आदि पर्व
अध्याय
१६२
गन्धर्व उवाच
महर्षे स्वागतं तेऽस्तु कथय़स्व यथेच्छसि ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०८
सुपर्ण उवाच
महर्षेः कश्यपस्यात्र मारीचस्य निवेशनम् ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
महर्षेः कश्यपस्यैते गात्रेभ्यः प्रसृतास्तिलाः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
९९
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षेः कीर्तने तस्य भीष्मः प्राञ्जलिरव्रवीत् |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
महर्षेः पूजितस्येह सर्वलोके महात्मनः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षेः सर्वलोकेषु पूजितस्य महात्मनः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
५५
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षेः सर्वलोकेषु विश्रुतस्यास्य धीमतः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षेरग्निवेश्यस्य सकाशमहमच्युत |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३
नारद उवाच
महर्षेरभिशापेन कृमिभूतोऽपतं भुवि ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षेरुग्रतपसस्तस्माद्द्रोणो व्यजाय़त ||
८९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२०
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षेर्गौतमस्यासीच्छरद्वान्नाम नामतः |
२ क
वन पर्व
अध्याय
२४८
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षेर्दीप्ततपसो धौम्यस्य च पुरोधसः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
महर्षेर्मन्दपालस्य शार्ङ्ग्यं तनय़सम्भवः ||
९४ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
भीष्म उवाच
महर्षेर्वचनं श्रुत्वा नहुषो दुःखकर्शितः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
महर्षेर्वचनं श्रुत्वा प्रजा धर्मेण पाल्य च ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
महर्षेर्वचनात्तात वेदय़न्ति वृहस्पतेः |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षेश्चरितं यादृक्त्रिषु लोकेषु विश्रुतम् ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय
२४७
देवदूत उवाच
महर्षेऽकार्यवुद्धिस्त्वं यः स्वर्गसुखमुत्तमम् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
श्रीभगवानु उवाच
महर्षय़ः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
महर्षय़स्तुष्टुवुरञ्जसा च तं; वृषाकपिं सर्वचराचरेश्वरम् |
११७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८८
भीष्म उवाच
महर्षय़ो ज्ञानतृप्ता निर्वाणगतमानसाः ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
महर्षय़ो महाराज सम्वभूवुः कृपान्विताः ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
महर्षय़ो वेदविदः पितरश्च स्वधाभुजः ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५३
सञ्जय़ उवाच
महांश्चटचटाशव्दस्तत्रासीद्धि महाहवे ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय
५४
वैशम्पाय़न उवाच
महांश्चटचटाशव्दो योधय़ोर्हन्यमानय़ोः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९१
वसिष्ठ उवाच
महांश्चैवाग्रजो नित्यमेतत्क्षरनिदर्शनम् |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
महाकच्छैर्वृहद्भिश्च विभ्राजितमतीव च ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
महाकटितटश्रोण्यः कम्पमानैः पय़ोधरैः |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
महाकल्पसहस्राणि महाकल्पशतानि च |
१०४ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
महाकालं ततो गच्छेन्निय़तो निय़ताशनः |
६८ क
वन पर्व
अध्याय
२१४
मार्कण्डेय़ उवाच
महाकाय़मुपश्लिष्टं कुक्कुटं वलिनां वरम् |
२४ क
विराट पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
महाकाय़ा महावीर्याः कालखञ्जा इवासुराः ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
५२
सूत उवाच
महाकाय़ा महावीर्याः शैलशृङ्गसमुच्छ्रय़ाः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
महाकाय़ा महोत्साहा महाकर्णास्तथापरे |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
महाकाय़ास्त्रिधा राजन्प्रस्रवन्तो मदं वहु |
५२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
महाकाय़ो महावाहुर्महाशीर्षो महावलः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
महाकाय़ो महावेगो दारय़न्निव मेदिनीम् |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
महाकुलप्रसूतां च प्रशस्तां लक्षणैस्तथा |
११६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
धृतराष्ट्र उवाच
महाकुलानां स्पृहय़न्ति देवा; धर्मार्थवृद्धाश्च वहुश्रुताश्च |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
महाकुलीना भवती ह्रदाद्ध्रदमिवागता |
९१ क
वन पर्व
अध्याय
२२३
द्रौपद्यु उवाच
महाकुलीनाभिरपापिकाभिः; स्त्रीभिः सतीभिस्तव सख्यमस्तु |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
महाकुले निवेष्टव्यं सदृशे वा युधिष्ठिर |
१२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८४
पराशर उवाच
महाकुलेषु दृश्यन्ते तत्सर्वं तपसः फलम् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८३
पराशर उवाच
महाकुलेषु ये जाता वृत्ताः पूर्वतराश्च ये |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
महाकेतुर्धनुर्धातुर्नैकसानुचरश्चलः ||
११४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
महाक्रतुर्महाय़ज्वा महाय़ज्ञो महाहविः ||
८५ ख
वन पर्व
अध्याय
२१
वासुदेव उवाच
महाक्रतौ राजसूय़े निवृत्ते नृपते तव ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
महाक्रमो महाकर्मा महातेजा महोरगः |
८५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
महाक्रोधविषा वीराः समरेष्वपलाय़िनः |
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८२
नारद उवाच
महाक्षय़व्ययं वा स्याद्विनाशो वा पुनर्भवेत् ||
१८ ख