आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
एकवर्षान्तरास्त्वेव द्रौपदेय़ा यशस्विनः |
७९ क
स्त्री पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
एकवस्त्रधरा नार्यः परिपेतुरनाथवत् ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
एकवस्त्रा अधोनीवी रोदमाना रजस्वला |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
एकवस्त्रा तु रुदती मुक्तकेशी रजस्वला |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
एकवस्त्रा विकृष्टास्मि दुःखिता कुरुसंसदि ||
५४ ख
विराट पर्व
अध्याय
४५
अश्वत्थामो उवाच
एकवस्त्रा सभां नीता दुष्टकर्मन्रजस्वला ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
एकवस्त्रां च पाञ्चालीं पाण्डवानभ्यवेक्षतीम् |
१५ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२४
गान्धार्यु उवाच
एकवस्त्रानुसंवीताः प्रकीर्णासितमूर्धजाः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९२
वसिष्ठ उवाच
एकवस्त्रान्तराशित्वमेककालिकभोजनम् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
एकवस्त्रार्धसंवीतं सुकुमारतनुत्वचम् |
१०१ क
वन पर्व
अध्याय
५८
वृहदश्व उवाच
एकवासा असंवीतः सुहृच्छोकविवर्धनः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९२
वसिष्ठ उवाच
एकवासाश्च दुर्वासाः शाय़ी नित्यमधस्तथा |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२९
समुद्र उवाच
एकविंशतिमेधान्ते रामं वागशरीरिणी |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
एकविंशतिरात्रेण स्वर्गमारोहते नरः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
श्रीभगवानु उवाच
एकविंशतिरुत्पन्नास्ते प्रजापतय़ः स्मृताः |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४४
भीष्म उवाच
एकविंशतिवर्षो वा सप्तवर्षामवाप्नुय़ात् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
एकविंशतिशाखं च ऋग्वेदं मां प्रचक्षते |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
एकविंशतिसाहस्राः संय़ुगाय़ावतस्थिरे ||
३७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
एकविंशतिसाहस्रान्पदातीनवपोथय़त् ||
४७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
एकविंशश्च दश च कलाः सङ्ख्यानतः स्मृताः |
११२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
एकविंशे तु दिवसे यो भुङ्क्ते ह्येकभोजनम् |
८७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५७
धृतराष्ट्र उवाच
एकवीरवधे कस्मान्न युद्धे जय़मादधत् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५७
धृतराष्ट्र उवाच
एकवीरवधे मोघा शक्तिः सूतात्मजे यदा |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
धृतराष्ट्र उवाच
एकवीरेण कर्णेन द्रावितेषु परेषु च ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
एकवीरो महारौद्रस्तनुत्रास्थिविदारणः |
५९ क
वन पर्व
अध्याय
१४८
हनूमानु उवाच
एकवेदसमाय़ुक्ता एकमन्त्रविधिक्रिय़ाः |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
१४८
हनूमानु उवाच
एकवेदस्य चाज्ञानाद्वेदास्ते वहवः कृताः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
एकव्यूहविभागो वा क्वचिद्द्विव्यूहसञ्ज्ञितः |
५३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३२
विदुरो उवाच
एकशत्रुवधेनैव शूरो गच्छति विश्रुतिम् ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०१
नारद उवाच
एकशीलसमाचारौ द्विधैवैकं यथा कृतौ ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२०१
व्याध उवाच
एकशीलाश्च मित्रत्वं भजन्ते पापकर्मिणः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६५
भीष्म उवाच
एकशीलाश्च मित्रत्वं भजन्ते पापकर्मिणः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
एकशृङ्गः पुरा भूत्वा वराहो दिव्यदर्शनः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
असित उवाच
एकश्च दश चाष्टौ च गुणाः सह शरीरिणाम् |
३० ख
विराट पर्व
अध्याय
४४
कृप उवाच
एकश्च पञ्च वर्षाणि व्रह्मचर्यमधारय़त् |
६ क
विराट पर्व
अध्याय
४४
कृप उवाच
एकश्च पञ्च वर्षाणि शक्रादस्त्राण्यशिक्षत |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३९
व्रह्मो उवाच
एकश्चरति क्षेत्रेषु स्वैरचारी यथासुखम् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३७
व्यास उवाच
एकश्चरति यः पश्यन्न जहाति न हीय़ते |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय
३०
दुर्योधन उवाच
एकश्चाप्यगणः सङ्ख्ये प्रत्याश्वासमरोचय़म् ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
१९
सूत उवाच
एकश्चासि महावाहो वहवश्चापि दानवाः |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय
३१
दुर्योधन उवाच
एकश्चेद्योद्धुमाक्रन्दे वरोऽद्य मम दीय़ते |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
धृतराष्ट्र उवाच
एकश्चेमां महीं जित्वा चक्रे वलिभृतो नृपान् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२२
भीष्म उवाच
एकशय़्यासनं शक्रो दत्तवान्देवराट्स्वय़म् ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७५
व्राह्मणा ऊचुः
एकसार्थं प्रय़ाताः स्मो वय़मप्यत्र गामिनः |
६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
एकसार्थं प्रय़ातौ स्वस्त्वय़ा सह नरर्षभ |
३० क
वन पर्व
अध्याय
१०
सुरभिरु उवाच
एकस्तत्र वलोपेतो धुरमुद्वहतेऽधिकाम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
एकस्तत्राभवद्विन्दुर्मध्वाभो रुचिरप्रभः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
गुरुरु उवाच
एकस्तद्वेद भगवान्धाता नाराय़णः प्रभुः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
एकस्तम्भं चतुर्द्वारं सप्तभौमं सुमङ्गलम् |
६६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
एकस्तरति दुर्गाणि गच्छत्येकश्च दुर्गतिम् ||
११ ख