chevron_left  भीमसेनमनादृत्यarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय ११०
धृतराष्ट्र उवाच
भीमसेनमनादृत्य रणेऽय़ुध्यत सूतजः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमनुप्राप्य प्राप्तकालमनुस्मरन् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमपश्यन्त तेजसा संवृतं तदा ||
६१ ख
वन पर्व
अध्याय १५८
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनमपश्यन्तः सर्वे विमनसोऽभवन् ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमपासेधन्प्रवणादिव कुञ्जरम् ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमभिद्रुत्य रुरुधुः सर्वतोदिशम् ||
४ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमभिद्रुत्य विव्यधुः सहिता भृशम् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमभिद्रुत्य संरव्धाः पर्यवारय़न् ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमभिप्रेक्ष्य गजो गजमिवाह्वय़त् ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनममन्यन्त वैवस्वतमुखे हुतम् ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनममेय़ात्मा त्राणाय़ाजौ समभ्ययात् ||
९० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनममेय़ात्मा प्रत्यविध्यत्स्तनान्तरे ||
६२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३९
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमहं चापि युद्धे जेष्यामि दंशितः ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमिदं वाक्यं प्रम्लानवदनो नृपः ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनमिदं वाक्यमपदान्तरमव्रवीत् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनमिदं वाक्यमव्रवीन्मधुराक्षरम् ||
६९ ख
वन पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनमिमं चापि दुःखितं वनवासिनम् |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमुखांस्तांश्च त्रिभिस्त्रिभिरताडय़त् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमुखाः पार्थाः प्रतीय़ुर्वाहिनीं तव ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनमुखाः सर्वे पुत्रांस्ते प्रत्युपाद्रवन् ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनमुपादाय़ ऊर्ध्वमाचक्रमे ततः ||
१९ ख
सभा पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनमुवाचेदं भीष्मो मतिमतां वरः ||
२० ख
स्त्री पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनमय़ं दावं दिधक्षुरिव दृश्यते ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
भीमसेनमय़ं दुर्गं तात मन्दास्तितीर्षवः ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय २५५
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनरथं प्राप्य शर्म लेभे महारथः ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३४
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनरथं प्राप्य समसज्जन्त वाजिनः ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनरथं प्राप्य समसज्जन्त वेगिताः ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनरथव्यग्रं कर्णं भारत सात्यकिः |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनरवं पार्थः प्रतिजग्राह सर्वशः ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनरवं श्रुत्वा फल्गुनस्य च धन्विनः |
२९ क
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनवचः श्रुत्वा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनवचः श्रुत्वा द्रोणस्तत्परमप्रिय़म् |
७४ क
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
भीमसेनवधार्थं हि नित्यमभ्युद्यताय़ुधः |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनशरच्छिन्नैरास्तीर्णा वसुधाभवत् ||
७३ ख
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनश्च तेजस्वी क्रुद्धाशीविषदर्शनः ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनश्च वलवान्माद्रीपुत्रौ च पाण्डवौ |
३१ क
वन पर्व
अध्याय १३
अर्जुन उवाच
भीमसेनश्च शैव्यश्च शतधन्वा च निर्जितः ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनश्च सङ्क्रुद्धस्तेऽभ्यधावन्त कौरवान् ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनश्च समरे पालय़िष्यति वो ध्रुवम् ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनश्चतुःषष्ट्या सहदेवश्च पञ्चभिः |
७१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनश्चरन्मार्गान्सुवहून्प्रत्यदृश्यत |
४५ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनसुतं चापि दुर्मुखः सुमुखैः शरैः |
३७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनस्ततः कर्णं विहाय़ रथसत्तमम् |
३ क
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनस्ततः कृष्णमुवाच यदुनन्दनम् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनस्ततः क्रुद्धो भारद्वाजमविध्यत |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनस्ततः षष्ट्या सात्यकिर्नवभिः शरैः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनस्ततो राजन्धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः |
६३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनस्ततो राजन्नपनीते महाव्रते |
१०७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनस्तथा द्रौणिं कुर्वाणं कर्म दुष्करम् |
६ क
सभा पर्व
अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच
भीमसेनस्तथा प्राचीं सहदेवस्तु दक्षिणाम् ||
९ ख