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द्रोण पर्व
अध्याय १२८
सञ्जय़ उवाच
मध्यन्दिनगतं सूर्यं प्रतपन्तं गभस्तिभिः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२१
सञ्जय़ उवाच
मध्यन्दिनगतं सूर्यं प्रतपन्तमिवाम्वरे |
२ क
विराट पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
मध्यन्दिनगतं सूर्यं प्रतपन्तमिवाम्वरे |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
मध्यन्दिनगते सूर्ये नभस्याकुलतां गते |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
मध्यन्दिनगते सूर्ये प्रय़युः सर्व एव हि ||
५३ ग
शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
मध्यन्दिनगते सूर्ये यमराष्ट्रविवर्धनम् ||
४३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
मध्यन्दिनगतोऽर्चिष्माञ्शरदीव दिवाकरः ||
२० ख
विराट पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
मध्यन्दिनगतोऽर्चिष्माञ्शरदीव दिवाकरः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
मध्यन्दिनमनुप्राप्तं सहस्रांशुमिव प्रभो ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
मध्यन्दिनमनुप्राप्तो घर्मांशुरिव भारत ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
मध्यन्दिनमनुप्राप्तो भूतानीव तमोनुदः ||
१२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
मध्यन्दिने निशाकाले मध्यरात्रे च सर्वदा |
५२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
मध्यन्दिने महाराज रश्मिभिस्तपनो यथा ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
मध्यन्दिने यथादित्यं तपन्तमिव तेजसा |
५७ क
वन पर्व
अध्याय १८०
वैशम्पाय़न उवाच
मध्यन्दिने यथादित्यं प्रेक्षन्तस्तं महामुनिम् ||
४९ ख
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
मध्यप्राप्तांस्तथा श्रुत्वा हृष्ट आसं तथानघ ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
मध्यमं जवमास्थाय़ वह मामत्र सारथे ||
३३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
मध्यमं पाण्डवं वीरं स्प्रष्टुमिच्छामि केशव ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय २२४
मन्दपाल उवाच
मध्यमः कतमः पुत्रः कनिष्ठः कतमश्च ते ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
मध्यमः पाण्डवस्तीक्ष्णो भीमसेनो महावलः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
मध्यमः पाण्डुपुत्राणां निकृत्या संनिहन्यताम् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०८
युधिष्ठिर उवाच
मध्यमस्य च तुष्ट्यर्थं यथा स्थेय़ं विवर्धता ||
४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १८
गान्धार्यु उवाच
मध्यमानां तु नारीणां वृद्धानां चापराजित |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२९
व्यास उवाच
मध्यमानि द्वय़ान्याहुर्धर्मज्ञानीतराणि च |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२९
व्यास उवाच
मध्यमानि विशिष्टानि जातिधर्मोपधारणात् ||
१५ ख
विराट पर्व
अध्याय ३६
अर्जुन उवाच
मध्यमामिषगृध्राणां कुरूणामातताय़िनाम् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९७
वैशम्पाय़न उवाच
मध्यमे तु विराटं च जय़त्सेनं च मागधम् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४५
सनत्सुजात उवाच
मध्यमे मध्य आगच्छेदपि चेत्स्यान्मनोजवः |
१६ ख
वन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
मध्यमेन च गुल्मेन रक्षिता सारसञ्ज्ञिता |
११ क
वन पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
मध्यमैर्मध्यतां याति श्रेष्ठतां याति चोत्तमैः ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
मध्यमो मध्यमं चैव कनीय़ांस्तु कनीय़सम् ||
६० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
मध्यमोऽर्थं कलिं वालः काममेवानुरुध्यते ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
भीष्म उवाच
मध्यरात्रे यथान्याय़ं निद्रामाहारय़त्प्रभुः ||
४४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
मध्यरात्रे विहारस्ते मध्याह्ने च सदा भवेत् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६९
भीष्म उवाच
मध्यस्थ एव तिष्ठेत प्रशंसानिन्दय़ोः समः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय १३०
दुर्योधन उवाच
मध्यस्थः सततं भीष्मो द्रोणपुत्रो मय़ि स्थितः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२०
भीष्म उवाच
मध्यस्थः सत्त्वमातिष्ठंस्तथा वै सुखमृच्छति ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७०
सञ्जय़ उवाच
मध्यस्थतां च पार्थस्य धर्मपुत्रोऽव्रवीदिदम् ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९४
वामदेव उवाच
मध्यस्थदोषाः के चैषामिति नित्यं विचिन्तय़ेत् ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
मध्यस्थमिव पश्यामि समरे सव्यसाचिनम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
मध्यस्थमेकमात्मानं पापं यस्मिन्न विद्यते |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २५
भीष्म उवाच
मध्यस्थस्येह विप्रस्य योऽनूचानस्य भारत |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
मध्यस्थान्सर्वभूतेषु दान्ताञ्शमपराय़णान् |
१९ क
स्त्री पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
मध्यस्थो हि त्वमप्यासीर्न क्षमं किञ्चिदुक्तवान् |
२७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
मध्याह्ने तपतो राजन्भास्करस्य महाप्रभाः |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९९
सञ्जय़ उवाच
मध्याह्ने तु महाराज सङ्ग्रामः समपद्यत |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
अग्निरु उवाच
मध्याह्ने ददतो रुक्मं हन्ति पापमनागतम् ||
६१ ख
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
मध्याह्ने प्रत्यपाय़ाम निर्जिता धर्मसूनुना ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
मध्याह्ने सुमहारौद्रः सङ्ग्रामः समपद्यत |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
मध्ये कुरूणां कौन्तेय़ तस्य कालोऽय़मागतः |
५ ख