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उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
मुदं च परमां लेभे पाञ्चाल्यः सह वान्धवैः ||
५५ ख
आदि पर्व
अध्याय २००
वैशम्पाय़न उवाच
मुदं परमिकां प्राप्तास्तत्रोषुः पाण्डुनन्दनाः ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
मुदं परमिकां प्राप्य नार्यो दुःखमथात्यजन् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
मुदमप्राप्नुवन्तो वै काम्यके न्यवसंस्तदा ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
मुदा नूनं प्रपश्यन्ति शुभ्रा ह्यप्सरसां गणाः ||
३५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८
शल्य उवाच
मुदा परमय़ा युक्तः पालय़ामास देवराट् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय ७०
वृहदश्व उवाच
मुदा परमय़ा युक्तस्तेजसा च परेण ह |
३६ क
वन पर्व
अध्याय २४२
वैशम्पाय़न उवाच
मुदा परमय़ा युक्ताः प्रीत्या चापि नरेश्वर ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
मुदा परमय़ा युक्ताश्चुक्रुशुः सिंहवन्मुहुः ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय १९१
वैशम्पाय़न उवाच
मुदा परमय़ा युक्तो गोविन्दप्रिय़काम्यया ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९४
सञ्जय़ उवाच
मुदा समेतः परय़ा महात्मा; रराज राजन्सुरराजकल्पः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
मुदाभ्यनन्दन्सहिताश्च चक्रुः; प्रदक्षिणं धर्मभृतां वरिष्ठम् ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
भीम उवाच
मुदाभ्युपगतौ कृष्णावश्विनाविव वासवम् ||
७१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५१
भीष्म उवाच
मुदितः शुचिरभ्येति सर्वतो निर्भय़ः सदा |
१६ क
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
मुदिताः पाण्डुतनय़ा मनोहृदय़नन्दनम् |
३७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
मुदितानां वितृप्तानां तस्मिन्महति वैशसे |
१३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९
युधिष्ठिर उवाच
मुदितानामरण्येषु वसतां मृगपक्षिणाम् ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
मुदितान्सर्वसिद्धार्थान्नर्दमानान्समन्ततः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६५
भीष्म उवाच
मुदितो वसते प्राज्ञः शक्रेण सह पार्थिव |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय ५२
सूत उवाच
मुद्गरः शशरोमा च सुमना वेगवाहनः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
मुद्गरैर्मुसलैः प्रासैः क्षेपणीभिश्च सर्वशः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२६
व्यास उवाच
मुद्गलाय़ गतः स्वर्गं शतद्युम्नो महीपतिः ||
३२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३८
व्रह्मो उवाच
मुधा ज्ञानं मुधा वृत्तं मुधा सेवा मुधा श्रमः |
४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३८
व्रह्मो उवाच
मुधा दानं मुधा यज्ञो मुधाधीतं मुधा व्रतम् |
९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३८
व्रह्मो उवाच
मुधा प्रतिग्रहश्चैव मुधा धर्मो मुधा तपः ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
मुधावृत्तिरसक्तश्च सर्वभूतैरसंविदम् |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय १०९
मृग उवाच
मुनिं मूलफलाहारं मृगवेषधरं नृप |
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
मुनिं विरजसं द्रष्टुं गमिष्यामि तपोधनम् |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
मुनिः कालकवृक्षीय़ आजगामेति नः श्रुतम् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०५
भीष्म उवाच
मुनिः कालकवृक्षीय़ आजगामेति नः श्रुतम् |
३ ख
सभा पर्व
अध्याय ७
नारद उवाच
मुनिः कालकवृक्षीय़ आश्राव्योऽथ हिरण्यदः |
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
मुनिरु उवाच
मुनिः कालकवृक्षीय़ इत्येवमभिसञ्ज्ञितः ||
६१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
मुनिः कालकवृक्षीय़ ईजे क्रतुभिरुत्तमैः ||
६६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
मुनिः कालकवृक्षीय़ः कौसल्यं यदुवाच ह ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०५
भीष्म उवाच
मुनिः कालकवृक्षीय़ः प्रत्युवाच महाद्युतिः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय ६५
मेनको उवाच
मुनिः पारेति नद्या वै नाम चक्रे तदा प्रभुः ||
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
वासुदेव उवाच
मुनिः पाय़सदिग्धाङ्गीं रथे तूर्णमय़ोजय़त् |
२४ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
मुनिः पुराणः कौरव्य पाराशर्यो महाव्रतः |
८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
मुनिः सत्यवतीपुत्रः प्रीतः प्रादात्तपोवलात् ||
१७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
मुनिः सत्यवतीपुत्रो धृतराष्ट्रमभाषत ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
मुनिच्छद्माकृतिच्छन्ना वाणिज्यमुपजीवते ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
मुनिदेशात्परश्चैव प्रोच्यते दुन्दुभिस्वनः ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
मुनिना सम्प्रणीतानि कौरवाणां यशोभृताम् ||
१७७ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
मुनिरात्मपतिर्लोके सम्भोज्यश्च सहस्रदः |
६७ क
वन पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
मुनिरेकचरः श्रीमान्धर्मो विग्रहवानिव ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
मुनिर्दान्तो जितक्रोधो जितशिश्नोदरः सदा |
१३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
मुनिर्भूत्वाथ वा भीम फलान्यद्धि सुदुर्मते |
७१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६८
सञ्जय़ उवाच
मुनिर्यथारण्यगतो भाषसे धर्मसंहितम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
मुनिवेषधरश्चासि चीरवासाश्च लक्ष्यसे |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९३
भीष्म उवाच
मुनिश्च स्यात्सदा विप्रो देवांश्चैव सदा यजेत् |
६ क