chevron_left  एवमुक्तस्तथेत्युक्त्वाarrow_drop_down
कर्ण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तथेत्युक्त्वा सोऽनुजज्ञे नृपोत्तमान् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय ४९
सूत उवाच
एवमुक्तस्तथेत्युक्त्वा सोऽस्तीको मातरं तदा |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५६
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तथेत्येवं प्रत्युक्त्वा च्यवनो मुनिः |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तदा चिन्त्य प्राह वाक्यं प्रजापतिः |
६६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७७
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तदा तार्क्ष्यः सर्वशास्त्रविशारदः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०५
नारद उवाच
एवमुक्तस्तदा तेन विश्वामित्रेण धीमता |
१ क
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
एवमुक्तस्तदा पार्थ विश्वामित्रो वलादिव |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तदा भीमो जरासन्धमरिन्दमः |
५ क
सभा पर्व
अध्याय ४६
सूत उवाच
एवमुक्तस्तदा राज्ञा व्यासशिष्यः प्रतापवान् |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७७
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तदा रामो जहि भीष्ममिति प्रभो |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तदा शूरैस्तानुवाच महावलः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तदा सूतः शिक्षितान्साधुवाहिनः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय १६६
गन्धर्व उवाच
एवमुक्तस्तदा सूदः सोऽनासाद्यामिषं क्वचित् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तदाचार्यः प्रत्युवाच स्मय़न्निव |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तदात्रिस्तु तमोनुदभवच्छशी |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तव सुतो नाव्रवीत्किञ्चिदप्यसौ |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९४
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तव सुतो निर्जगाम जनेश्वर |
१९ क
वन पर्व
अध्याय २४१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कर्णेन कर्णं राजाव्रवीत्पुनः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय २४०
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कर्णेन दैत्यानां वचनात्तथा |
४० क
वन पर्व
अध्याय २४१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कर्णेन धार्तराष्ट्रो विशां पते |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९३
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु कर्णेन पुत्रो दुर्योधनस्तव |
१४ क
वन पर्व
अध्याय २३६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कर्णेन राजा दुर्योधनस्तदा |
१५ क
वन पर्व
अध्याय २३८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कर्णेन राजा दुर्योधनस्तदा |
४९ क
वन पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कर्णेन राजा दुर्योधनस्तदा |
१३ क
वन पर्व
अध्याय ५६
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तस्तु कलिना पुष्करो नलमभ्ययात् |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कृष्णेन कुन्तीपुत्रो धनञ्जय़ः |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु कृष्णेन क्षिप्त्वा भल्लांश्चतुर्दश |
१२५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कृष्णेन धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु कृष्णेन धर्मराजो युधिष्ठिरः |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु कृष्णेन प्रेक्षमाणो युधिष्ठिरम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कृष्णेन राजा राजीवलोचनः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय २०
वासुदेव उवाच
एवमुक्तस्तु कौन्तेय़ सूतपुत्रस्तदा मृधे |
१ क
आदि पर्व
अध्याय २०६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कौन्तेय़ः पन्नगेश्वरकन्यया |
३३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कौन्तेय़ः पित्रा ज्येष्ठेन भारत |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कौन्तेय़ो गुडाकेशेन भारत |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु कौन्तेय़ो दीर्घप्रज्ञो महाद्युतिः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय २३८
दुर्योधन उवाच
एवमुक्तस्तु गन्धर्वः पाण्डवेन महात्मना |
३ क
वन पर्व
अध्याय २३३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु गन्धर्वैः कुन्तीपुत्रो धनञ्जय़ः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु गाङ्गेय़ः कुन्तीपुत्रेण धीमता |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु गाङ्गेय़ः पाण्डवानिदमव्रवीत् |
४६ क
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु गाङ्गेय़स्तद्युक्तं प्रत्यभाषत |
७७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु गोविन्दो विजय़ेन महात्मना |
४ क
आदि पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु तं द्रोणो मोक्षय़ामास भारत |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तु तेनासौ व्राह्मणो राजसत्तम |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु तैः शूरैः शकुनिः सौवलस्तदा |
६ क
वन पर्व
अध्याय २४१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तु तैर्विप्रैर्धार्तराष्ट्रो महीपतिः |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु दाशार्हः पाण्डवेन यशस्विना |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तु दाशार्हः स्यन्दनं प्रत्यवर्तय़त् |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४८
वासुदेव उवाच
एवमुक्तस्तु दुष्टात्मा नैव भावं व्यमुञ्चत |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२
स्त्र्यु उवाच
एवमुक्तस्तु देवेन्द्रस्तां स्त्रिय़ं प्रत्युवाच ह |
४६ ख