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वन पर्व
अध्याय २९३
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रं कमलगर्भाभं देवगर्भं श्रिय़ा वृतम् ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
पुत्रं च ते महेष्वासं दुर्योधनममर्षणम् |
४ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
काक उवाच
पुत्रं च वसुदेवस्य पाण्डवं च धनञ्जय़म् ||
६४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२६
वासुदेव उवाच
पुत्रं चात्मसमं वीर्ये तपसा स्रष्टुमागतः ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय २८३
मार्कण्डेय़ उवाच
पुत्रं चास्य महात्मानं यौवराज्येऽभ्यषेचय़न् ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रं चैनं समुत्साह्य घातय़ित्वा न शोचसि ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रं जनय़ सुश्रोणि देवराजसमप्रभम् |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रं जनय़ सुश्रोणि धाम क्षत्रिय़तेजसाम् |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रं ज्येष्ठं वरिष्ठं च यदुमित्यव्रवीद्वचः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रं तव प्रदास्यामि त्रिषु लोकेषु विश्रुतम् ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
पुत्रं तव महाराज चुकोप स निशाचरः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५६
च्यवन उवाच
पुत्रं तस्य महाभागमृचीकं भृगुनन्दनम् |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
पुत्रं तु निहतं दृष्ट्वा शकुनिस्तत्र भारत |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
पुत्रं तु निहतं श्रुत्वा इरावन्तं धनञ्जय़ः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
पुत्रं तु शिशुपालस्य नरसिंहस्य मारिष |
१५ क
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रं ते कारणं कृत्वा कालय़ोगेन कारितः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ५
विदुर उवाच
पुत्रं त्यजेममहितं कुलस्ये; त्येतद्राजन्न च तत्त्वं चकर्थ |
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
पुत्रं दद्यां प्रतिपदं न तु दद्यां सुवीरकम् ||
८८ ख
सभा पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
पुत्रं दामोदरोत्सङ्गे देवी संन्यदधात्स्वय़म् ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११६
नारद उवाच
पुत्रं द्विज गतं मार्गं गमिष्यामि परैरहम् ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
पुत्रं परीप्सन्विव्याध क्रूरं क्रूरैर्जिघांसय़ा ||
५५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
पुत्रं पाञ्चालराजस्य पापं पापेन कर्मणा ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्रं पुरुषसिंहस्य सञ्जय़ाप्राप्तय़ौवनम् |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
पुत्रं प्रस्थापय़ामास प्रतर्दनमरिन्दमम् ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय ९४
लोमश उवाच
पुत्रं मे भगवानेकमिन्द्रतुल्यं प्रय़च्छतु ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रं रथस्थं भूमिष्ठः संन्यवारय़दाहवे ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय २६१
मार्कण्डेय़ उवाच
पुत्रं राजा दशरथः कौसल्यानन्दवर्धनम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१
नारद उवाच
पुत्रं रुधिरसंसिक्तं पर्यदेवय़दातुरः ||
३७ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रं रुधिरसंसिक्तमुपजिघ्रत्यनिन्दिता |
२६ क
वन पर्व
अध्याय २१०
मार्कण्डेय़ उवाच
पुत्रं लभेम धर्मिष्ठं यशसा व्रह्मणा समम् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
पुत्रं लभेय़मजितं त्रिलोकेश्वरमित्युत ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
पुत्रं विराटराजस्य सत्वराः समुदावहन् ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रं शक्रात्मजो वाक्यमिदमाह महीपते ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १
युधिष्ठिर उवाच
पुत्रं सर्वगुणोपेतमवकीर्णं जले पुरा ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
पुत्रं हि मातापितरु त्यजतः पतितं प्रिय़म् |
१४० क
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
पुत्रः काम्वोजराजस्य पार्थेन विनिपातितः ||
७० ग
आदि पर्व
अध्याय १२०
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रः किल महाराज जातः सह शरैर्विभो ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
पुत्रः पाञ्चालराजस्य जिघांसुः कुञ्जरान्ययौ ||
३५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
पुत्रः पाञ्चालराजस्य धृष्टद्युम्नो महारथः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
पुत्रः पाञ्चालराजस्य महात्मा भीमविक्रमः ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय १८८
मार्कण्डेय़ उवाच
पुत्रः पितृवधं कृत्वा पिता पुत्रवधं तथा |
२८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रः पित्रा च मात्रा च भार्या च पतिना सह |
३ क
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रः पुत्रवतां श्रेष्ठः किं नु वक्ष्यामि ते वचः ||
६९ ख
विराट पर्व
अध्याय २
युधिष्ठिर उवाच
पुत्रः प्रिय़ाणामधिको भार्या च सुहृदां वरा ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
पुत्रः सांय़मनेः पुत्रं पाञ्चाल्यस्य महात्मनः ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
पुत्रः सांय़मनेश्चैव सौभद्रं समय़ोधय़न् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
पुत्रकर्म कृतं चैव कन्याय़ाः पार्थिवर्षभ |
३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९२
स्त्र्यु उवाच
पुत्रकाम न ते हन्मि पुत्रं पुत्रवतां वर |
४८ क
वन पर्व
अध्याय १२८
सोमक उवाच
पुत्रकामतय़ा सर्वं करिष्यामि वचस्तव ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
व्यास उवाच
पुत्रकामश्च लभते पुत्रं धनमथापि च |
४३ क