chevron_left  भगवन्नाभ्यसूय़ामिarrow_drop_down
स्त्री पर्व
अध्याय १३
गान्धार्यु उवाच
भगवन्नाभ्यसूय़ामि नैतानिच्छामि नश्यतः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७६
भीष्म उवाच
भगवन्नाश्रमाः सर्वे पृथगाचारदर्शिनः |
८ क
वन पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
भगवन्नाहमप्येतद्रोचय़े द्यूतसंस्तवम् |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
धृतराष्ट्र उवाच
भगवन्नेवमेवैतद्यथा वदसि नारद |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७५
अम्वो उवाच
भगवन्नेवमेवैतद्यथाह पृथिवीपतिः |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
भगवन्नेवमेवैतद्यथाह भगवांस्तथा |
६ क
सभा पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
भगवन्न्याय़्यमाहैतं यथावद्धर्मनिश्चय़म् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
भगवन्नय़ं तव पुत्रो मम पुरोहितोऽस्त्विति ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५२
भीष्म उवाच
भगवन्परवन्तौ स्वो व्रूहि किं करवावहे ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८९
भीष्म उवाच
भगवन्पुत्रमिच्छामि भीष्मं प्रतिचिकीर्षय़ा |
५ क
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
भगवन्पौष्यः खल्वहम् |
१०७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३१
उमो उवाच
भगवन्भगनेत्रघ्न पूष्णो दशनपातन |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २८
अध्वर्युरु उवाच
भगवन्भगवद्वुद्ध्या प्रतिवुद्धो व्रवीम्यहम् |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
अर्जुन उवाच
भगवन्भूतभव्येश सर्वभूतसृगव्यय |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
भगवन्मुनिशार्दूल किमाज्ञापय़सि प्रभो ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१२
भीष्म उवाच
भगवन्यदिदं प्रेत्य सञ्ज्ञा भवति कस्यचित् |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६
व्यास उवाच
भगवन्यन्मय़ा पूर्वमभिगम्य तपोधन |
४ क
सभा पर्व
अध्याय १६
वृहद्रथ उवाच
भगवन्राज्यमुत्सृज्य प्रस्थितस्य तपोवनम् |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२१
यय़ातिरु उवाच
भगवन्वेत्थ लोकांश्च शाश्वतान्मम निर्जितान् ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
भगवन्वैतहव्यैर्मे युद्धे वंशः प्रणाशितः |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
उमो उवाच
भगवन्संशय़ं पृष्टस्तं मे व्याख्यातुमर्हसि |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
भगवन्संशय़ः कश्चिद्धृतराष्ट्रस्य मानसे |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
उमो उवाच
भगवन्संशय़ो मेऽत्र तं मे व्याख्यातुमर्हसि |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२१
यय़ातिरु उवाच
भगवन्संशय़ो मेऽस्ति कश्चित्तं छेत्तुमर्हसि |
१० क
मौसल पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
भगवन्संहृतं सर्वं त्वय़ा भूय़िष्ठमच्युत |
४६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
युधिष्ठिर उवाच
भगवन्सर्वधर्मज्ञ सर्वशास्त्रविशारद |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
उमो उवाच
भगवन्सर्वभूतेश भूतभव्यभवोद्भव |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
भीष्म उवाच
भगवन्सर्वभूतेश शूलपाणे महाव्रत |
४० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
उमो उवाच
भगवन्सर्वभूतेश सर्वधर्मभृतां वर |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३२
उमो उवाच
भगवन्सर्वभूतेश सुरासुरनमस्कृत |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
उमा उवाच
भगवन्सर्वभूतेषु प्रभवाभ्यधिको गुणैः |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५२
कुशिक उवाच
भगवन्सहधर्मोऽय़ं पण्डितैरिह धार्यते |
११ क
वन पर्व
अध्याय १८५
मार्कण्डेय़ उवाच
भगवन्साधु मेऽद्यान्यत्स्थानं सम्प्रतिपादय़ ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय १७२
वैशम्पाय़न उवाच
भगवांश्च महादेवः सगणोऽभ्याय़यौ तदा ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६४
भीष्म उवाच
भगवांश्चास्य सुप्रीतो वह्निर्भवति नित्यशः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
भगवांस्तपसा युक्तः श्रुत्वा किं नु करिष्यति |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय ५४
सूत उवाच
भगवानपि तं दृष्ट्वा कुशलं प्रतिवेद्य च |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
भगवानपि तच्छास्त्रं सञ्चिक्षेप पुरन्दरः |
८९ क
आदि पर्व
अध्याय २२५
वैशम्पाय़न उवाच
भगवानपि तिग्मांशुः समिद्धं खाण्डवं वनम् |
५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
भगवानस्य राज्यस्य कुलस्य च पराय़णम् ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय ४४
सूत उवाच
भगवानिव देवेशः शूलपाणिर्हिरण्यदः |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६८
भीष्म उवाच
भगवानिव सङ्क्रुद्धः पिनाकी युगसङ्क्षय़े ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५७
भीष्म उवाच
भगवानुशना चाह श्लोकमत्र विशां पते |
२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
भगवानेव नो मान्यो भगवानेव नो गुरुः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६७
दुर्योधन उवाच
भगवान्देवकीपुत्रो लोकं चेन्निहनिष्यति |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
भगवान्पावकस्तत्र स्वय़ं तिष्ठति वीर्यवान् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
भगवान्पूज्यते चात्र हास्यरूपेण शङ्करः |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
भगवान्भगहा नन्दी वनमाली हलाय़ुधः |
७३ क
सभा पर्व
अध्याय १०
नारद उवाच
भगवान्भूतसङ्घैश्च वृतः शतसहस्रशः |
२० क
वन पर्व
अध्याय १६३
अर्जुन उवाच
भगवान्मे प्रसन्नश्चेदीप्सितोऽय़ं वरो मम |
४७ क