स्त्री पर्व
अध्याय
१
धृतराष्ट्र उवाच
लूनपक्षस्य इव मे जराजीर्णस्य पक्षिणः ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
लेखाभ्रु धृतराष्ट्रस्य दासी भूत्वा निवेशनम् |
७९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८५
विदुर उवाच
लेखाश्मनीव भाः सूर्ये महोर्मिरिव सागरे |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
गुरुरु उवाच
लेभिरे तपसा पूर्वमनुज्ञाताः स्वय़म्भुवा ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८१
पराशर उवाच
लेभिरे तपसा सिद्धिं प्रसादात्तस्य धीमतः ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
लेभिरे परमं हर्षं मेनिरे चासुरं हतम् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
९७
लोमश उवाच
लेभिरे पितरश्चास्य लोकान्राजन्यथेप्सितान् ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८९
भीष्म उवाच
लेभे कन्यां महादेवात्पुत्रो मे स्यादिति व्रुवन् ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
लेभे गर्भं प्रथमतः कुमारं च व्यजाय़त ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
लेभे गर्भं प्रथमतस्तस्मान्नृपतिसत्तमात् ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८९
भीष्म उवाच
लेभे गर्भं यथाकालं विधिदृष्टेन हेतुना |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
लेभे च कामांस्तान्सर्वान्पावकादिति नः श्रुतम् ||
१०६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
लेभे चक्रं यत्र कृष्णो महात्मा; धनुर्गाण्डीवं पाण्डवः सव्यसाची ||
४१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
लेभे ततः पाशुपतं सुघोरं; त्रैलोक्यसंहारकरं महास्त्रम् ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
लेभे न शान्तिं कौरव्यश्चिन्ताशोकपराय़णः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
लेभे पञ्च सुतान्वीराञ्शुभान्पञ्चाचलानिव ||
७१ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
लेभे पुत्रं भरद्वाजाद्भुमन्युं नाम भारत ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
लेभे पुत्रं वरारोहा सर्वप्राणभृतां वरम् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
लेभे शङ्खं देवदत्तं स्म तत्र; को नाम तेनाभ्यधिकः पृथिव्याम् ||
४३ ख
सभा पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
लेभे स करमत्यन्तं गन्धर्वनगरात्तदा ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६३
गन्धर्व उवाच
लेभे संवरणो भार्यां वसिष्ठस्यैव तेजसा ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
१२४
लोमश उवाच
लेलिहञ्जिह्वय़ा वक्त्रं विद्युच्चपललोलय़ा |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
लेलिहन्सृक्किणी वीरो मृगराडिव कानने ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
लेलिहानं यथा सर्पं गर्जन्तमृषभं यथा |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
लेलिहानामिव विभो नागकन्यां महाविषाम् |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
लेलिहानैर्महानागैः कृतशीर्षममित्रहन् ||
३९ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
लेलिह्यमानं सैन्यं मे हविष्मन्तमिवानलम् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
लेलिह्यमानं सैन्येषु प्रवृद्धमिव पावकम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११७
भीष्म उवाच
लेलिह्यमानस्तृषितः पुच्छास्फोटनतत्परः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३३
अर्जुन उवाच
लेलिह्यसे ग्रसमानः समन्ता; ल्लोकान्समग्रान्वदनैर्ज्वलद्भिः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
१६५
गन्धर्व उवाच
लेह्यान्यमृतकल्पानि चोष्याणि च तथार्जुन ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
लोक आतुरजनान्विराविण; स्तत्तदेव वहु पश्य शोचतः |
६० क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
लोकं च सङ्करात्कृत्स्नात्त्रातास्मीति परन्तप ||
११४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६०
गन्धर्व उवाच
लोकं निर्मथ्य धात्रेदं रूपमाविष्कृतं कृतम् ||
३० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
लोककर्ता पशुपतिर्महाकर्ता महौषधिः ||
७६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
व्यास उवाच
लोककर्ता प्रभुर्व्रह्मा लोकानां हितकाम्यया ||
८२ ख
वन पर्व
अध्याय
१९४
मार्कण्डेय़ उवाच
लोककर्ता महाभाग भगवानच्युतो हरिः |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८१
श्रीरु उवाच
लोककान्तास्मि भद्रं वः श्रीर्नाम्नेह परिश्रुता |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
व्यास उवाच
लोककार्यगतीः सर्वास्त्वं चिन्तय़ यथाविधि |
८४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
लोककार्याणि कृत्वा च पुनः स्वां प्रकृतिं गताः ||
९५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
लोकक्षय़करो राजंस्तन्मे निगदतः शृणु ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
लोकक्षय़करो रौद्रो भीष्मस्य सह सोमकैः ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३७
व्रह्मो उवाच
लोकचिन्ता विचिन्ता च मत्सरः परिभाषणम् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
लोकज्येष्ठा लोकवृत्तिप्रवृत्ता; रुद्रोपेताः सोमविष्यन्दभूताः |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३२
नारद उवाच
लोकज्येष्ठाञ्ज्ञाननिष्ठांस्तमोघ्नाँल्लोकभास्करान् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
युधिष्ठिर उवाच
लोकतत्त्वं च कार्त्स्न्येन भूतानामागतिं गतिम् |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१६
व्राह्मण उवाच
लोकतत्त्वार्थकुशलं ज्ञातारं सुखदुःखय़ोः ||
१९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१६
व्राह्मण उवाच
लोकतन्त्रं परित्यक्तं दुःखार्तेन भृशं मय़ा |
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६२
नारद उवाच
लोकतन्त्रं हि यज्ञाश्च सर्वमन्ने प्रतिष्ठितम् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५९
वैश्रवण उवाच
लोकतन्त्रविधानानामेष पञ्चविधो विधिः ||
१ ख