उद्योग पर्व
अध्याय
१४६
वासुदेव उवाच
भीष्मेण दत्तमश्नामि न त्वय़ा राजसत्तम ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
भीष्मेण धार्तराष्ट्राणां व्यूढः प्रत्यङ्मुखो युधि |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
भीष्मेण धार्तराष्ट्राणां व्यूहः प्रत्यङ्मुखो युधि ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
भीष्मेण निहतो राजन्युध्यमानः पराक्रमी ||
८५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१२
धृतराष्ट्र उवाच
भीष्मेण पूर्वमुक्तोऽसि कृष्णेन विदुरेण च |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
भीष्मेण युद्धमिच्छन्तः प्रय़युर्हृष्टमानसाः ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
भीष्मेण युय़ुधे वीरस्तस्य चानुचरैः सह ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०२
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मेण विहितं राष्ट्रे धर्मचक्रमवर्तत ||
१२ ग
आदि पर्व
अध्याय
१०२
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मेण शास्त्रतो राजन्सर्वतः परिरक्षिते ||
११ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
भीष्मेण संय़ुगं गन्तुं क्षत्रिय़ेण विशेषतः ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
भीष्मेण समरे गुप्तां प्रविवेश महाचमूम् ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
भीष्मेण सह मा योत्सीः शिष्येणेति पुनः पुनः ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
भीष्मेण सह मा योत्सीः शिष्येणेति वचोऽव्रवीत् ||
२८ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
भीष्मेण सहिताः सर्वे पुत्रैश्च तव भारत |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मेण सहिताः सर्वे यय़ुः स्वं स्वं निवेशनम् ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मेण सोमदत्तेन वाह्लिकेन कृपेण च |
४४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मेण हि महाप्राज्ञ पित्रा ते वाह्लिकेन च |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
भीष्मेण हि महावाहुः सर्वक्षत्रस्य पश्यतः |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
भीष्मेणातुलवीर्येण व्यशीर्यत सहस्रधा ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
भीष्मेणैकेन मत्स्येषु पाञ्चालेषु च संय़ुगे |
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४६
वासुदेव उवाच
भीष्मेणोक्ते ततो द्रोणो दुर्योधनमभाषत |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
भीष्मो दश सहस्राणि जघान परवीरहा ||
२० ग
वन पर्व
अध्याय
१७१
अर्जुन उवाच
भीष्मो द्रोणः कृपः कर्णः शकुनिः सह राजभिः |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२४२
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो द्रोणः कृपः कर्णो गान्धारी च यशस्विनी ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
भीष्मो द्रोणः कृपः कर्णो भवान्भोजश्च वीर्यवान् |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो द्रोणः कृपः क्षत्ता धृतराष्ट्रोऽथ वाह्लिकः |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो द्रोणः कृपः शल्यः कृतवर्मा जय़द्रथः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८५
धृतराष्ट्र उवाच
भीष्मो द्रोणः कृपश्चैव किमकुर्वत संय़ुगे ||
१ ख
विराट पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो द्रोणः कृपश्चैव विकर्णो द्रौणिरेव च ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो द्रोणः कृपश्चैव विदुरश्च महामतिः |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
भीष्मो द्रोणः कृपो द्रौणिः कर्णो भूरिश्रवास्तथा |
४२ क
विराट पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो द्रोणः कृपो द्रौणिः पौरुषं तदपूजय़न् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
२३८
दुर्योधन उवाच
भीष्मो द्रोणः कृपो द्रौणिर्विदुरः सञ्जय़स्तथा |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३३
अर्जुन उवाच
भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ; सहास्मदीय़ैरपि योधमुख्यैः ||
२६ ख
विराट पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो द्रोणश्च कर्णश्च कृपश्च परमास्त्रवित् |
२ क
वन पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो द्रोणश्च कर्णश्च द्रोणपुत्रश्च वीर्यवान् ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
भीष्मो द्रोणश्च कर्णश्च ये चान्ये पृथिवीक्षितः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
भीष्मो द्रोणश्च विप्रोऽय़ं कृपः शारद्वतस्तथा |
४५ क
वन पर्व
अध्याय
८०
नारद उवाच
भीष्मो धर्मभृतां श्रेष्ठो विधिदृष्टेन कर्मणा ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो नृपतिशार्दूल न्यवधीत्तस्य सारथिम् |
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो भागीरथीपुत्र इदं वचनमव्रवीत् ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
भीष्मो यदकरोत्कर्म समरे सञ्जय़ारिहा |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
भीष्मो रथात्प्रपतितः प्रच्युतो धरणीतले ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो राज्यं च राष्ट्रं च महर्षिभ्यो न्यवेदय़त् ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
भीष्मो रामेण समरे न जितश्चारुलोचने ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
भीष्मो वः समरे सर्वान्पलय़िष्यति धर्मवित् |
१०३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
भीष्मो वसूनामन्यतमो दिष्ट्या जीवसि पुत्रक ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो विचित्रवीर्यस्य विवाहाय़ाकरोन्मतिम् ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो विचित्रवीर्याय़ प्रददौ विक्रमाहृताः ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मो विचित्रवीर्याय़ विधिदृष्टेन कर्मणा ||
५२ ख