chevron_left  छिन्नोत्तमाङ्गस्यarrow_drop_down
शल्य पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
छिन्नोत्तमाङ्गस्य ततः क्षुरप्रेण महात्मनः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
छुच्छुन्दरित्वमाप्नोति राजँल्लोभपराय़णः ||
१०३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२५
युधिष्ठिर उवाच
छेत्ता च तस्य नान्योऽस्ति त्वत्तः परपुरञ्जय़ ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
छेत्ता भागीरथीपुत्रः सर्वज्ञः सर्वधर्मवित् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५२
भीष्म उवाच
छेत्तारः संशय़ानां च क्लिश्यन्तीहाल्पवुद्धय़ः ||
१५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५७
सौदास उवाच
छेत्तास्मि संशय़ं तेऽद्य न मेऽत्रास्ति विचारणा ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२
व्यास उवाच
छेत्तुरेव भवेत्पापं परशोर्न कथञ्चन ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ४१
सूत उवाच
छेत्स्यतेऽल्पावशिष्टत्वादेतदप्यचिरादिव |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
छेत्स्याम्यहं तदप्याशु निर्वृतो भव लोमश ||
१०७ ख