शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
भीष्म उवाच
मांसमन्नं मूलफलमन्यद्वा तत्र किञ्चन ||
३२ ख
सभा पर्व
अध्याय
१०
नारद उवाच
मांसमेदोवसाहारैरुग्रश्रवणदर्शनैः |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६२
नारद उवाच
मांसमेदोस्थिशुक्राणां प्रादुर्भावस्ततः पुनः ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
मांसवर्षं पुनस्तीव्रमासीत्कृष्णचतुर्दशीम् |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
मांसशोणितचित्रेव शातकौम्भमय़ीव च ||
९ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
७८
नकुल उवाच
मांसशोणितभृन्मर्त्यः प्रतिय़ुध्येत को युधि ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
मांसशोणितमज्जादो यत्ततो रुद्र उच्यते ||
९८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४६
वासुदेव उवाच
मांसशोणितमज्जादो यत्ततो रुद्र उच्यते ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
मांसशोणितवर्षं च वृष्टं देवेन माधव |
२१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
मांसशोणितसङ्घाता अन्योन्यस्योपजीविनः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८०
भरद्वाज उवाच
मांसशोणितसङ्घाते मेदःस्नाय़्वस्थिसञ्चय़े |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
मांसस्य भक्षणे राजन्योऽधर्मः कुरुपुङ्गव |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
मांसस्याभक्षणं प्राहुर्निय़ताः परमर्षय़ः ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
भीष्म उवाच
मांसस्याभक्षणे धर्मो विशिष्टः स्यादिति श्रुतिः ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४८
भीष्म उवाच
मांसस्वादुकरं सूदं सौगन्धमिति सञ्ज्ञितम् ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
मांसानि तेषां खादन्तो हसिष्यन्ति मृगद्विजाः ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
मांसान्युत्कृत्य वै दद्यामर्जुनार्थे महीपते ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
मांसापनय़नं ज्ञात्वा व्याघ्रस्तेषां तु तद्वचः |
५४ क
शल्य पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
मांसैरपि जुहावेष्टिमक्षीय़न्त ततोऽसुराः |
२७ क
शल्य पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
मांसैरभिजुहोतीति तव राष्ट्रं मुनिर्वकः ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११६
युधिष्ठिर उवाच
मांसैर्वहुविधैः प्रोक्तस्त्वय़ा श्राद्धविधिः पुरा |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
मांसोदनं दधि क्षीरं पाय़सं मधुसर्पिषी ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
माकन्दीमथ गङ्गाय़ास्तीरे जनपदाय़ुताम् |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
मागधं पुरतः कृत्वा भीमसेनं समभ्ययात् ||
३१ ग
सभा पर्व
अध्याय
१४
भीम उवाच
मागधं साधय़िष्यामो वय़ं त्रय़ इवाग्नय़ः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
मागधश्च जय़त्सेनः सौवलश्च वृहद्वलः ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
मागधश्च जय़त्सेनो जारासन्धिर्महावलः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
मागधस्य पुनः पुत्रं हत्वा षड्भिरजिह्मगैः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
मागधाः सर्वतो यत्ता युय़ुधानमुपाद्रवन् ||
३३ ख
सभा पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
मागधानां सुरुचिरं चैत्यकान्तं समाद्रवन् |
१७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
मागधानामधिपतिं जय़त्सेनं जनार्दन |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
मागधानामधिपतिर्जय़त्सेनो महावलः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
मागधान्द्रवतो दृष्ट्वा हतशेषान्समन्ततः |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
मागधाश्च कलिङ्गाश्च दाशेरकगणैः सह |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८४
वैशम्पाय़न उवाच
मागधेनार्चितो राजन्पाण्डवः श्वेतवाहनः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
मागधेन्द्रेण वलिना वशे कृत्वा प्रतापिता ||
३८ ख
सभा पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
मागधैर्विपुलैः सैन्यैर्वाहुल्यवलदर्पितैः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
मागधैश्च कलिङ्गैश्च पिशाचैश्च विशां पते ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
मागधो निहतः सङ्ख्ये सौभद्रेण महात्मना ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
मागधो येन नृपतिस्तद्रथानीकमन्वय़ात् ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४९
भीष्म उवाच
मागधो वामकश्चैव द्वौ वैश्यस्योपलक्षितौ |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
मागधोऽथ महीपालो गजमैरावतोपमम् |
४२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
मागधोऽथाप्यतिक्रान्तो द्विरदेन प्रमाथिना |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
मागधोऽपहृतो राजा सर्वसैन्यस्य पश्यतः ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
माघमासं प्रय़ागे तु निय़तः संशितव्रतः |
३६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
माघमासे तिलान्यस्तु व्राह्मणेभ्यः प्रय़च्छति |
७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८६
वैशम्पाय़न उवाच
माघी च पौर्णमासीय़ं मासः शेषो वृकोदर ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
माघोऽय़ं समनुप्राप्तो मासः पुण्यो युधिष्ठिर |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
माचेल्लका ललित्थाश्च केकय़ा मद्रकास्तथा |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
माचेल्लकांस्त्रिगर्तांश्च यौधेय़ांश्चार्दय़च्छरैः ||
१६ ख