आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५३
वासुदेव उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि |
९५ क
वन पर्व
अध्याय
२४७
देवदूत उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं यन्मां पृच्छसि मुद्गल |
३६ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं विस्तरेण महाद्युते |
२५ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं वैशम्पाय़नकीर्तितम् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं व्रह्मन्भक्तिमतो मय़ा |
९७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
भीष्म उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातं सुवर्णस्य महीपते |
६९ क
वन पर्व
अध्याय
१८९
मार्कण्डेय़ उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातमतीतानागतं मय़ा |
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११३
वृहस्पतिरु उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातमन्नदानफलं महत् |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
१८
सूत उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातममृतं मथितं यथा |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
एतत्ते सर्वमाख्यातमुपदेशे कृते सति |
७० क
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
एतत्ते सुकृतं कर्म नात्र किञ्चिन्न युज्यते |
५९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
एतत्त्रय़मवाप्तव्यमधर्मपरिवर्जितम् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
एतत्त्रय़ोदशं पर्व धर्मनिश्चय़कारकम् |
२०५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३३
शुक उवाच
एतत्त्वन्योन्यवैरूप्ये वर्तते प्रतिकूलतः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
एतत्त्वय़ा न विज्ञेय़ं रूपवानिति दृश्यते |
४२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४९
व्रह्मो उवाच
एतत्पदमनुद्विग्नं वरिष्ठं धर्मलक्षणम् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
एतत्पदमनुद्विग्नमेतद्व्रह्म सनातनम् |
५६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
एतत्परमकं गुह्यमेतत्परमकं पदम् |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
एतत्परमकं तेज एतत्परमकं सुखम् |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
एतत्परमकं व्रह्म एतत्परमकं यशः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
एतत्परमकं सत्यं कीर्तितं विश्वकर्मणा ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
एतत्परममानन्दं यत्तच्छाश्वतमेव च |
५५ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
एतत्पर्वशतं पूर्णं व्यासेनोक्तं महात्मना |
७० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८२
भृगुरु उवाच
एतत्पवित्रं ज्ञातव्यं तथा चैवात्मसंय़मः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६९
भीष्म उवाच
एतत्पवित्रं परमं परिव्राजक आश्रमे ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
२०३
व्याध उवाच
एतत्पवित्रं यज्ञानां तपो वै सङ्क्रमो मतः ||
३९ ख
सभा पर्व
अध्याय
५८
शकुनिरु उवाच
एतत्पापिष्ठमकरोर्यदात्मानं पराजितः |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११८
सञ्जय़ उवाच
एतत्पार्थस्य तु वचस्ततः श्रुत्वा महाद्युतिः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७३
भीष्म उवाच
एतत्पितामहेनोक्तमिन्द्राय़ भरतर्षभ |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
एतत्पुरुषसञ्ज्ञं वै गीय़ते ज्ञाय़ते न च ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्पूर्वं न पृष्टोऽहं न चास्माभिः प्रभाषितम् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
एतत्पृच्छामि ते विद्वन्नभिवाद्य प्रणम्य च |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
प्रह्राद उवाच
एतत्पृथिव्याममृतमेतच्चक्षुरनुत्तमम् |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३६
शम्वर उवाच
एतत्पृथिव्याममृतमेतच्चक्षुरनुत्तमम् |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
८६
युधिष्ठिर उवाच
एतत्पृष्टो महाप्राज्ञ यथावद्वक्तुमर्हसि ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१९६
मार्कण्डेय़ उवाच
एतत्प्रकरणं राजन्नधिकृत्य युधिष्ठिर |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२७
व्यास उवाच
एतत्प्रज्ञामय़ैर्धीरा निस्तरन्ति मनीषिणः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१८६
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्प्रत्यक्षतः सर्वं पूर्ववृत्तं द्विजोत्तम |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५९
द्युमत्सेन उवाच
एतत्प्रथमकल्पेन राजा कृतय़ुगेऽभजत् |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६१
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्प्रधानं न तु कामकारो; यथा निय़ुक्तोऽस्मि तथा चरामि |
४५ क
वन पर्व
अध्याय
१३०
लोमश उवाच
एतत्प्रभासते तीर्थं प्रभासं भास्करद्युते |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३०
भीष्म उवाच
एतत्प्रमाणं लोकस्य चक्षुरेतत्सनातनम् |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
एतत्प्रमाणमर्कस्य निर्दिष्टमिह भारत ||
४४ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
एतत्प्रव्रूहि भगवन्मय़ा पृष्टो यथातथम् ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय
१२५
लोमश उवाच
एतत्प्रस्रवणं पुण्यमिन्द्रस्य मनुजाधिप |
२० क
विराट पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
एतत्प्राप्तमहं मन्ये कार्यमात्ययिकं हितम् |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
एतत्प्राह पुरा सर्वं नारदो मम भारत |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६
द्रुपद उवाच
एतत्प्रय़ोजनं चात्र प्राधान्येनोपलभ्यते |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१२९
लोमश उवाच
एतत्प्लक्षावतरणं यमुनातीर्थमुच्यते |
१३ क