chevron_left  एतस्मात्कारणाद्राजन्पाणिग्रहणमिष्यतेarrow_drop_down
आदि पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मात्कारणाद्राजन्पाणिग्रहणमिष्यते |
४६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४
व्यास उवाच
एतस्मात्कारणाद्राजन्विश्रुतः स करन्धमः ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
यक्षा ऊचुः
एतस्मात्कारणाद्राजन्स्थूणो न त्वाद्य पश्यति |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२८
भीष्म उवाच
एतस्मात्कारणाद्राजा न दोषं प्राप्तुमर्हति ||
३७ ख
आदि पर्व
अध्याय १७३
गन्धर्व उवाच
एतस्मात्कारणाद्राजा वसिष्ठं संन्ययोजय़त् |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९७
रेणुको उवाच
एतस्मात्कारणाद्व्रह्मंश्चिरमेतत्कृतं मय़ा |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०६
सुपर्ण उवाच
एतस्मात्कारणाद्व्रह्मन्पूर्वेत्येषा दिगुच्यते |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०
राजो उवाच
एतस्मात्कारणाद्व्रह्मन्प्रहसे त्वां द्विजोत्तम |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
नारद उवाच
एतस्माद्योनिसम्वन्धाद्यो जीवन्परिमुच्यते |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०३
गरुड उवाच
एतस्मिंस्त्वन्यथाभूते नान्यं हिंसितुमुत्सहे |
६ क
वन पर्व
अध्याय ५१
वृहदश्व उवाच
एतस्मिन्कथ्यमाने तु लोकपालाश्च साग्निकाः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
एतस्मिन्नन्तरे कश्चिदृषिर्धौम्यो नामाय़ोदः |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे कृष्णः पार्थं वचनमव्रवीत् |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे चैनं श्रुतकीर्तिर्महाय़शाः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे चैव कुरुराजं महारथम् |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय २०
सूत उवाच
एतस्मिन्नन्तरे चैव गरुडः काल आगते |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे चैव प्रमत्ते सव्यसाचिनि |
३८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०१
शुक्र उवाच
एतस्मिन्नन्तरे चैव वीरुदोषध्य एव च ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे जिष्णुर्हत्वा संशप्तकान्वली |
४१ क
विराट पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नन्तरे तत्र महावीर्यपराक्रमः |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे द्रौणिरभ्ययात्सुमहावलम् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे पार्थः सज्जं कृत्वा महद्धनुः |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६
द्रुपद उवाच
एतस्मिन्नन्तरे पार्थाः सुखमेकाग्रवुद्धय़ः |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९
भीष्म उवाच
एतस्मिन्नन्तरे यद्यत्सुकृतं तस्य भारत |
४ ख
वन पर्व
अध्याय २६२
मार्कण्डेय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे रक्षो रावणः प्रत्यदृश्यत |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १४९
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे राजञ्जटासुरसुतो वली |
५ क
वन पर्व
अध्याय १९७
मार्कण्डेय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे राजन्क्षुधासम्पीडितो भृशम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे राजन्दृष्ट्वा कर्णस्य विक्रमम् |
७४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
एतस्मिन्नन्तरे राजन्देवो हय़शिरोधरः |
५३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे राजन्द्रोणः शस्त्रभृतां वरः |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
एतस्मिन्नन्तरे वाय़ुः सर्वगन्धवहः शुचिः |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०२
भीष्म उवाच
एतस्मिन्नन्तरे विष्णुर्वाराहं रूपमास्थितः |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे वीरं राजानमपराजितम् |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे वीरः सहदेवो जनाधिप |
४८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे वीरावावन्त्यौ भ्रातरौ नृप |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे शून्ये धर्मराजमहं नृप |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
भीष्म उवाच
एतस्मिन्नन्तरे शून्ये नारदः समुपागमत् |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नन्तरे शूरः सौवलेय़ः प्रतापवान् |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
एतस्मिन्नन्तरे स श्रमणस्त्वरमाण उपसृत्य ते कुण्डले गृहीत्वा प्राद्रवत् |
१३७ क
वन पर्व
अध्याय १२८
लोमश उवाच
एतस्मिन्नपि राजेन्द्र वत्स्यामो विगतज्वराः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३२
व्यास उवाच
एतस्मिन्निरतो मार्गे विरमेन्न विमोहितः ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय १६४
अर्जुन उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु कुवेरो नरवाहनः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु कृतवीर्यात्मजो वली |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु कौन्तेय़ः श्वेतवाहनः |
१३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु गृह्य पार्थः पुनर्धनुः |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
व्राह्मण उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु चोदितः कालधर्मणा |
२० क
आदि पर्व
अध्याय ४१
सूत उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु जरत्कारुर्महातपाः |
१ क
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु जरासन्धं समर्चय़न् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु तीर्थय़ात्रापरो नृपः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु त्वरमाणा महारथाः |
३२ क