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शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेव हतः कर्णः सूतपुत्रः प्रतापवान् |
५४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२३
सञ्जय़ उवाच
एवमेव हते कर्णे सानुवन्धे दुरात्मनि |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेव हतो द्रोणः सर्वेषामेव पश्यताम् ||
५३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेव हि राजानो जय़न्ति पृथिवीमिमाम् ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७९
भीष्म उवाच
एवमेवात्मनस्त्यागान्नान्यं धर्मं विदुर्जनाः ||
२८ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १५०
भीष्म उवाच
एवमेवात्मनात्मानं पूजय़न्तीह धार्मिकाः ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
एवमेवात्मनात्मानमन्यस्मिन्किं न पश्यसि |
१२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
एवमेवात्मनो वीर्यमहं वीर्यं च पाण्डवे |
५६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २७
व्राह्मण उवाच
एवमेवानुवर्तन्ते सप्त ज्योतींषि भास्करम् ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
एवमेवापरां सन्ध्यां समुपासीत वाग्यतः |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
एवमेवाप्यसंसक्तः पुरुषः स्यान्न संशय़ः ||
१२ ग
सभा पर्व
अध्याय १४
युधिष्ठिर उवाच
एवमेवाभिजानन्ति कुले जाता मनस्विनः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
करालजनक उवाच
एवमेवाभिसम्वद्धौ नित्यं प्रकृतिपूरुषौ |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
वसिष्ठ उवाच
एवमेवावगन्तव्यं नानात्वैकत्वमेतय़ोः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १८८
भीष्म उवाच
एवमेवास्य तच्चित्तं भवति ध्यानवर्त्मनि ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
एवमेवाय़माचारः प्रादुर्भूतो यतस्ततः ||
२४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २३९
व्यास उवाच
एवमेवेन्द्रिय़ग्रामं वुद्धिः सृष्ट्वा निय़च्छति ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८८
भीष्म उवाच
एवमेवेन्द्रिय़ग्रामं शनैः सम्परिभावय़ेत् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेवोपकर्तॄणां प्राय़शो लक्षय़ामहे |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
एवमेवोपभोगेषु भोजनाच्छादनेषु च |
१३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २००
भीष्म उवाच
एवमेष कुरुश्रेष्ठ प्रादुर्भावो महात्मनः |
४४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
एवमेष क्षय़ो वृत्तः कर्णार्जुनसमागमे ||
५१ ग
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
एवमेष क्षय़ो वृत्तः कुरुपाण्डवसेनय़ोः |
७५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
एवमेष क्षय़ो वृत्तः पाण्डवानां ततस्ततः |
५८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
एवमेष क्षय़ो वृत्तः पाण्डूनामपि भारत |
३५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
एवमेष क्षय़ो वृत्तः सुमहाँल्लोमहर्षणः |
४० क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
एवमेष क्षय़ो वृत्तस्तावकानां परैः सह |
१२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
एवमेष क्षय़ो वृत्तो राजन्दुर्मन्त्रिते तव ||
८८ ख
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेष चरन्पार्थ कालचक्रमतन्द्रितः |
३५ क
सभा पर्व
अध्याय १७
कृष्ण उवाच
एवमेष तदा वीर वलिभिः कुकुरान्धकैः |
२७ क
सभा पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
एवमेष नृपः पापः शिशुपालः सुमन्दधीः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेष परिक्रम्य महामेरुमतन्द्रितः |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय ७
सूत उवाच
एवमेष पुरावृत्त इतिहासोऽग्निशापजः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१२
भीष्म उवाच
एवमेष प्रसङ्ख्यातः स्वकर्मप्रत्ययी गुणः |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
वसिष्ठ उवाच
एवमेष महानात्मा सर्गप्रलय़कोविदः |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेष महान्धर्म आद्यो राजन्सनातनः |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
व्यास उवाच
एवमेष महाभागः पद्मनाभः सनातनः |
८७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
एवमेष महाभागो वभूवाश्वशिरा हरिः |
६९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
एवमेष महाराज स्त्रीपुमान्द्रुपदात्मजः |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
एवमेष महारौद्रः क्षय़ार्थं सर्वधन्विनाम् |
६९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २००
भीष्म उवाच
एवमेष महावाहुः केशवः सत्यविक्रमः |
४६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
एवमेष महाव्यूहः प्रय़यौ सागरोपमः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
एवमेष समुत्पन्नः परक्षेत्रेऽर्जुनात्मजः ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेष हि ते प्रीतो भविष्यति न संशय़ः ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०९
सुपर्ण उवाच
एवमेषा द्विजश्रेष्ठ गुणैरन्यैर्दिगुत्तरा |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११५
भीष्म उवाच
एवमेषा महाराज चतुर्भिः कारणैर्वृता |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
एवमेषा महाराज जापकस्य गतिर्यथा |
१२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेषा महाराज पर्वतैः पृथिवी चिता ||
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमेषा सरिच्छ्रेष्ठा पुष्करेषु सरस्वती |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५३
भीष्म उवाच
एवमेषां करिष्यामि निधनं कुरुनन्दन |
२२ क