स्त्री पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
भय़ार्ताः पाण्डुपुत्राणामागस्कृत्वा महात्मनाम् ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
भय़ार्ताः सम्प्रणश्यन्ति सिंहं क्षुद्रमृगा इव ||
४५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
भय़ार्तानां परित्राता संय़ुगेषु न संशय़ः ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४१
भीष्म उवाच
भय़ार्ताश्च क्षुधार्ताश्च वभ्रमुः सहिता वने ||
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
भय़ार्ताय़ ततस्तस्मै कृष्णो दत्त्वाभय़ं तदा |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
भय़ार्दिता प्रचुक्षोभ पुत्रस्य तव वाहिनी |
३१ क
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
भय़ार्दिता भग्नरथाश्वनागाः; पदातय़श्चैव सधार्तराष्ट्राः ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६८
सञ्जय़ उवाच
भय़ार्दितानामस्माकं वाचा मर्माणि कृन्तसि ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
भय़ावतीर्णः सन्त्रासादवद्धं वहु भाषसे ||
६६ ख
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
भय़े तु समुपक्रान्ते जरासन्धे समुद्यते |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
भय़े तेषां त्राणमिच्छन्सुवाहु; रभ्याहतानां रथय़ूथपेन ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
८४
यय़ातिरु उवाच
भय़े न मुह्याम्यष्टकाहं कदा चि; त्सन्तापो मे मानसो नास्ति कश्चित् |
९ क
वन पर्व
अध्याय
९९
लोमश उवाच
भय़े निमग्नस्त्वरितं मुमोच; वज्रं महत्तस्य वधाय़ राजन् ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
भय़े महति ये मग्नाः पाति नित्यं जनार्दनः ||
२० ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
भय़े महति योऽभीतो वभूव पृथिवीपतिः ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
भय़ेन त्रिदशा राजञ्शरणं च प्रपेदिरे ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
भय़ेन त्रिदशा राजञ्शरणं च प्रपेदिरे ||
५० ख
विराट पर्व
अध्याय
३६
अर्जुन उवाच
भय़ेन दीनरूपोऽसि द्विषतां हर्षवर्धनः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
भय़ेन महता भग्नः पुत्रो दुर्योधनस्तव |
६८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९१
भीष्म उवाच
भय़ेन महताविष्टो हृदि शोकेन चाहतः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
भय़ेषु साम्पराय़िकं निधत्स्व तं महानिधिम् ||
६५ ख
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
भय़ो महाभय़श्चैव मृत्युर्भूतान्तकस्तथा ||
५३ ग