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आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
एकादश सुताः स्थाणोः ख्याताः परममानसाः ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
एकादश हता युद्धे ताः प्रभो पाण्डुसृञ्जय़ैः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय १७३
वैशम्पाय़न उवाच
एकादशं वर्षमिदं वसामः; सुय़ोधनेनात्तसुखाः सुखार्हाः |
८ क
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
एकादशचमूभर्ता पुत्रो दुर्योधनस्तव |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
एकादशचमूभर्ता भ्रातरश्चास्य सूदिताः |
७६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
एकादशचमूभर्ता यत्र पुत्रो ममाभिभूः ||
२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ९
कृप उवाच
एकादशचमूभर्ता शेते दुर्योधनो हतः ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
एकादशचमूभर्ता सोऽहमेतां दशां गतः |
९ क
वन पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
एकादशतनुः स्थाणुर्धनुषा परितोषितः ||
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
एकादशपरिक्षेपं मनो व्याकरणात्मकम् |
२ क
वन पर्व
अध्याय २०३
व्याध उवाच
एकादशविकारात्मा कलासम्भारसम्भृतः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३३
भीष्म उवाच
एकादशविकारात्मा कलासम्भारसम्भृतः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
एकादशविकारात्मा जगत्पिवति रश्मिभिः ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
एकादशस्तथा त्वष्टा विष्णुर्द्वादश उच्यते |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०६
भगीरथ उवाच
एकादशाहैरय़जं सदक्षिणै; र्द्विर्द्वादशाहैरश्वमेधैश्च देव |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
एकादशी धार्तराष्ट्री कौरवाणां महाचमूः |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
एकादशे तु दिवसे यः प्राप्ते प्राशते हविः |
४५ क
वन पर्व
अध्याय १३४
वन्द्यु उवाच
एकादशैकादशिनः पशूना; मेकादशैवात्र भवन्ति यूपाः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
एकादशैताः पृतना एकतश्च समागताः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
एकादशैताः श्रीजुष्टा वाहिन्यस्तव भारत |
४४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
एकादशैते रुद्रास्तु विकाराः पुरुषाः स्मृताः ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४४
व्यास उवाच
एकादशोऽन्तरात्मा च सर्वतः पर उच्यते ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय १०७
वैशम्पाय़न उवाच
एकाधिकशतं पूर्णं यथाय़ोगं विशां पते |
२० क
वन पर्व
अध्याय २०८
मार्कण्डेय़ उवाच
एकानंशेति यामाहुः कुहूमङ्गिरसः सुताम् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय १०
डुण्डुभ उवाच
एकानर्थान्पृथगर्थानेकदुःखान्पृथक्सुखान् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
पूजन्यु उवाच
एकान्ततो न विश्वासः कार्यो विश्वासघातकः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
एकान्तदर्शना वेदाः सर्वे विश्वावसो स्मृताः ||
४६ ख
वन पर्व
अध्याय ३३
द्रौपद्यु उवाच
एकान्तफलसिद्धिं तु न विन्दत्यलसः क्वचित् ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
एकान्तभक्तिः सततं नाराय़णपराय़णः ||
६६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
एकान्तभावोपगत एकान्ते सुसमाहितः ||
११६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३२
नरनाराय़णावू ऊचतुः
एकान्तभावोपगता वासुदेवं विशन्ति ते ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
एकान्तभावोपगतास्ते भक्ताः पुरुषोत्तमम् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
एकान्तभावोपगतास्ते हरिं प्रविशन्ति वै ||
६७ ख
विराट पर्व
अध्याय ३२
भीमसेन उवाच
एकान्तमाश्रितो राजन्पश्य मेऽद्य पराक्रमम् ||
१५ ख
विराट पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
एकान्तमास्थितं चैनमाससाद सुदुर्मतिः ||
४१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५१
धृतराष्ट्र उवाच
एकान्तविजय़स्त्वेव श्रूय़ते फल्गुनस्य ह ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय ३२
सूत उवाच
एकान्तशीली निय़तः सततं विजितेन्द्रिय़ः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय ११०
पाण्डुरु उवाच
एकान्तशीली विमृशन्पक्वापक्वेन वर्तय़न् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९
युधिष्ठिर उवाच
एकान्तशीली विमृशन्पक्वापक्वेन वर्तय़न् |
१० क
विराट पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
एकान्तसिद्धिं राजेन्द्र सम्प्राप्तश्च धनञ्जय़ः ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय २८०
मार्कण्डेय़ उवाच
एकान्तस्थमिदं वाक्यं प्रीत्या भरतसत्तम ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
जनमेजय़ उवाच
एकान्तिनस्तु पुरुषा गच्छन्ति परमं पदम् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
एकान्तिनस्ते पुरुषाः श्वेतद्वीपनिवासिनः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
जनमेजय़ उवाच
एकान्तिनां च का चर्या कदा चोत्पादिता विभो |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३४
वैशम्पाय़न उवाच
एकान्तिनां शरणदोऽभय़दो; गतिदोऽस्तु वः स मखभागहरः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
एकान्तिनो हि पुरुषा दुर्लभा वहवो नृप ||
५७ ग
उद्योग पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
एकान्ते निष्टनञ्शेषे भारार्त इव दुर्वलः |
७ क
विराट पर्व
अध्याय ४४
कृप उवाच
एकान्ते पार्थमासीनं कूपेऽग्निमिव संवृतम् |
१८ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
एकान्ते योजय़ित्वाश्वान्प्राय़ादभिमुखः परान् ||
२८ ख
विराट पर्व
अध्याय ४१
अर्जुन उवाच
एकान्ते रथमास्थाय़ पद्भ्यां त्वमवपीडय़ |
१७ क