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आदि पर्व
अध्याय १४८
व्राह्मण उवाच
भोजनं पुरुषश्चैकः प्रदेय़ं वेतनं मय़ा ||
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
भोजनं भोजनार्थिभ्यो दापय़ामास नित्यदा |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७७
भीष्म उवाच
भोजनाच्छादने चैव मात्रा पित्रा च सङ्ग्रहम् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय २२४
वैशम्पाय़न उवाच
भोजनाच्छादने चैषां नित्यं मे श्वशुरः स्थितः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
भोजनादेव ये लोकांस्त्राय़न्ते महतो भय़ात् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
भोजनानामपर्याप्तिस्तथा पेय़ेष्वतृप्तता |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
भोजनानि विचित्राणि रत्नानि विविधानि च |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६७
भीष्म उवाच
भोजनान्यथ पानानि राज्ञे दद्युर्गृहाणि च |
३६ क
वन पर्व
अध्याय २९
प्रह्लाद उवाच
भोजनान्यथ पानानि सर्वोपकरणानि च ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय १६५
गन्धर्व उवाच
भोजनीय़ानि पेय़ानि भक्ष्याणि विविधानि च |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
भीष्म उवाच
भोजने चोपहर्तव्ये तन्मांसं न स्म दृश्यते |
४८ क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
भोजने भीमसेनस्य पापः प्राक्षेपय़द्विषम् |
७२ क
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
भोजने भीमसेनस्य पुनः प्राक्षेपय़द्विषम् |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
भोजमेके न्यवर्तन्त जलसन्धमथापरे |
२१ क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
भोजराजकलत्रं च हृतशेषं नरोत्तमः ||
६७ ख
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
भोजराजन्यवृद्धैस्तु पीड्यमानैर्दुरात्मना ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
भोजराजस्य मध्यस्थो भ्राता कंसस्य वीर्यवान् ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
भोजराजस्य वृद्धस्य दुराचारो ह्यनात्मवान् |
३६ क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
भोजवृष्ण्यन्धकस्त्रीणां हतनाथानि निर्ययुः ||
३८ ख
मौसल पर्व
अध्याय ९
अर्जुन उवाच
भोजवृष्ण्यन्धका व्रह्मन्नन्योन्यं तैर्हतं युधि ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय २१०
वैशम्पाय़न उवाच
भोजवृष्ण्यन्धकानां च समवाय़ो महानभूत् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय २११
वैशम्पाय़न उवाच
भोजवृष्ण्यन्धकाश्चैव महे तस्य गिरेस्तदा ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
भोजस्तु क्षतसर्वाङ्गो भीमसेनेन मारिष |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
भोजस्तु प्रहसन्पार्थं वासुदेवं च माधवम् |
२० क
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
भोजाः प्रव्रजिताञ्श्रुत्वा वृष्णय़श्चान्धकैः सह |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८९
धृतराष्ट्र उवाच
भोजानीकं व्यतिक्रान्ते कथमासन्हि कौरवाः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
भोजानीकं समासाद्य हार्दिक्येनाभिरक्षितम् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
भोजानीकमतिक्रम्य काम्वोजानां च वाहिनीम् |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
भोजानीकेन शिष्टेन कलिङ्गारट्टवाह्लिकैः |
७९ क
मौसल पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
भोजान्धका महाराज शैनेय़ं पर्यवारय़न् ||
२९ ख
मौसल पर्व
अध्याय २
जनमेजय़ उवाच
भोजाश्च द्विजवर्य त्वं विस्तरेण वदस्व मे ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८२
वैशम्पाय़न उवाच
भोज्यं च विपुलं राजन्प्रेष्याश्च शतशोऽपरे ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५६
भीष्म उवाच
भोज्यमन्नं वदान्यस्य कदर्यस्य न वार्धुषेः ||
१० ग
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
भोजय़ामास विप्रांश्च देवर्षीनतिथींस्तथा ||
४९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११३
वृहस्पतिरु उवाच
भोजय़ित्वा दशशतं नरो वेदविदां नृप |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
भोजय़ित्वा द्विजान्कामैः सन्तर्प्य च महाधनैः |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
भोजय़ेच्च द्विजान्भक्त्या स मुच्येद्व्याधिकिल्विषैः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
भोवादिनस्तथा शूद्रा व्राह्मणाश्चार्यवादिनः ||
३३ ग
आदि पर्व
अध्याय ३
सूत उवाच
भोस्तक्षकेण नागराजेन विघ्नः कृतोऽस्मिन्कर्मणि |
१६६ ख
आदि पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
भोस्तात कन्यस वदे द्वय़ोर्नास्त्यत्र सम्भवः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय १३४
युधिष्ठिर उवाच
भौमं च विलमद्यैव करवाम सुसंवृतम् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
भौमं रजोऽथ राजेन्द्र शोणितेन प्रशामितम् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५६
भीष्म उवाच
भौमं व्रह्म द्विजश्रेष्ठा धारय़न्ति शमान्विताः ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
भौममैश्वर्यमिच्छन्तो न मृष्यन्ते परस्परम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
भौमस्य व्रह्मणो गुप्त्यै दीप्तमग्निमिवारणिः ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय १२५
वैशम्पाय़न उवाच
भौमेन प्राविशद्भूमिं पार्वतेनासृजद्गिरीन् |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय ३६
सञ्जय़ उवाच
भौमेन रजसा कीर्णे शस्त्रसम्पातसङ्कुले |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
भौवनः सह शक्रेण वहुचित्रं विशां पते |
७ क
आदि पर्व
अध्याय २८
सूत उवाच
भौवनः सुमहावीर्यः सोमस्य परिरक्षिता ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय २७४
मातलिरु उवाच
भ्रंशितः सर्वलोकेषु स हि व्रह्मास्त्रतेजसा ||
३० ख