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वन पर्व
अध्याय २२७
वैशम्पाय़न उवाच
ममापि हि महान्हर्षो यदहं भीमफल्गुनौ |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
ममाप्यनुपमं भूय़ो देवेभ्यो विद्धि भारत ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
सञ्जय़ उवाच
ममाप्यमोघा दत्तेय़ं शक्तिः शक्रेण वै द्विज |
४७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
ममाप्यस्त्रं प्रय़च्छ त्वं चक्रं रिपुहरं रणे ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय २५
युधिष्ठिर उवाच
ममाप्येतन्मतं पार्थ त्वय़ा यत्समुदाहृतम् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
ममाप्येतन्मतं पार्थ यदिदं ते प्रभाषितम् ||
३९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
ममाप्येतावपर्याप्तौ कर्णशल्यौ जनार्दन ||
७८ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
ममाप्येते महाराज भवद्भिर्य उदाहृताः |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय ९१
गङ्गो उवाच
ममाप्येवं मतं देवा यथावदत मानघाः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७६
अम्वो उवाच
ममाप्येष महान्व्रह्मन्हृदि कामोऽभिवर्तते |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय ११५
पाण्डुरु उवाच
ममाप्येष सदा माद्रि हृद्यर्थः परिवर्तते |
७ क
आदि पर्व
अध्याय १४९
कुन्त्यु उवाच
ममाप्येषा मतिर्व्रह्मन्विप्रा रक्ष्या इति स्थिरा |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय १९६
द्रोण उवाच
ममाप्येषा मतिस्तात या भीष्मस्य महात्मनः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
ममाप्येषा समुत्पन्ना चिन्ता या भवतां मता ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४५
व्राह्मण उवाच
ममाभिगमनं प्राप्तो वाच्यश्च वचनं त्वय़ा ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
वासुदेव उवाच
ममार तं मृतं दृष्ट्वा देवापिः संश्रितो वनम् ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
ममार राक्षसं रूपं भूय़ः कृत्वा विभीषणम् ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय १६०
गन्धर्व उवाच
ममार राज्ञः कौन्तेय़ गिरावप्रतिमो हय़ः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
ममार्जुनस्य च विभो यथातत्त्वं प्रचक्ष्व मे ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
ममावसानाच्छान्तिरस्तु प्रजानां; सङ्गच्छन्तां पार्थिवाः प्रीतिमन्तः |
४९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
ममाविशन्ति मर्माणि नेमे वाणाः शिखण्डिनः ||
५८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
द्रोण उवाच
ममाशु निधने राजन्यतस्व सह सोदरैः ||
५७ ख
वन पर्व
अध्याय १११
वेश्यो उवाच
ममाश्रमः काश्यपपुत्र रम्य; स्त्रिय़ोजनं शैलमिमं परेण |
११ क
वन पर्व
अध्याय १९३
उत्तङ्क उवाच
ममाश्रमसमीपे वै समेषु मरुधन्वसु ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
जैगीषव्य उवाच
ममाष्टगुणमैश्वर्यं दत्तं भगवता पुरा |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
वसिष्ठ उवाच
ममास्तु धिगवुद्धस्य योऽहं मग्नमिमं पुनः |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय ४२
जरत्कारुरु उवाच
ममाय़ं पितरो नित्यं हृद्यर्थः परिवर्तते |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
ममाय़ं स्वकृतो दोषो याहं भीष्मरथात्तदा |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
ममाय़माचार्यसुतो द्रोणस्यातिप्रिय़ः सुतः |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
ममाय़मिति ताः सर्वाः पुत्रार्थिन्योऽभिचक्रमुः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
वसिष्ठ उवाच
ममाय़मिति मन्वानस्तत्रैव परिवर्तते ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
ममाय़मिति येनाय़ं मन्यते न च मन्यते ||
१०५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२०
भीष्म उवाच
ममाय़मिति राजा यः स पर्वत इवाचलः ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
ममृदुस्तस्य नगरं द्रुपदस्य महौजसः ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
व्रह्मो उवाच
ममेति च भवेन्मृत्युर्न ममेति च शाश्वतम् ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३
सहदेव उवाच
ममेति च भवेन्मृत्युर्न ममेति च शाश्वतम् ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १३
वासुदेव उवाच
ममेति द्व्यक्षरो मृत्युर्न ममेति च शाश्वतम् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
महेश्वर उवाच
ममेदं गात्रजं शक्र कवचं गृह्य भास्वरम् |
६२ ख
वन पर्व
अध्याय ११६
अकृतव्रण उवाच
ममेदं वचनात्तात कृतं ते कर्म दुष्करम् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२८
भीष्म उवाच
ममेदं स्यान्ममेदं स्यादित्ययं काङ्क्षते जनः ||
४६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५९
द्युमत्सेन उवाच
ममेदमिति नास्यैतत्प्रवर्तेत कलौ युगे |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
ममेदमिति यच्चेदं पुरं राष्ट्रं च मन्यसे |
१५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
ममेदमिति लोकेऽस्मिन्न भवेत्सम्परिग्रहः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ३८
शमीक उवाच
ममेमां धर्षणां त्वत्तः प्रेक्ष्य राजन्नमर्षिणा ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय १३१
वैशम्पाय़न उवाच
ममेमे पुरुषा नित्यं कथय़न्ति पुनः पुनः |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
ममेशानो वरं दत्त्वा तत्रैवान्तरधीय़त ||
१९६ ख
विराट पर्व
अध्याय २०
द्रौपद्यु उवाच
ममेह भीम कैकेय़ी रूपाभिभवशङ्कय़ा |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
ममेह सुनृशंसस्य संवीतस्यास्य चर्मणा ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय १३२
वैशम्पाय़न उवाच
ममेय़ं वसुसम्पूर्णा पुरोचन वसुन्धरा |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
ममेय़मिति चोवाच व्राह्मणो यस्य साभवत् ||
१२ ख