शान्ति पर्व
अध्याय
१७६
भृगुरु उवाच
भूमिर्योनिरिह ज्ञेय़ा यस्यां सर्वं प्रसूय़ते ||
१७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
भूमिर्विशाला पार्थस्य माता पुत्रस्य भारत ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
भूमिवर्जं पुरं राजा जित्वा राजानमाहवे |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८०
भीष्म उवाच
भूमिष्ठं नोत्सहे योद्धुं भवन्तं रथमास्थितः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
भूमिष्ठमथ तं सङ्ख्ये सम्प्रदृश्य ततः पुनः |
४० क
वन पर्व
अध्याय
२३४
वैशम्पाय़न उवाच
भूमिष्ठमन्तरिक्षस्थाः शरवर्षैरवाकिरन् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४२
व्यास उवाच
भूमिष्ठानीव भूतानि पर्वतस्थो निशामय़ |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
भूमिष्ठो गदय़ा जघ्ने शरन्मेघानिवानिलः ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
भूमिष्ठो गौतमस्तस्य शरांश्चिक्षेप षोडश |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
५४
वृहदश्व उवाच
भूमिष्ठो नैषधश्चैव निमेषेण च सूचितः ||
२४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७४
वैशम्पाय़न उवाच
भूमिष्ठो वारणगतं योधय़ामास भारत ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय
६९
विदुर उवाच
भूमेः क्षमा च तेजश्च समग्रं सूर्यमण्डलात् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४७
भीष्म उवाच
भूमेः स्थैर्यं पृथुत्वं च काठिन्यं प्रसवात्मता |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२५
व्यास उवाच
भूमेरपि गुणं गन्धमाप आददते यदा |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
भूमेरेते गुणाः प्रोक्ता ऋषिभिस्तत्त्ववेदिभिः ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२८
अध्वर्युरु उवाच
भूमेर्गन्धगुणान्भुङ्क्षे पिवस्यापोमय़ान्रसान् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७७
भृगुरु उवाच
भूमेर्गन्धगुणान्वेत्ति रसं चाद्भ्यः शरीरवान् |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३१
व्यास उवाच
भूमेर्देहो जलात्सारो ज्योतिषश्चक्षुषी स्मृते |
७ क
वन पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
भूमेर्भारावतरणं महावीर्यौ करिष्यतः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२४
भीष्म उवाच
भूमेर्विवरगो भूत्वा तावन्तं कालमाप्स्यसि |
२३ ख
वन पर्व
अध्याय
२३८
दुर्योधन उवाच
भूमेर्विवरमन्वैच्छं प्रवेष्टुं व्रीडय़ान्वितः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२४
भीष्म उवाच
भूमेर्विवरसङ्गुप्तं गरुडेह ममाज्ञय़ा |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
भूमौ जाय़न्ति पुरुषा भूमौ निष्ठां व्रजन्ति च |
४६ क
आदि पर्व
अध्याय
१६९
वसिष्ठ उवाच
भूमौ तु निदधुः केचिद्भृगवो धनमक्षय़म् |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२१
स्त्र्यु उवाच
भूमौ निपतमानाय़ाः शरणं भव मेऽनघ ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३
नारद उवाच
भूमौ निपतितं दीनं वेपमानं कृताञ्जलिम् ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
भूमौ निपतितं वीरमनुशेते मृतं पतिम् ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
भूमौ निपतिता वृक्षाः सङ्घशस्तत्र शेरते ||
२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
भूमौ निपतितां चैनां सान्त्वय़ामास भारत ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
भूमौ निपतिताः सङ्ख्ये जलमेव यय़ाचिरे ||
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
भूमौ निपतिताश्चान्ये वमन्तो रुधिरं वहु |
४९ क
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
भूमौ निपतिताश्चान्ये वहवो विजय़ैषिणः |
५१ क
वन पर्व
अध्याय
२०५
व्याध उवाच
भूमौ निपतितो व्रह्मन्नुवाच प्रतिनादय़न् |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
भूमौ भूमिपतिः श्रेष्ठो देवाधिप इति स्मृतः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
भूमौ वरकुथास्तीर्णाः प्रेष्यैर्भरतसत्तम ||
१२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१९
गान्धार्यु उवाच
भूमौ विनिहतः शेते भीमेन शतधा कृतः ||
१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२१
गान्धार्यु उवाच
भूमौ विनिहतः शेते वातरुग्ण इव द्रुमः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३६
व्यास उवाच
भूमौ विपरिवर्तन्ते तिष्ठेद्वा प्रपदैरपि |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
भूमौ विवेष्टमानं तं रुधिरेण समुक्षितम् |
४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
भूमौ शय़ानान्रुधिरार्द्रगात्रा; न्विभिन्नभग्नापहृतोत्तमाङ्गान् ||
२९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
भूमौ शय़े जप्यपरो दर्भेष्वजिनसंवृतः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
भूमौ सत्यवती राजंश्छिन्नेव रुचिरा लता ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
भूमौ सदैव नाश्नीय़ान्नानासीनो न शव्दवत् ||
८८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
भूमौ सर्वे तदा राजन्भस्मभूताः प्रपेदिरे ||
३३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११९
नारद उवाच
भूमौ स्वर्गे च सम्वद्धां नदीं धूममय़ीं नृपः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
भूमौ हि जाय़ते सर्वं भूमौ सर्वं प्रणश्यति |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
भूम्यन्तरिक्षादिजलाशय़ानि; प्रसह्य भूतानि निहन्तुमीशाम् ||
४४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
भूराद्यान्सर्वभुवनानुत्पाद्य सदिवौकसः |
३५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
भूरिकल्याणद विभो पुरुसत्य नमोऽस्तु ते ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४
द्रुपद उवाच
भूरितेजा देवकश्च एकलव्यस्य चात्मजः |
२३ क