शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजं समासाद्य विव्यधुर्निशितैः शरैः ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजं हतं श्रुत्वा देवैरपि सुदुःसहम् ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
मद्रराजः कथं शल्यो निय़ुक्तो रथिनां वरः |
१०१ क
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजः कृतः शल्यो धार्तराष्ट्रेण माधव |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजः प्रहस्येदं वचनं प्रत्यभाषत ||
१७ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजः शरौघेण छादय़ामास धन्विनम् ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजः सुसङ्क्रुद्धो वारय़ामास भारत ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजधनुर्मुक्तैः शरैः कनकभूषणैः |
४० क
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजप्रिय़े युक्तैर्मद्रकाणां महारथैः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजप्रय़ुक्तं च शरं छित्त्वा महावलः ||
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजभुजोत्सृष्टैः कङ्कवर्हिणवाजितैः |
४० क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजमभिद्रुत्य जघ्नतुः कङ्कपत्रिभिः ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजमभिप्रेक्ष्य प्रेषय़ामास भारत ||
४९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजमिदं वाक्यमव्रवीत्सूतनन्दनः ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजरथं क्रुद्धौ छादय़ामासतुः क्षणात् ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजरथं तूर्णं छादय़ामास पत्रिभिः ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजरथं तूर्णं परिवार्यावतस्थिरे ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजरथं तूर्णं पूरय़ामास पत्रिभिः ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०५
द्रोण उवाच
मद्रराजरथं तूर्णमारुरोह परन्तपः ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजवशं प्राप्तं मृत्योरास्यगतं यथा |
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजश्च दशभिर्विव्यधुः फल्गुनं रणे ||
२६ ग
आदि पर्व
अध्याय
११५
वैशम्पाय़न उवाच
मद्रराजसुता पाण्डुं रहो वचनमव्रवीत् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजस्ततः क्रुद्धः सात्यकिं नवभिः शरैः |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजस्ततः शल्यः श्वेतानश्वान्महाजवान् |
९ क
आदि पर्व
अध्याय
१७७
धृष्टद्युम्न उवाच
मद्रराजस्तथा शल्यः सहपुत्रो महारथः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
मद्रराजस्तथा शल्यो मध्यस्था ये च मानवाः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजस्तु कौन्तेय़मविध्यत्त्रिंशता शरैः |
७८ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजस्तु सङ्क्रुद्धो गृहीत्वा धनुरुत्तमम् |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजस्तु सुभृशं विद्धस्तेन महात्मना |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
मद्रराजस्य शल्यस्य द्रौणेश्चैव कृपस्य च ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजस्य शल्यस्य ध्वजाग्रेऽग्निशिखामिव |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजस्य शल्यस्य भूरिश्रवस एव च ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजात्मजः शूरः परेषां भय़वर्धनः |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
११६
वैशम्पाय़न उवाच
मद्रराजात्मजा तूर्णमन्वारोहद्यशस्विनी ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजे महाराज वित्रस्ताः शरविक्षताः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजे हते राजन्योधास्ते प्राद्रवन्भय़ात् ||
७ ग
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजे हते राजन्विरथे कृतवर्मणि |
७६ क
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजेन वलिना लाघवाच्छरवृष्टिभिः |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजो महाराज विराटं वाहिनीपतिम् |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजो महाराज सिंहद्विरदविक्रमः |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
मद्रराजो महेष्वासः शल्यः समितिशोभनः |
९८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
मद्रराजो महेष्वासः शल्यो मेऽतिरथो मतः |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजो हतः शल्यो हतः कृष्ण जय़द्रथः ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजोऽतिवलवान्सैनिकानास्तृणोच्छरैः ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजोऽपि तान्सर्वानाजघान त्रिभिस्त्रिभिः |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
मद्रराजोऽव्रवीत्कर्णं केतुं दृष्ट्वा महात्मनः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
मद्रसौवीरगान्धारैस्त्रिगर्तैश्च विशां पते |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
मद्राणामधिपं शूरं शरौघैः समवारय़त् ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
मद्राणामीश्वरः शल्यो राजा राजानमावृणोत् ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
मद्राणामीश्वरः शल्यो वीक्षमाणोऽपय़ाद्भय़ात् ||
७७ ख