर्ये तु हीय़माना निराय़ुधाः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
पीड्यमानाः शरै राजन्द्रोणचापविनिःसृतैः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६३
सञ्जय़ उवाच
पीड्यमानाः शरैश्चाशु प्राद्रवंस्ते ततस्ततः ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
पीड्यमानाः शितैः शस्त्रैः प्रद्रवाम महारणात् ||
७५ ख
वन पर्व
अध्याय
१७२
वैशम्पाय़न उवाच
पीड्यमानाः समुत्थाय़ पाण्डवं पर्यवारय़न् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१६८
अर्जुन उवाच
पीड्यमानासु माय़ासु तासु तास्वसुरेश्वराः |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
पीड्यमानास्तु शल्येन पाण्डवा भृशविक्षताः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१६३
अर्जुन उवाच
पीड्यमानेन वलवत्प्रय़ोज्यं ते धनञ्जय़ |
५० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
पीड्यमानो वलवता पुत्रस्तव विशां पते |
३६ क
सभा पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
पीड्यमानो हि कार्त्स्न्येन जह्याज्जीवितमात्मनः ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
पीडय़न्तौ भृशं सैन्यं शक्तितोमरवृष्टिभिः |
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३७
भीष्म उवाच
पीडय़न्भृत्यवर्गं हि आत्मानमपकर्षति ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
पीडय़न्वै महात्मानं विव्याध रणमूर्धनि ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
१९८
व्याध उवाच
पीडय़ा च कलत्रस्य भृत्यानां च समाहिताः |
८५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
पीडय़ानं च तत्सैन्यं पौत्रं तव विशां पते |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
पीडय़ामास तान्सर्वान्सहस्राक्ष इवासुरान् ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
पीडय़ामास संरव्धो भीष्महेतोः पराक्रमी ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
पीडय़ामास सङ्क्रुद्धो धृष्टद्युम्नस्य मारिष ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
पीडय़ामास सङ्क्रुद्धो मद्राधिपतिमाय़सैः ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
पीडय़ित्वा तु राजानं शरैराशीविषोपमैः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
पीडय़ेच्चापि तां भूमिं प्रणश्येद्गहने पुनः ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
पीतं च रुधिरं कोपाद्भीमसेनेन संय़ुगे ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
पीतकौशेय़संवीतं हेम्नीवोपहितं मणिम् ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
पीतकौशेय़संवीतो मणिश्यामो जनार्दनः |
५७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
पीतरक्तासितसितास्ताराचन्द्रार्कमण्डिताः |
५७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
पीतरक्तासितसितैर्वासोभिश्च सुवेष्टितः |
५६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
पीतलोहितनीलश्च ज्वलत्यग्निर्हुतो द्विजैः |
३८ क