अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
मन्त्रहीनं क्रिय़ाहीनं यच्छ्राद्धं परिविष्यते |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
मन्त्रहोमजपैरन्यः कार्यार्थं प्रीय़ते जनः ||
१४८ ख
आदि पर्व
अध्याय
३९
सूत उवाच
मन्त्रागदैर्विषहरै रक्ष्यमाणं प्रय़त्नतः ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
मन्त्रास्तत्र भविष्यन्ति प्रय़ुक्ताः सव्यसाचिना ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
मन्त्राहुतिमहाहोमैर्हूय़मानश्च पावकः |
२६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१०
संवर्त उवाच
मन्त्राहूतो यज्ञमिमं मय़ाद्य; पश्यस्वैनं मन्त्रविस्रस्तकाय़म् ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९६
द्रोण उवाच
मन्त्राय़ समुपानीतैर्धृतराष्ट्रहितैर्नृप |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
मन्त्रिणः प्रकृतिज्ञाः स्युस्त्र्यवरा महदीप्सवः ||
४४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७२
भीष्म उवाच
मन्त्रिणश्च द्विजांश्चैव तथैव च पुरोहितान् |
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
मन्त्रिणश्चैव कुर्वीथा द्विजान्विद्याविशारदान् |
२० क
आदि पर्व
अध्याय
१९७
विदुर उवाच
मन्त्रिणस्ते न ते श्रेय़ः प्रपश्यन्ति विशेषतः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
मन्त्रिणां च भवेत्क्रोधो विस्फूर्जितमिवाशनेः ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
४६
सूत उवाच
मन्त्रिणां तु वचः श्रुत्वा स राजा जनमेजय़ः |
३३ क
सभा पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
मन्त्रिणो भ्रातरश्चास्य तद्वचः प्रत्यपूजय़न् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
मन्त्रिणो मन्त्रमूलं हि राज्ञो राष्ट्रं विवर्धते ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
मन्त्रिणो यस्य कुलजा असंहार्याः सहोषिताः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
मन्त्रिणो वालखिल्यास्तु सारस्वत्यो गणो ह्यभूत् |
११७ क
आदि पर्व
अध्याय
४५
सूत उवाच
मन्त्रिणोऽथाव्रुवन्वाक्यं पृष्टास्तेन महात्मना |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
३३
सूत उवाच
मन्त्रिणोऽस्य वय़ं सर्वे भविष्यामः सुसंमताः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
मन्त्रिण्यननुरक्ते तु विश्वासो न हि विद्यते |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२६
सञ्जय़ उवाच
मन्त्रितं तव पुत्रस्य ते सर्वमवमेनिरे |
४ क
विराट पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
मन्त्रिद्विजान्सूतमुखान्विशस्तथा; ये चापि केचित्परिषत्समासते |
४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
११
धृतराष्ट्र उवाच
मन्त्रिप्रधानाश्च गुणाः षष्टिर्द्वादश च प्रभो ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
३८
सूत उवाच
मन्त्रिभिः सह धर्मज्ञः समन्तात्परिरक्षितः ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
५६
वृहदश्व उवाच
मन्त्रिभिः सहितः सर्वै राजभक्तिपुरस्कृतः |
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
मन्त्रिभिर्मन्त्रितं सार्धं त्वय़ा यत्पृथुलोचन |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
३८
सूत उवाच
मन्त्रिभिर्मन्त्रय़ामास सह संविग्नमानसः ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
१२६
लोमश उवाच
मन्त्रिष्वाधाय़ तद्राज्यं वननित्यो वभूव ह ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय
६५
धृतराष्ट्र उवाच
मन्त्री च विदुरो धीमान्सर्वशास्त्रविशारदः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३७
द्रोण उवाच
मन्त्री जनार्दनो यस्य भ्राता यस्य धनञ्जय़ः |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
मन्त्री नेता च वन्धुश्च मानी चात्यन्तमुच्छ्रितः ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
मन्त्रे गुप्ते सम्यगनुष्ठिते च; स्वल्पो नास्य व्यथते कश्चिदर्थः ||
१०० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
मन्त्रे च निश्चय़े चैव षाड्गुण्यस्य च चिन्तने |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
मन्त्रे चामात्यसमितौ कुत एव स्वतन्त्रता ||
१३९ ख
सभा पर्व
अध्याय
१७
कृष्ण उवाच
मन्त्रे मतिमतां श्रेष्ठौ युद्धशास्त्रविशारदौ ||
२५ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
मन्त्रेण वलवान्कश्चिदुभाभ्यां वा युधिष्ठिर ||
८४ ख
वन पर्व
अध्याय
२१०
मार्कण्डेय़ उवाच
मन्त्रैः प्रशमिता ह्येते नेष्टं मुष्णन्ति यज्ञिय़म् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
मन्त्रैरभ्यर्चितः पुण्यैः स्तूय़मानो महर्षिभिः |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
मन्त्रैरुच्चावचैर्विप्रा येन कामेन तच्छृणु ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११८
सञ्जय़ उवाच
मन्त्रैर्हि पूतस्य महाध्वरेषु; यशस्विनो भूरिसहस्रदस्य |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
मन्त्रैश्च संय़ुय़ोजाशु सोऽभवत्परशुर्महान् ||
४८ ख
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
मन्त्रो रथन्तरश्चैव हरिमान्वसुमानपि |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३१
श्रीभगवानु उवाच
मन्त्रोऽहमहमेवाज्यमहमग्निरहं हुतम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११
शकुनिरु उवाच
मन्त्रोऽय़ं जातकर्मादि व्राह्मणस्य विधीय़ते |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
मन्त्रोऽय़ं मन्त्रितो राजन्कुलैरष्टादशावरैः ||
३४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
मन्त्रौषधिक्रिय़ातीतो व्याधिरत्युल्वणो यथा ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
मन्त्रौषधिक्रिय़ादानैर्व्याधौ देहादिवाहृते ||
७० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
युधिष्ठिर उवाच
मन्त्रय़स्व महाप्राज्ञ हितैषी मम नित्यशः |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
युधिष्ठिर उवाच
मन्त्रय़स्व महाराज नित्यं मद्धितमुत्तमम् |
७९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२८
यतिरु उवाच
मन्त्रय़स्वैनमुन्नीय़ परवन्तं विशेषतः ||
१२ ख