chevron_left  मुहूर्तंarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय ९
युधिष्ठिर उवाच
मुहूर्तं तावदेकाग्रो मनःश्रोत्रेऽन्तरात्मनि |
१ क
विराट पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तं तु स तं वेगं सहित्वा भुवि दुःसहम् |
५५ क
कर्ण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तं ते समाश्वास्य हेतुभिः शास्त्रसंमितैः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १८१
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तं तौ तथान्योन्यं समरे पर्यकर्षताम् ||
२३ ग
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तं नाशकं वक्तुं किञ्चिद्दुःखपरिप्लुतः ||
४२ ख
वन पर्व
अध्याय ९९
लोमश उवाच
मुहूर्तं भरतश्रेष्ठ लोकत्रासकरं महत् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
मुहूर्तं मृष्यतां तावद्यावदेनं विचिन्तय़े |
३१ क
वन पर्व
अध्याय १०६
लोमश उवाच
मुहूर्तं विमना भूत्वा सचिवानिदमव्रवीत् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १०६
लोमश उवाच
मुहूर्तं विमना भूत्वा स्थाणोर्वाक्यमचिन्तय़त् |
५ ख
वन पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तं शरवर्षं तत्प्रतिगृह्य पिनाकधृक् |
२७ क
स्त्री पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तं समनुध्याय़ धृतराष्ट्रोऽभ्यभाषत ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय ६५
शकुन्तलो उवाच
मुहूर्तं सम्प्रतीक्षस्व द्रक्ष्यस्येनमिहागतम् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
मुहूर्तं सह्यतां दाहस्ततः शीतीभविष्यसि ||
९ ख
सभा पर्व
अध्याय ७१
विदुर उवाच
मुहूर्तं सुखमेवैतत्तालच्छाय़ेव हैमनी ||
४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तदृष्टः स मय़ा पातितो भुवि दृश्यते ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३३
दस्यव ऊचुः
मुहूर्तदेशकालज्ञ प्राज्ञ शीलदृढाय़ुध |
११ क
आदि पर्व
अध्याय २८
सूत उवाच
मुहूर्तमतुलं युद्धं कृत्वा विनिहतो युधि ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
मुहूर्तमथ सञ्चिन्त्य व्राह्मणस्तस्य रक्षसः |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५५
च्यवन उवाच
मुहूर्तमनुभूतोऽसौ सभार्येण नृपोत्तम ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमनुसञ्चिन्त्य धर्मराजानमव्रवीत् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१७
वलिरु उवाच
मुहूर्तमपि चैवाहुरेकं सन्तमनेकधा |
५३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
मुहूर्तमपि पश्येय़ं प्रहरेय़ं न चाप्युत ||
६१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
भीष्म उवाच
मुहूर्तमपि राजेन्द्र तिन्दुकालातवज्ज्वलेत् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमरणास्त्वन्ये मानुषा मृगपक्षिणः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५९
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमस्वपन्राजञ्श्रान्तानि भरतर्षभ ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय १८२
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमात्रं त्वनुचिन्त्य राजा; युधिष्ठिरो मातरमुत्तमौजाः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमिव च ध्यात्वा नारदो देवदर्शनः |
७ क
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमिव च ध्यात्वा प्रतिलभ्य च चेतनाम् |
४४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमिव च ध्यात्वा व्यासः सत्यवतीसुतः |
१ ख
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
मुहूर्तमिव च ध्यात्वा सीता मां प्रत्युवाच ह |
६४ क
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमिव तं द्रोणश्चिन्तय़ित्वा विनिश्चय़म् |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
मुहूर्तमिव तत्तेजो व्याप्य सर्वा दिशो दश |
११४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमिव तत्सर्वमभवत्स्वर्गसंनिभम् |
५५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमिव तद्युद्धं तय़ोः सममिवाभवत् ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३५
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमिव तद्युद्धं समरूपं तदाभवत् ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमिव तद्युद्धमासीन्मधुरदर्शनम् |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमिव तद्युद्धमासीन्मधुरदर्शनम् |
७८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमिव तद्राजन्पाण्डवानां निवेशनम् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२६
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमिव तु ध्यात्वा भृशमार्तोऽभ्यभाषत ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय १३९
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमिव तृप्तिश्च भवेद्भ्रातुर्ममैव च |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमिव तौ गत्वा नर्दमाने युधिष्ठिरे |
६६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमिव राजेन्द्र परिकृष्य परस्परम् |
३६ क
वन पर्व
अध्याय ७०
वृहदश्व उवाच
मुहूर्तमिव वार्ष्णेय़ो रश्मीन्यच्छतु वाजिनाम् ||
१३ ग
वन पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमिव स ध्यात्वा धर्मेणान्विष्य तां गतिम् |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
सञ्जय़ उवाच
मुहूर्तमिव स ध्यात्वा भीष्मे युक्तममन्यत ||
६६ ख
आदि पर्व
अध्याय २०३
नारद उवाच
मुहूर्तमिव सञ्चिन्त्य कर्तव्यस्य विनिश्चय़म् ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय १३०
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमिव सञ्चिन्त्य दुर्योधनमथाव्रवीत् ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५
व्यास उवाच
मुहूर्तमिव सञ्चिन्त्य देवराजानमव्रवीत् ||
२० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमिव सञ्चिन्त्य वचनाय़ोपचक्रमे ||
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
मुहूर्तमिव सन्दध्यौ किमय़ं चोद्यतामिति ||
८ ख