आदि पर्व
अध्याय
६५
शकुन्तलो उवाच
भीतः पुरन्दरस्तस्मान्मेनकामिदमव्रवीत् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
भीतवत्संविधातव्यं यावद्भय़मनागतम् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
भीतवत्संविधिः कार्यः प्रतिसन्धिस्तथैव च |
२०० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
भीता दिशोऽन्वपद्यन्त वातनुन्ना घना इव ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय
२९१
वैशम्पाय़न उवाच
भीता शापात्ततो राजन्दध्यौ दीर्घमथान्तरम् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६७
सञ्जय़ उवाच
भीताः पादैर्हय़ान्केचित्त्वरय़न्तः स्वय़ं रथैः |
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
२८४
कर्ण उवाच
भीतानामभय़ं दत्त्वा सङ्ग्रामे जीवितार्थिनाम् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
भीतान्भग्नांश्च सम्प्रेक्ष्य भय़ं भूय़ो विवर्धते ||
२९ ग
वन पर्व
अध्याय
२१४
मार्कण्डेय़ उवाच
भीताश्चोद्विग्नमनसस्तमेव शरणं यय़ुः ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
६०
वृहदश्व उवाच
भीताहमस्मि दुर्धर्ष दर्शय़ात्मानमीश्वर ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५७
धृतराष्ट्र उवाच
भीतो भीमस्य संस्पर्शात्स्मर्तासि वचनस्य मे ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१
युधिष्ठिर उवाच
भीतो रणे श्वेतवाहादिति मां मंस्यते जनः ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
भीतो वृकोदरात्तात सिंहात्पशुरिवावलः ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
भीतो हि मामकात्सैन्यात्प्रभावाच्चैव मे प्रभो ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
भीतोऽनृताच्च शापाच्च भृगोरित्यव्रवीच्छनैः ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
भीतोऽसि नूनं द्रुपदस्य पुत्र; तथा हि ते मुखवर्णोऽप्रहृष्टः ||
२२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१८
अर्जुन उवाच
भीम ज्येष्ठो गुरुर्मे त्वं नातोऽन्यद्वक्तुमुत्सहे |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
भीम दिष्ट्या पृथिव्यां ते प्रथितं सुमहद्यशः ||
१४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
भीम पर्याप्नुहि भय़ादिति चैवाभिवाशती |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
भीम मा भैर्महावाहो न त्वां वुध्यामहे वय़म् |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
भीम योत्स्ये त्वय़ा सार्धं श्रेय़सा निर्जितं वरम् ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
भीम राजा पिता वृद्धो वनवासाय़ दीक्षितः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
भीम शत्रुषु चात्यर्थं वर्धते मूर्तिरोजसा ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
भीमं च तस्यां ददृशुर्नलिन्यां; यथोपजोषं विहरन्तमेकम् ||
२५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७१
युधिष्ठिर उवाच
भीमं च नकुलं चैव पुरगुप्तौ समादधत् ||
२५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८६
वैशम्पाय़न उवाच
भीमं च नकुलं चैव सहदेवं च कौरवः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
भीमं च पुरुषव्याघ्रं विधिवत्प्रत्यपूजय़त् ||
३७ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
युधिष्ठिर उवाच
भीमं च भीमविक्रान्तं प्राणेभ्योऽपि प्रिय़ं मम |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९७
वैशम्पाय़न उवाच
भीमं च युय़ुधानं च पाण्डवं च धनञ्जय़म् |
७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
भीमं च वलिनां श्रेष्ठं सान्त्वय़ामास पार्थिवः |
४६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
भीमं चक्रे महाराज ततः सैन्यान्यपूजय़न् ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
भीमं ते विव्यधुस्तूर्णं शल्यहेतोररिन्दमाः ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
भीमं दशार्धैर्युवराजं चतुर्भि; र्द्वाभ्यां छित्त्वा कार्मुकं च ध्वजं च |
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६८
सञ्जय़ उवाच
भीमं द्रोणशिरश्छेदे प्रशस्यं न प्रशंससि ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
भीमं द्वादशभिर्विद्ध्वा सात्यकिं नवभिः शरैः |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
भीमं प्रच्छादय़ामास समन्तान्निशितैः शरैः ||
४२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
भीमं प्रच्छादय़ामासुः शरवर्षैः समन्ततः ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
भीमं प्रदर्शनेनापि भीमसेनं जनार्दन |
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
१२
विदुर उवाच
भीमं प्रशस्याथ गुणैरनेकै; र्हृष्टास्ततो द्वैतवनाय़ जग्मुः ||
६८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
भीमं प्रहरतां श्रेष्ठं वज्रपाणिमिवामराः ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
भीमं प्रहरतां श्रेष्ठं समन्तात्पर्यवारय़न् ||
९७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
भीमं प्रैक्षत राधेय़ो राजन्घोरेण चक्षुषा ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
भीमं भीमरथं चोभौ भीमसेनो हसन्निव |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
भीमं भीमवलं युद्धेऽय़ोधय़ंस्तु जय़ैषिणः ||
९१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११०
धृतराष्ट्र उवाच
भीमं भीमाय़ुधं क्रुद्धं साक्षात्कालमिव स्थितम् ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
भीमं रणे शस्त्रभृतां वरिष्ठं; तदा समार्च्छत्तमसह्यवेगम् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
भीमं विव्याध तरसा चित्रसेनरथे स्थितः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
भीमं विव्याध संरव्धो दशभिर्निशितैः शरैः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
भीमं विव्याध सङ्क्रुद्धस्त्रासय़ानो वरूथिनीम् ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
भीमं विव्याध सप्तत्या तिष्ठ तिष्ठेति चाव्रवीत् ||
१८ ग