सभा पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
भारतानां स्त्रिय़ः सर्वा गान्धार्या सह सङ्गताः |
१९ क
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
भारतानामभावाय़ राजन्दुर्मन्त्रिते तव ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
भारती भरतश्रेष्ठ पतिते जाह्नवीसुते ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
भारती भरतश्रेष्ठ सेना कृपणदर्शना ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय
२१२
मार्कण्डेय़ उवाच
भारती सुप्रय़ोगा च कावेरी मुर्मुरा तथा |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
भारतैर्यदि योत्स्यन्ति किं नु दुःखमतः परम् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
भारद्वाज महत्कर्म कृतं ते द्विजसत्तम ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
धृतराष्ट्र उवाच
भारद्वाजं कथं युद्धे युय़ुधानोऽभ्यवारय़त् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजं च ते सर्वे न शेकुः प्रतिवीक्षितुम् |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
भारद्वाजं चाशिषोऽनुव्रुवाणं; तदा नाशंसे विजय़ाय़ सञ्जय़ ||
१२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
धृतराष्ट्र उवाच
भारद्वाजं जिघांसन्तौ सव्यसाचिवृकोदरौ |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
२१
धृतराष्ट्र उवाच
भारद्वाजं तथानीके दृष्ट्वा शूरमवस्थितम् |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१२१
वैशम्पाय़न उवाच
भारद्वाजं तदाग्नेय़ं महास्त्रं प्रत्यपादय़त् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजं त्रिभिर्वाणैर्दुःसहं नवभिस्तथा |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजं पुरस्कृत्य त्यक्तात्मानोऽर्जुनं प्रति ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजं रणे दृष्ट्वा विसृजन्तं शिताञ्शरान् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजं शरौघाभ्यां महद्भ्यामभ्यवर्षताम् ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३६
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजं शरौघाभ्यां महद्भ्यामभ्यवर्षताम् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजं शरौघेण महता समवारय़त् ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजं समासाद्य व्यूहस्य प्रमुखे स्थितम् |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
भारद्वाजः किमकरोच्छूरः सङ्क्रन्दनो युधि ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
भारद्वाजः कृपो भीष्मो यतः पार्थस्ततोऽभवन् ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
८
सूत उवाच
भारद्वाजः कौणकुत्स आर्ष्टिषेणोऽथ गौतमः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१२५
वैशम्पाय़न उवाच
भारद्वाजः प्रिय़ं पुत्रमश्वत्थामानमव्रवीत् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजः शरव्रातैर्महद्भिः समवाकिरत् ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजमुखाः सर्वे भीमसेनजिघांसय़ा |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजस्ततः क्रुद्धः शरमाशीविषोपमम् |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजस्ततस्तूर्णं पाण्डवानां महाचमूम् |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजस्ततो भीमं षड्विंशत्या समार्पय़त् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजस्ततो वाक्यं दुःशासनमथाव्रवीत् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८९
धृतराष्ट्र उवाच
भारद्वाजस्तथा तेषु कृतवैरो महारथः ||
४२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजस्तु तान्दृष्ट्वा शरवर्षाणि वर्षतः |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजस्तु समरे मत्स्यं विव्याध पत्रिणा |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
२०८
वैशम्पाय़न उवाच
भारद्वाजस्य तीर्थं च पापप्रशमनं महत् ||
३ ग
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
भारद्वाजस्य विप्रर्षेः स्कन्नं रेतो महात्मनः |
५७ क
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजस्य हन्तारं भूरिवीर्यपराक्रमम् |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
भारद्वाजस्य हन्तारं सोऽभिसन्धाय़ भूमिपः |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
भारद्वाजात्मजः कर्ता कर्म तीव्रं हिताय़ वः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजाद्भय़ं नित्यं पश्यमानेन ते प्रभो ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजानिलोद्धूतः शरधारासहस्रवान् |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय
२१
धृतराष्ट्र उवाच
भारद्वाजेन भग्नेषु पाण्डवेषु महामृधे |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजेन विक्रम्य गमितो यमसादनम् ||
६७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजेन विक्रम्य गमितो यमसादनम् ||
८६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
भारद्वाजो महाप्राज्ञो मापय़ामास मेदिनीम् |
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजो महाराज जय़द्रथमथाव्रवीत् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजो महाराज भीमसेनं समभ्ययात् ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९८
वैशम्पाय़न उवाच
भारद्वाजो महेष्वासो द्रोणः प्रिय़सखस्तव |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
भारद्वाजो यत्र कविर्यवक्रीतो व्यनश्यत ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजो यय़ौ मत्स्यं द्रौणिश्चापि शिखण्डिनम् |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
भारद्वाजो रणे यत्तो धर्मपुत्रमवारय़त् ||
१६ ख