विराट पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
भीमश्च तां परिष्वज्य महत्सान्त्वं प्रय़ुज्य च |
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
भीमश्च रथशार्दूलो युध्यते कौरवैः सह ||
४७ ख
वन पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
भीमश्च सहदेवश्च सहसा समुपाद्रवन् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
भीमश्चित्ररथश्चैव विख्यातः सर्वविद्वशी ||
४२ ख
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसंहननो भीमस्तदप्यजरय़त्ततः ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसात्यकय़ोरन्यः प्राणेभ्यः प्रिय़कृत्तमः ||
८६ ख
विराट पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेन त्वय़ा कार्या तस्य वासस्य निष्कृतिः ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
भीमसेन न ते शक्यं प्रवेष्टुमरिवाहिनीम् |
८० क
वन पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेन न पर्याप्तो ममासौ राक्षसाधमः ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय
६८
अर्जुन उवाच
भीमसेन निय़ोगात्ते हन्ताहं कर्णमाहवे ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४२
युधिष्ठिर उवाच
भीमसेन यमौ चोभौ पाञ्चालि च निवोधत |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं करूषांश्च केकय़ान्सहसृञ्जय़ान् |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं घ्नतेत्येवं सर्वसैन्यान्यचोदय़त् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६३
धृतराष्ट्र उवाच
भीमसेनं च कौन्तेय़ं यस्य नास्ति समो वले |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
भीमसेनं च गदय़ा प्राहरत्कुरुसत्तमः ||
३५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९७
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं च दुर्धर्षं प्रथमं प्रादिशद्वलम् |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं च दुर्धर्षं माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ |
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं च नवभिर्वाह्वोरुरसि चार्पय़त् ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं च राधेय़ माद्रीपुत्रौ यमावपि ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं च संशान्तं दृष्ट्वा परमदुर्मनाः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं च सङ्क्रुद्धं यमौ चापि यमोपमौ |
४४ क
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं च सप्तत्या सहदेवं च सप्तभिः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं ततः कृष्णा काले वचनमव्रवीत् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं ततः क्रुद्धः समाद्रवत सम्भ्रमात् ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं ततो द्रौणी राजन्विव्याध पत्रिणा |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८१
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं तथा क्रुद्धं भीमरूपो भय़ानकम् |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं तथा दृष्ट्वा धर्मराजपुरोगमाः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं तथा दृष्ट्वा प्राक्रोशंस्तावका नृप |
९६ क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं तदा राजन्धृष्टद्युम्नं च पार्षतम् |
४० क
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं तव सुतो वारय़ामास संय़ुगे |
४८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं तु कौन्तेय़ं सोदर्याः पर्यवारय़न् |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं तु युध्यन्तं भारद्वाजरथं प्रति |
४० क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं तु वातस्य देवराजस्य चार्जुनम् ||
८४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं त्रिभिर्विद्ध्वा कृतवर्मा शिलीमुखैः |
३३ क
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं त्रिसप्तत्या नकुलं सप्तभिस्तथा ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं परित्यज्य संन्यवर्तन्त चेदय़ः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५०
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं पुनर्दोर्भ्यां पर्यष्वजत वानरः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं पुरस्कृत्य दुर्योधनमुपद्रुताः ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं प्रति विभो तत्सत्यं नात्र संशय़ः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४३
युधिष्ठिर उवाच
भीमसेनं भजेथास्त्वं प्रागस्तगमनाद्रवेः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं महावाहुं पार्षतः परवीरहा ||
८७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं महावाहुं पुत्रास्ते प्राद्रवन्भय़ात् ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं महावाहुं मार्गणैः समवारय़न् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं महावाहुं सैन्धवस्य वधैषिणम् ||
३७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं महेष्वासं रुक्मपुङ्खैः समर्पय़त् ||
१६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं महेष्वासं समनुद्रुत्य वेगिताः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२९७
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं यमौ चोभौ निर्विचेष्टान्गताय़ुषः ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं यमौ चोभौ राजानं च युधिष्ठिरम् ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८१
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनं यय़ौ शल्यो मद्राणामीश्वरो वली |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनं रणे क्रुद्धं द्रोणपुत्रो न्यवारय़त् |
१९ क