भीष्म पर्व
अध्याय
३४
श्रीभगवानु उवाच
मय़्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२९
श्रीभगवानु उवाच
मय़्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रय़ः |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
मय़्येव दण्डः पतति दैवात्परमदारुणः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
मय़्येव निपतत्येष सासिरित्यूर्ध्वदृष्टय़ः |
३६ क
आदि पर्व
अध्याय
१४१
वैशम्पाय़न उवाच
मय़्येव प्रहरैहि त्वं न स्त्रिय़ं हन्तुमर्हसि |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३४
श्रीभगवानु उवाच
मय़्येव मन आधत्स्व मय़ि वुद्धिं निवेशय़ |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२६
सञ्जय़ उवाच
मय़्येव हि विशेषेण तथा दुर्योधन त्वय़ि |
२३ क