chevron_left  पुत्रात्पुण्यतरश्चैवarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः |
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
६३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
७३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
८६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
९२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
९७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
१०३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
११२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
१२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
१२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रात्पुण्यतरश्चैव मा पुत्रमनुतप्यथाः ||
१३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३३
मातो उवाच
पुत्रात्मा नावमन्तव्यः पूर्वाभिरसमृद्धिभिः |
२२ क
विराट पर्व
अध्याय ४५
अश्वत्थामो उवाच
पुत्रादनन्तरः शिष्य इति धर्मविदो विदुः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय १६४
भीष्म उवाच
पुत्रादभ्यधिकं चैव भारद्वाजोऽनुपश्यति ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राधिभिः परिद्यूनां द्रौपदीं सत्यवादिनीम् ||
४६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्राधिभिरभिध्वस्ता निगृह्यावुद्धिजं तमः ||
९९ ख
शल्य पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
पुत्रानन्ये पितॄनन्ये पुनर्युद्धमरोचय़न् ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
पुत्रानन्ये पितॄनन्ये भ्रातॄंश्च सह वान्धवैः |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४७
सञ्जय़ उवाच
पुत्रानन्ये पितॄनन्ये भ्रातॄनन्ये च मातुलान् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रानिव प्रिय़ाञ्ज्ञातीन्भ्रातॄनिव सहोदरान् |
९ क
आदि पर्व
अध्याय ११३
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रान्गुणसमाय़ुक्तानुत्पादय़ितुमर्हसि |
३० ख
आदि पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
पुत्रान्धर्मार्थकुशलानुत्पादय़ितुमर्हसि ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय २२०
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रान्परिददद्भीतो लोकपालं महौजसम् ||
२१ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
सञ्जय़ उवाच
पुत्रान्पितॄन्सखीन्भ्रातॄन्समारोप्य दृढक्षतान् |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
पुत्रान्पौत्रांस्तथाचार्यांस्ततोऽसि निधनं गतः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९
भीष्म उवाच
पुत्रान्पौत्रान्पशूंश्चैव वान्धवान्सचिवांस्तथा |
१९ क
वन पर्व
अध्याय ७८
वृहदश्व उवाच
पुत्रान्पौत्रान्पशूंश्चैव वेत्स्यते नृषु चाग्र्यताम् |
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
पुत्रान्भ्रातृन्पितृंश्चैव ददृशुर्निहतान्रणे ||
१९२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०८
भीष्म उवाच
पुत्रान्भ्रातॄन्निगृह्णन्तो विनय़े च सदा रताः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
पुत्रान्भ्रातॄन्पितॄन्दाराञ्जीवितं चैव वासविः |
४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२
भीष्म उवाच
पुत्रान्राज्ये प्रतिष्ठाप्य वनमस्मि ततो गतः ||
३२ ग
आदि पर्व
अध्याय १०६
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रान्विनय़सम्पन्नानात्मनः सदृशान्गुणैः ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रान्स्थापय़ कौरव्य स्थापय़िष्याम्यहं परान् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १२६
लोमश उवाच
पुत्रार्थं तव राजर्षे महावलपराक्रम ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
भीष्म उवाच
पुत्रार्थममरश्रेष्ठ पादेनैकेन नित्यदा ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
पुत्रार्थमसुरेन्द्रेण गीतं चैव सुधन्वना ||
८४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
श्रीभगवानु उवाच
पुत्रार्थमाराधितवानात्मानमहमात्मना ||
२५ ग
सभा पर्व
अध्याय ७१
विदुर उवाच
पुत्रार्थमय़जत्क्रोधाद्वधाय़ मम भारत ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
पुत्रार्थमय़जद्राजा लेभे पुत्रशतं च सः ||
११९ ख
वन पर्व
अध्याय १२७
सोमक उवाच
पुत्रार्थिना मय़ा वोढं न चासां विद्यते प्रजा ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
पुत्रार्थिनी मामुपेत्य वाक्यमाह युधिष्ठिर ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
भीष्म उवाच
पुत्रार्थी लभते पुत्रं कन्या पतिमवाप्नुय़ात् |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
पुत्रार्थे श्रपय़ामास चरुं गाधेस्तथैव च ||
८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
पुत्रार्थे सुहृदां चैव स समीक्ष्य सहस्रशः ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
पुत्र उवाच
पुत्रार्थो विहितो ह्येष स्थाविर्ये परिपालनम् |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
पुत्राश्च तव गाङ्गेय़ं परिवार्य यय़ुर्मुदा |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
पुत्राश्च तव योधाश्च व्यथिता विप्रदुद्रुवुः ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३३
नारद उवाच
पुत्राश्च पितरश्चैव परस्परमपूजय़न् ||
९ ख