भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य धनुषश्छेदं नामृष्यन्त महारथाः |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य निधनं प्रेप्सुं दुर्मुखोऽभ्यद्रवद्वली ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य निधनाकाङ्क्षी पुरस्कृत्य शिखण्डिनम् ||
४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य निधनार्थाय़ पार्थस्य विजय़ाय़ च |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य पतनाद्धृष्टानुपगम्य महारथान् |
६० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य पातने यत्नं परमं ते समास्थिताः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्य वधमिच्छन्ती प्रेत्यापि भरतर्षभ ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य वहुधा तालश्चरन्केतुरदृश्यत ||
४ ख
विराट पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्य सञ्ज्ञां तु तथैव मन्ये; जानाति मेऽस्त्रप्रतिघातमेषः |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य समरे कर्म चिन्तय़ानास्तु पाण्डवाः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य समरे राजन्प्रार्थय़ाना महद्यशः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य समरे राजन्मृत्योर्हेतुं महात्मनः |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्य समरे राजन्यशो मानं च वर्धय़न् ||
२९ ग
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्य सह पार्थेन वलिवासवय़ोरिव ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
भीष्मस्यात्रैव सम्प्राप्तिः स्वर्गस्य परिकीर्तिता ||
२०४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मस्याथ वचः श्रुत्वा दाशार्हः पुष्करेक्षणः |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्यान्तादस्तु वः सौहृदं वा; सम्प्रश्लेषः साधु राजन्प्रसीद ||
४७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्यान्तादेतदन्ताः स्थ सर्वे; सत्यामेतां भारतीमीरय़ामि ||
५० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
भीष्महन्ता महाराज वारय़ामास पत्रिभिः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
भीष्महेतोः पराक्रान्तश्चित्रसेनो महारथः |
५१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
भीष्महेतोर्नरव्याघ्र श्येनय़ोरामिषे यथा ||
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
भीष्माग्निमभि सङ्क्रुद्धं विनाशाय़ सहस्रशः ||
२७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१८
अर्जुन उवाच
भीष्मादीनां च सर्वेषां सुहृदामुपकारिणाम् |
४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मादीनां महावाहो तदनुज्ञातुमर्हसि ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्माद्द्रोणात्कृपात्कर्णाद्द्रोणपुत्राच्च भारत |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
भीष्माद्भागीरथीपुत्रात्कुरुराजो युधिष्ठिरः ||
२०१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
भीष्माद्रक्ष्योऽय़मद्येति ततो युद्धमवर्तत ||
४९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
भीष्माभिषेचनं पर्व ज्ञेय़मद्भुतकारणम् ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
भीष्मावमानात्सङ्ख्याय़ां रथानामर्धकीर्तनात् |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्माश्रिताः सुमधुराः सर्वेन्द्रिय़मनोहराः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्माय़ पाण्डवान्दातुं धृतराष्ट्राय़ चैव हि ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०६
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्माय़ सत्यवत्यै च मात्रे चोपजहार सः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
भीष्माय़ाभिमुखं यातान्वारय़ामासुराहवे ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
भीष्माय़ाभिमुखं यान्तं भारद्वाजो न्यवारय़त् ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
भीष्मे च पुरुषव्याघ्रे यदिदं सात्वतां वरे ||
३७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
भीष्मे च युधि विक्रान्ते पाण्डवे च धनञ्जय़े ||
११ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
भीष्मे च युधि संरव्धे हृष्टे दुर्योधने तथा ||
१ ख
विराट पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मे तु सङ्ग्रामशिरो विहाय़; पलाय़माने धृतराष्ट्रपुत्रः |
१ क
वन पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मे द्रोणे कृपे कर्णे द्रोणपुत्रे च भारत |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मे द्रोणे कृपे कर्णे द्रोणपुत्रे जय़द्रथे |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मे द्रोणे कृपे कर्णे भीमसेने धनञ्जय़े |
४८ क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
भीष्मे द्रोणे च निहते सूतपुत्रे च भारत |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८८
भीष्म उवाच
भीष्मे प्रतिचिकीर्षामि नास्मि वार्येति वै पुनः ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७६
अम्वो उवाच
भीष्मे वा कुरुशार्दूले शाल्वराजेऽथ वा पुनः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मे व्रुवति तद्वाक्यं धृष्टमाक्षिप्य मन्युमान् |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
भीष्मे शान्तनवे नाथे कर्णे चास्त्रभृतां वरे |
७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१३
युधिष्ठिर उवाच
भीष्मे स्वर्गमनुप्राप्ते गते च मधुसूदने |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
भीष्मे हते भृशं दुःखान्मन्ये शोचन्ति पुत्रकाः ||
५२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मेण च महाप्राज्ञ गोविन्देन च धीमता |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
भीष्मेण तु रणे पार्थाः पालिता वाहुशालिना |
१३ क