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द्रोण पर्व
अध्याय ६९
द्रोण उवाच
एष ते कवचं राजंस्तथा वध्नामि काञ्चनम् |
३५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८०
भीष्म उवाच
एष ते कार्मुकं वीर द्विधा कुर्मि ससाय़कम् ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४३
भीष्म उवाच
एष ते केशवः सर्वमाख्यास्यति महामतिः |
३ क
वन पर्व
अध्याय १६३
अर्जुन उवाच
एष ते निशितैर्वाणैर्दर्पं हन्मि स्थिरो भव |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४९
सञ्जय़ उवाच
एष ते निहतो वन्धुस्त्वय़ा दृष्टोऽस्य विक्रमः |
३५ ख
सभा पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
एष ते नृपते पुत्रः श्रीमाञ्जातो महावलः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०८
सुपर्ण उवाच
एष ते पश्चिमो मार्गो दिग्द्वारेण प्रकीर्तितः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६०
सञ्जय़ उवाच
एष ते पाण्डवः शत्रुरविषह्योऽग्रतः स्थितः |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
एष ते पार्षतो नित्यं हितकामः प्रिय़े रतः |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय ७३
वाय़ुरु उवाच
एष ते प्रथमः कल्प आपद्यन्यो भवेदतः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
एष ते प्रथमो धर्मः सृष्टो धात्रा महात्मना |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८५
भीष्म उवाच
एष ते प्रभवो राजञ्जगतः सम्प्रकीर्तितः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५८
भीष्म उवाच
एष ते भरतश्रेष्ठ नृशंसः परिकीर्तितः |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
एष ते भरतश्रेष्ठ यज्ञानां विधिरुत्तमः |
१३४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
एष ते भरतश्रेष्ठ स्वस्रीय़स्यात्मजः शिशुः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६०
सञ्जय़ उवाच
एष ते मातुलः प्राज्ञः क्षत्रधर्ममनुव्रतः |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय ५८
भीष्म उवाच
एष ते राजधर्माणां लेशः समनुवर्णितः |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
एष ते रुधिरं कण्ठात्पिवामि पुरुषाधम |
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
एष ते लक्षणोद्देश आय़ुष्याणां प्रकीर्तितः |
१४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८७
भीष्म उवाच
एष ते लक्षणोद्देशः सङ्क्षेपेण प्रकीर्तितः |
३३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
एष ते लक्षणोद्देशः समुद्दिष्टो यथाविधि |
५६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५८
भीष्म उवाच
एष ते विततो यज्ञः श्रद्धापूतः सदक्षिणः |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
एष ते विततो यज्ञः श्रद्धापूतः सदक्षिणः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
एष ते विदधे मृत्युमित्युक्त्वान्तरधीय़त ||
१०६ ख
वन पर्व
अध्याय ११
मैत्रेय़ उवाच
एष ते विदुरः सर्वमाख्यास्यति गते मय़ि ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
एष ते विविधो धर्मः पाण्डवश्रेष्ठ कीर्तितः |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६४
भीष्म उवाच
एष ते विस्तरस्तात सङ्क्षेपश्च प्रकीर्तितः |
१० क
वन पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
एष ते विहितः पार्थ घोरो धर्मो दुरन्वय़ः |
५० क
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
एष ते विहितो राजन्धात्रा धर्मः सनातनः ||
५३ ख
वन पर्व
अध्याय २४१
वैशम्पाय़न उवाच
एष ते वैष्णवो नाम यज्ञः सत्पुरुषोचितः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय १३९
लोमश उवाच
एष ते व्रह्महा यज्ञं मा द्रष्टुं प्रविशेदिति |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय २
व्यास उवाच
एष ते सञ्जय़ो राजन्युद्धमेतद्वदिष्यति |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
एष ते सदृशं शत्रोः कर्म भीमः करोम्यहम् ||
८६ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १२९
महेश्वर उवाच
एष तेषां विशुद्धानां फेनपानां तपोधने |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
अश्वत्थामो उवाच
एष तेऽद्य शिरः काय़ादुद्धरामि सुदुर्मते ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९
इन्द्र उवाच
एष तेऽनुग्रहस्तक्षन्क्षिप्रं कुरु मम प्रिय़म् ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
एष तेऽपूपः |
७१ घ
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
एष त्वसुकरं कर्म यादवार्थे करोम्यहम् ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२६
सञ्जय़ उवाच
एष त्वहमनीकानि प्रविशाम्यरिसूदन |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
एष त्वा प्रापय़े वीर पितामहरथं प्रति ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
एष त्वां क्षणादेवोपाध्याय़कुलं प्रापय़िष्यतीति ||
१६१ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
एष त्वां प्रेक्षते कर्णः सकटाक्षो विशां पते |
४० क
उद्योग पर्व
अध्याय १९०
भीष्म उवाच
एष त्वां सजनामात्यमुद्धरामि स्थिरो भव ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
एष त्वाद्य हनिष्यामि महिषं स्कन्दराडिव |
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १४१
हिडिम्व उवाच
एष त्वामेव दुर्वुद्धे निहन्म्यद्याप्रिय़ंवदम् ||
१५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १०
व्यास उवाच
एष त्वय़ाहमिह राजन्समेत्य; ये चाप्यन्ये तव पूर्वे नरेन्द्राः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
एष दण्डो महाराज स्त्रीणां भर्तृव्यतिक्रमे |
६१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
एष दाय़विधिः पार्थ पूर्वमुक्तः स्वय़म्भुवा ||
५८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १८
गान्धार्यु उवाच
एष दुःशासनः शेते विक्षिप्य विपुलौ भुजौ |
२७ क
स्त्री पर्व
अध्याय १८
गान्धार्यु उवाच
एष दुःशासनः शेते शूरेणामित्रघातिना |
१९ क